Odisha News: ओडिशा सरकार ने कहा है कि राज्य में सहकारी दिशानिर्देश (को-ऑपरेटिव गाइडलाइंस) अंतिम रूप में लागू न होने के कारण मछुआरों को केंद्र सरकार की प्रमुख मत्स्य योजनाओं का पूरा लाभ नहीं मिल पा रहा है. यह मुद्दा हाल ही में नई दिल्ली में हुई राष्ट्रीय मत्स्य सचिव सम्मेलन में उठाया गया. राज्य के वरिष्ठ अधिकारियों ने कहा कि कई केंद्रीय योजनाओं में सहकारी समितियों के जरिए आर्थिक सहायता दी जाती है, लेकिन राज्य स्तर पर स्पष्ट और लागू दिशानिर्देश न होने से योजनाओं के क्रियान्वयन में देरी हो रही है.
अधिकारियों के अनुसार, इस वजह से मछुआरा समूहों और प्राथमिक सहकारी समितियों को योजनाओं का लाभ लेने में प्रक्रियागत अड़चनों का सामना करना पड़ रहा है. सम्मेलन में सहकारी दिशानिर्देशों को जल्द लागू करने, क्लस्टर आधारित विकास, जलाशय मत्स्य पालन और डिजिटल सिस्टम को मजबूत करने पर भी जोर दिया गया. मत्स्य एवं पशुपालन संसाधन विकास विभाग अब प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना (PMMSY) जैसी केंद्रीय योजनाओं के अनुरूप राज्य के नए सहकारी दिशानिर्देश लागू करने पर काम कर रहा है, ताकि मत्स्य क्षेत्र का टिकाऊ विकास हो और मछुआरों की आय बढ़ सके.
दिशानिर्देशों का क्या है मकसद
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, मत्स्य सहकारी दिशानिर्देशों का मकसद सहकारी समितियों की संरचना और कामकाज को साफ तौर पर तय करना है. इससे शासन व्यवस्था मजबूत होगी और पारदर्शिता बनी रहेगी. ये समितियां सरकारी योजनाओं को लागू करने में अहम भूमिका निभा सकेंगी. मत्स्य क्षेत्र में इन दिशानिर्देशों से सब्सिडी, ऋण, बीमा और बुनियादी ढांचे की मदद मछुआरों, मछली पालकों और स्वयं सहायता समूहों तक आसानी से पहुंच सकेगी.
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हालांकि, इन दिशानिर्देशों की अंतिम अधिसूचना में देरी के कारण केंद्रीय योजनाओं के साथ तालमेल कमजोर पड़ा है. सम्मेलन में राज्य ने क्लस्टर आधारित विकास, जलाशय मत्स्य पालन और डिजिटल एकीकरण के लिए उठाए गए कदमों की जानकारी दी, जिससे उत्पादन और आय बढ़ाई जा सके.
अनुमोदन प्रक्रिया लागू करने की जरूरत
मत्स्य मंत्रालय ने ओडिशा की चिंताओं को गंभीरता से लेते हुए कहा कि नीति घोषणाओं के बावजूद जलाशय मत्स्य पालन और आंतरिक क्लस्टर अभी भी पूरी तरह विकसित नहीं हो पाए हैं. मंत्रालय ने यह भी जोर दिया कि भारतीय प्रमुख कार्प मछलियों से आगे बढ़कर उच्च मूल्य और बाजार से जुड़ी प्रजातियों को बढ़ावा देना जरूरी है, ताकि आय बढ़े और निर्यात की संभावनाएं मजबूत हों. इसके साथ ही मंत्रालय ने राज्यों से समुद्री मत्स्य पालन (मैरीकल्चर) नीतियों को अधिसूचित करने, समुद्री जल लीज के स्पष्ट नियम, जैव-सुरक्षा प्रोटोकॉल और सरल अनुमोदन प्रक्रिया लागू करने की जरूरत पर भी बल दिया.