खेती में लगेगा AI का तड़का: बजट 2026 में लॉन्च हुआ ‘भारत-विस्तार’, जानिए किसानों को क्या होंगे फायदे

भारत-विस्तार सिर्फ एक ऐप या तकनीकी सुविधा नहीं है, बल्कि यह भारतीय खेती को भविष्य के लिए तैयार करने की दिशा में एक मजबूत कदम है. इससे खेती ज्यादा आधुनिक, टिकाऊ और लाभकारी बन सकती है. सरकार का उद्देश्य है कि तकनीक के जरिए किसानों की आमदनी बढ़े, जोखिम कम हो और खेती को नई पहचान मिले.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 2 Feb, 2026 | 07:47 AM

भारत की खेती अब धीरे-धीरे तकनीक के नए दौर में कदम रख रही है. बदलते मौसम, बढ़ती लागत और बाजार की अनिश्चितता के बीच किसानों के लिए सही समय पर सही जानकारी मिलना बहुत जरूरी हो गया है. इसी जरूरत को समझते हुए सरकार ने बजट 2026 में खेती के लिए एक बड़ा डिजिटल कदम उठाया है. सरकार जल्द ही ‘भारत-विस्तार’ नाम का एक बहुभाषी आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस (AI) टूल लॉन्च करने जा रही है, जो किसानों को उनकी भाषा में खेती से जुड़ी जरूरी और उपयोगी सलाह देगा.

क्या है भारत-विस्तार और इसका मकसद

भारत-विस्तार का पूरा नाम Virtually Integrated System to Access Agricultural Resources है. यह एक ऐसा आधुनिक डिजिटल प्लेटफॉर्म होगा, जो देश के अलग-अलग कृषि पोर्टल और भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद की खेती से जुड़ी वैज्ञानिक जानकारियों को एक जगह जोड़ेगा. इसके बाद आर्टिफिशियल इंटेलिजेंस की मदद से किसानों को उनकी फसल, मिट्टी, मौसम और स्थानीय परिस्थितियों के अनुसार सलाह दी जाएगी.

सरल शब्दों में कहा जाए तो भारत-विस्तार किसानों के लिए एक डिजिटल सहायक की तरह काम करेगा, जो उन्हें बताएगा कि किस समय कौन-सा फैसला फायदेमंद रहेगा और किन बातों से नुकसान हो सकता है.

किसानों को कैसे मिलेगी सीधी मदद

भारत-विस्तार को खासतौर पर बहुभाषी बनाया जा रहा है, ताकि देश के अलग-अलग राज्यों के किसान अपनी स्थानीय भाषा में जानकारी ले सकें. इससे तकनीक का फायदा सिर्फ बड़े किसानों तक सीमित नहीं रहेगा, बल्कि छोटे और सीमांत किसान भी इसका उपयोग कर पाएंगे.

इस टूल के जरिए किसानों को बीज बोने का सही समय, खाद और उर्वरक की सही मात्रा, सिंचाई की जरूरत, फसल में लगने वाले रोग और कीटों से बचाव, मौसम की चेतावनी और सरकारी योजनाओं की जानकारी एक ही जगह मिल सकेगी. इससे किसानों को बार-बार अलग-अलग जगह भटकने की जरूरत नहीं पड़ेगी.

खेती के फैसलों में आएगी सटीकता

अक्सर देखा जाता है कि गलत समय पर बुवाई या जरूरत से ज्यादा खाद-पानी देने से किसानों को नुकसान उठाना पड़ता है. भारत-विस्तार ऐसे फैसलों में किसानों की मदद करेगा. यह टूल खेत से जुड़े आंकड़ों के आधार पर बताएगा कि किस फसल के लिए क्या करना सही रहेगा. इससे खेती ज्यादा वैज्ञानिक और लाभकारी बन सकेगी.

सरकार का मानना है कि इस डिजिटल सलाह से खेती की उत्पादकता बढ़ेगी, लागत कम होगी और जोखिम घटेगा. खासकर मौसम की अनिश्चितता के दौर में यह किसानों के लिए काफी उपयोगी साबित हो सकता है.

प्रिसिजन फार्मिंग को मिलेगा बढ़ावा

भारत-विस्तार के जरिए प्रिसिजन फार्मिंग यानी सटीक खेती को बढ़ावा मिलेगा. इसका मतलब है कि खेत में जितनी जरूरत हो, उतना ही पानी, खाद और कृषि रसायन इस्तेमाल किए जाएं. इससे न केवल फसल की पैदावार बेहतर होगी, बल्कि जमीन और पर्यावरण को भी नुकसान कम पहुंचेगा.

इस टूल से किसानों को यह भी समझने में मदद मिलेगी कि किस फसल से ज्यादा फायदा हो सकता है और किस फसल में जोखिम ज्यादा है. इससे किसान बेहतर योजना बनाकर खेती कर सकेंगे.

मौसम और जलवायु जोखिम से राहत

मौसम में हो रहे तेजी से बदलाव किसानों के लिए बड़ी चिंता बन गए हैं. कभी अचानक बारिश, कभी सूखा और कभी ओलावृष्टि फसलों को नुकसान पहुंचा देती है. भारत-विस्तार मौसम से जुड़ी जानकारी और चेतावनियां समय पर देकर किसानों को सतर्क करेगा. इससे किसान पहले से तैयारी कर सकेंगे और नुकसान को काफी हद तक कम किया जा सकेगा.

छोटे किसानों के लिए खास फायदा

देश में ज्यादातर किसान छोटे और सीमांत हैं, जिनके पास संसाधन सीमित होते हैं. भारत-विस्तार जैसे डिजिटल टूल से उन्हें बिना ज्यादा खर्च किए सही सलाह मिल सकेगी. यह टूल खेती से जुड़े आंकड़ों को एक जगह लाकर किसानों को आसान भाषा में समझाएगा, जिससे उन्हें फैसले लेने में आत्मविश्वास मिलेगा.

खेती का डिजिटल भविष्य

भारत-विस्तार सिर्फ एक ऐप या तकनीकी सुविधा नहीं है, बल्कि यह भारतीय खेती को भविष्य के लिए तैयार करने की दिशा में एक मजबूत कदम है. इससे खेती ज्यादा आधुनिक, टिकाऊ और लाभकारी बन सकती है. सरकार का उद्देश्य है कि तकनीक के जरिए किसानों की आमदनी बढ़े, जोखिम कम हो और खेती को नई पहचान मिले.

अगर यह टूल सही तरीके से गांवों और खेतों तक पहुंचता है, तो आने वाले समय में भारत-विस्तार खेती की तस्वीर बदल सकता है. यह किसानों को ज्ञान, तकनीक और आत्मनिर्भरता से जोड़ने वाला एक अहम माध्यम बन सकता है.

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