बाहर निकलने से पहले हो जाएं सावधान! तेज धूप बन सकती है जानलेवा, तुरंत बदल लें ये आदतें

Heatwave Advisory: उत्तर भारत में बढ़ती गर्मी और लू किसानों के लिए बड़ी चुनौती बन रही है. ऐसे मौसम में दोपहर 12 से 4 बजे तक खेतों में काम करने से बचना चाहिए. किसानों को पर्याप्त पानी, ORS, नींबू पानी और छाछ का सेवन करना चाहिए ताकि शरीर में पानी की कमी न हो.

Isha Gupta
नोएडा | Updated On: 12 Jun, 2026 | 10:02 PM

Heat Wave Alert: उत्तर भारत में बढ़ती गर्मी और लू अब लोगों के साथ-साथ किसानों के लिए भी बड़ी चुनौती बनती जा रही है. तेज धूप, गर्म हवाएं और लगातार बढ़ता तापमान खेतों में काम करने वाले किसानों की सेहत पर सीधा असर डाल रहा है. ऐसे मौसम में थोड़ी सी लापरवाही हीट स्ट्रोक, डिहाइड्रेशन और कमजोरी जैसी गंभीर समस्याएं पैदा कर सकती है. यही वजह है कि अब किसानों को सिर्फ फसल ही नहीं, बल्कि अपनी सेहत का भी खास ध्यान रखना जरूरी हो गया है.

दोपहर की तेज धूप से बचना है जरूरी

कृषि विभाग के मुताबिक दोपहर 12 बजे से शाम 4 बजे तक सबसे ज्यादा गर्मी रहती है. इस दौरान खेतों में काम करने से शरीर तेजी से पानी खोता है और लू लगने का खतरा बढ़ जाता है. किसानों को कोशिश करनी चाहिए कि सिंचाई, दवाई छिड़काव या अन्य भारी काम सुबह जल्दी या शाम के समय करें. इससे शरीर पर गर्मी का असर कम पड़ेगा और काम भी आसानी से हो सकेगा.

शरीर में पानी की कमी न होने दें

गर्मी में लगातार पसीना निकलने से शरीर में पानी और जरूरी मिनरल्स की कमी होने लगती है. इसलिए दोपहर के समय बाहर निलकने से पहले या किसानों को खेत पर जाते समय पानी की बोतल जरूर साथ रखनी चाहिए. केवल पानी ही नहीं, बल्कि ORS घोल, नींबू पानी, छाछ, बेल का शरबत और सत्तू जैसे देसी पेय भी शरीर को ठंडा रखने में मदद करते हैं. खाली पेट खेत में काम करने से कमजोरी और चक्कर आने की संभावना बढ़ जाती है, इसलिए हल्का भोजन करके ही बाहर निकलें.

सही कपड़ों का करें चुनाव

तेज गर्मी में हल्के रंग के सूती कपड़े पहनना सबसे बेहतर माना जाता है. इससे शरीर को हवा मिलती रहती है और पसीना जल्दी सूख जाता है. खेत में काम करते समय सिर को ढकना भी बेहद जरूरी है. किसान गमछा, टोपी या छाता का इस्तेमाल कर सकते हैं. इससे सीधे धूप का असर कम होता है और शरीर ज्यादा गर्म नहीं होता.

खेत और फसलों को भी चाहिए अतिरिक्त देखभाल

भीषण गर्मी का असर केवल इंसानों पर ही नहीं, बल्कि फसलों पर भी पड़ता है. तापमान बढ़ने से मिट्टी की नमी तेजी से खत्म होती है, जिससे फसल सूखने लगती है. ऐसे में किसानों को समय-समय पर सिंचाई करनी चाहिए. खेतों में मल्चिंग तकनीक अपनाने से मिट्टी में नमी लंबे समय तक बनी रहती है. पशुपालकों को भी अपने पशुओं को छांव में रखना चाहिए और उन्हें पर्याप्त पानी देना चाहिए.

लू लगने के संकेतों को नजरअंदाज न करें

अगर किसी किसान को तेज सिरदर्द, चक्कर, कमजोरी, उल्टी या शरीर का तापमान बढ़ता महसूस हो, तो इसे सामान्य गर्मी समझकर नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. तुरंत छांव में आराम करें और जरूरत पड़ने पर डॉक्टर से संपर्क करें. समय पर सावधानी बरतने से बड़ी परेशानी से बचा जा सकता है.

गर्मी के इस मौसम में किसानों की मेहनत ही देश की खाद्य व्यवस्था को मजबूत बनाती है. इसलिए जरूरी है कि किसान अपनी सेहत को प्राथमिकता दें. सही खानपान, पर्याप्त पानी, हल्के कपड़े और धूप से बचाव जैसे छोटे कदम उन्हें भीषण लू के खतरे से सुरक्षित रख सकते हैं.

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Published: 12 Jun, 2026 | 08:36 PM

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