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मछली पालकों को सस्ती मिलेगी बिजली, एक्वाकल्चर तकनीक से जुड़े 5.21 लाख किसानों को लाभ
Aquaculture farmers Power Subsidy Scheme: मछली पालकों को एक्वाकल्चर तकनीक अपनाने पर सस्ती दर पर बिजली दी जा रही है. एक्वाकल्चर तकनीक में एरेटर मशीन और तापमान संतुलन के लिए कई मशीनों का इस्तेमाल किया जाता है. यह मशीनें बिजली से चलती हैं. ऐसे में मछली किसानों को एक्वाकल्चर तकनीक अपनाने के लिए प्रेरित करने के इरादे से बिजली सब्सिडी का लाभ दिया जा रहा है.
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3 करोड़ की लागत से बनेगा हिमाचल का पहला ट्राउट फिश सेंटर, अब गांवों में ही मिलेगा रोजगार
ट्राउट मछली की बाजार में अच्छी कीमत मिलती है. होटल, रेस्टोरेंट और बड़े शहरों में इसकी मांग लगातार बढ़ रही है. ऐसे में किसान कम जगह और कम समय में अच्छा मुनाफा कमा सकते हैं. सरकार लोगों को इस व्यवसाय को अपनाने के लिए प्रेरित कर रही है. स्थानीय युवाओं को प्रशिक्षण देकर उन्हें ट्राउट पालन से जोड़ने की योजना भी बनाई जा रही है.
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मछली पालन से ज्यादा मुनाफा देगा केकड़ा पालन, कम खर्च में शुरू करें यह शानदार व्यवसाय
केकड़े मुख्य रूप से दो प्रकार के होते हैं समुद्री और मीठे पानी के. यहां हम मीठे पानी के केकड़ा पालन की बात कर रहे हैं, क्योंकि यह गांवों और खेतों में आसानी से किया जा सकता है. मीठे पानी के केकड़ों की बाजार में कीमत अक्सर समुद्री केकड़ों से तीन से चार गुना तक ज्यादा होती है.
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मछली पालकों के लिए एडवाइजरी, शुरू करें बीज कलेक्शन.. जानें तालाब में चूना डालने की सही टाइमिंग
जैविक और रासायनिक उर्वरक एक्सपर्ट की सलाह के बिना तालाब में न डालें. पानी का रंग ज्यादा हरा होने पर उर्वरक और चूना बंद कर दें. तालाब की गुणवत्ता बनाए रखने के लिए पोटेशियम परमैंगनेट 400 ग्राम या नमक 40-50 किलो प्रति एकड़ डालें.
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मौसम बदलते ही पशुपालक अपनाएं ये जरूरी उपाय, पशु रहेंगे स्वस्थ और उत्पादन बढ़ेगा
फरवरी के बदलते मौसम में पशुओं की देखभाल करना बहुत जरूरी होता है. संतुलित आहार, साफ पानी और सही प्रबंधन से पशु स्वस्थ रहते हैं और दूध, अंडा तथा प्रजनन उत्पादन बेहतर होता है. छोटी सावधानियां अपनाकर पशुपालक नुकसान से बच सकते हैं और पशुपालन को लाभदायक बना सकते हैं.
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अब मछली पालन में नुकसान की चिंता खत्म, बीमा योजना से मत्स्य पालकों को मिलेगा सुरक्षा कवच
मछली पालन करने वाले किसानों के लिए अब बीमा सुविधा शुरू की गई है. मोबाइल एप के जरिए तालाब और मछली उत्पादन को बीमा सुरक्षा मिल सकेगी. प्राकृतिक आपदा या बीमारी से नुकसान होने पर आर्थिक सहायता दी जाएगी. इससे मत्स्य पालन का कारोबार सुरक्षित और भरोसेमंद बनेगा.








