Brown egg trade: भारत और बांग्लादेश के बीच ब्राउन अंडों का कारोबार पिछले कुछ समय से खासा चर्चा में है. इसकी सबसे बड़ी वजह दोनों देशों में अंडों की खपत का फर्क और बाजार में बनती–बिगड़ती सप्लाई चेन है. जहां भारत में सफेद अंडों की खपत ज्यादा है, वहीं बांग्लादेश में ब्राउन अंडे लोगों की पहली पसंद माने जाते हैं. रोजमर्रा के खाने से लेकर होटल और बेकरी उद्योग तक, वहां ब्राउन अंडों की मांग लगातार बनी रहती है. लेकिन दोनों देशों के बीच चल रहे विवाद से अंड़ों के कारोबार पर खासा असर पड़ रहा है.
बांग्लादेश में क्यों ज्यादा पसंद किए जाते हैं ब्राउन अंडे
पोल्ट्री विशेषज्ञों के मुताबिक बांग्लादेश में ब्राउन अंडों को ज्यादा पोषक और “नेचुरल” माना जाता है. यही कारण है कि आम उपभोक्ता सफेद अंडों की तुलना में ब्राउन अंडे खरीदना पसंद करते हैं. हालांकि बांग्लादेश में ब्राउन अंडों का स्थानीय उत्पादन भी होता है, लेकिन यह घरेलू जरूरतों को पूरा करने के लिए पर्याप्त नहीं है. जैसे ही मांग बढ़ती है, बाजार का रुख भारत की ओर हो जाता है.
भारत और बांग्लादेश में कीमतों का बड़ा अंतर
कीमतों की बात करें तो दोनों देशों के बीच भारी अंतर देखने को मिलता है. भारत में पोल्ट्री किसान जहां एक ब्राउन अंडा औसतन 7 से 8 रुपये में बेच रहे हैं, वहीं बांग्लादेश में यही अंडा 15 रुपये या उससे भी अधिक कीमत पर बिक चुका है. कई बार त्योहारों या आपूर्ति बाधित होने के दौरान कीमतें और ऊपर चली जाती हैं. यही मूल्य अंतर भारतीय अंडों को बांग्लादेशी कारोबारियों के लिए बेहद आकर्षक बनाता है.
सप्लाई ठप होने से बढ़ी परेशानी
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कुछ महीनों में बांग्लादेश में सामाजिक और राजनीतिक अस्थिरता के चलते ब्राउन अंडों की सप्लाई बुरी तरह प्रभावित हुई है. इंटरनेशनल एग काउंसिल के प्रेसिडेंट और पोल्ट्री उद्योग से जुड़े एक्सपर्ट के अनुसार, हालात बिगड़ने से भारत से कानूनी रूप से होने वाली अंडों की सप्लाई रुक गई है. पहले जब स्थिति सामान्य थी, तब भारत से नियमित रूप से बड़े पैमाने पर ब्राउन अंडे बांग्लादेश भेजे जाते थे.
आंकड़े बताते हैं कारोबार की गहराई
सरकारी और उद्योग से जुड़े आंकड़ों पर नजर डालें तो अक्टूबर 2024 में अकेले बांग्लादेश ने भारत से करीब 4.5 करोड़ ब्राउन अंडों का आयात किया था. इसके बाद 2025 की शुरुआत में भी यह सिलसिला जारी रहा. लेकिन हालात बिगड़ते ही यह सप्लाई थम गई, जिसका सीधा असर बांग्लादेशी बाजार में दिखा. दुकानों पर अंडों की कमी और कीमतों में तेज उछाल ने आम उपभोक्ताओं की जेब पर बोझ बढ़ा दिया.
भारतीय उत्पादन की अपनी सीमाएं
एक्सपर्ट का कहना है कि भारत में कुल अंडा उत्पादन में ब्राउन अंडों की हिस्सेदारी सफेद अंडों की तुलना में काफी कम है. इसी वजह से निर्यात मांग पूरी करना हमेशा आसान नहीं होता. इसके बावजूद बांग्लादेश जैसे पड़ोसी देशों की जरूरतों को देखते हुए भारतीय पोल्ट्री उद्योग धीरे–धीरे ब्राउन अंडों के उत्पादन को बढ़ाने की दिशा में काम कर रहा है.
खाड़ी देशों से भी बढ़ रही मांग
बांग्लादेश ही नहीं, बल्कि खाड़ी देशों में भी ब्राउन अंडों की मांग तेजी से बढ़ रही है. वहां स्वास्थ्य के प्रति जागरूक उपभोक्ता ब्राउन अंडों को प्राथमिकता दे रहे हैं. इससे भारतीय ब्राउन अंडों पर अंतरराष्ट्रीय दबाव और बढ़ गया है.
विशेषज्ञों का मानना है कि अगर बांग्लादेश में हालात सामान्य होते हैं और भारत से सप्लाई फिर शुरू होती है, तो वहां कीमतों में कुछ राहत मिल सकती है. साथ ही स्थानीय उत्पादन पर निर्भरता भी कम होगी. फिलहाल, सप्लाई की कमी और बढ़ती कीमतों ने यह साफ कर दिया है कि भारतीय ब्राउन अंडे बांग्लादेश के लिए कितने अहम हैं. आने वाले समय में यह कारोबार दोनों देशों के पोल्ट्री सेक्टर के लिए नई संभावनाएं खोल सकता है.