Poultry Farming: आज के समय में खेती के साथ अगर पशुपालन या पोल्ट्री को जोड़ा जाए तो किसानों की आमदनी कई गुना बढ़ सकती है. खासकर देसी नस्ल की मुर्गियों का पालन कम लागत में अच्छा मुनाफा दे रहा है. कई किसान अब खुले में मुर्गी पालन का तरीका अपनाकर अंडा, चूजा और तैयार मुर्गा बेचकर तिहरी कमाई कर रहे हैं. कृषि विशेषज्ञों का कहना है कि अगर सही नस्ल और सही तरीका अपनाया जाए तो पोल्ट्री किसानों के लिए यह एक बढ़िया कमाई का जरिया बन सकता है.
खेती के साथ पोल्ट्री बना अतिरिक्त कमाई का जरिया
कई किसान अब पारंपरिक खेती के साथ पोल्ट्री को जोड़कर अपनी आय बढ़ा रहे हैं. खेत के एक हिस्से को जाली से घेरकर मुर्गियों के लिए छोटा सा शेड बना दिया जाता है. इस तरीके से मुर्गियां सुरक्षित भी रहती हैं और उन्हें खुला वातावरण भी मिलता है. दिन के समय मुर्गियां खुले क्षेत्र में घूमती रहती हैं और जमीन पर मिलने वाला दाना, कीड़े-मकोड़े और घास खा लेती हैं. इससे चारे पर होने वाला खर्च काफी कम हो जाता है. रात में या खराब मौसम के दौरान मुर्गियों को शेड के अंदर रखा जाता है, जिससे उनकी सुरक्षा भी बनी रहती है.
कम खर्च में पालने के लिए बेहतर हैं देसी नस्ल
पोल्ट्री विशेषज्ञों के अनुसार देसी या उन्नत देसी नस्ल की मुर्गियां ग्रामीण क्षेत्रों के लिए ज्यादा बेहतर होती हैं. ये स्थानीय मौसम में आसानी से ढल जाती हैं और बीमारियां भी कम होती हैं. ऐसी मुर्गियां खुले में भी आसानी से पाली जा सकती हैं. इन्हें ज्यादा महंगे चारे की जरूरत नहीं पड़ती और साधारण देखभाल में भी अच्छी बढ़वार करती हैं. यही वजह है कि कई किसान अब देसी नस्ल की मुर्गियों की ओर तेजी से बढ़ रहे हैं.
अंडा, चूजा और मुर्गा बेचकर तीन तरह से कमाई
पोल्ट्री पालन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि इससे एक नहीं बल्कि कई तरीके से आय होती है. मुर्गियां नियमित रूप से अंडे देती हैं, जिन्हें बाजार में बेचा जा सकता है. इसके अलावा अंडों से चूजे तैयार करके भी अच्छी कमाई की जा सकती है. जब मुर्गे बड़े होकर तैयार हो जाते हैं, तो उन्हें भी बाजार में अच्छे दाम पर बेचा जाता है. इस तरह एक ही पोल्ट्री यूनिट से अंडा, चूजा और मुर्गा-तीनों से अलग-अलग आय मिलती है.
खुले में चरने से चारे का खर्च होता है कम
खुले में मुर्गी पालन का सबसे बड़ा फायदा यह है कि चारे का खर्च काफी कम हो जाता है. मुर्गियां दिनभर जमीन पर घूमते हुए खुद ही काफी दाना ढूंढ लेती हैं. इससे किसानों को ज्यादा मात्रा में दाना खरीदने की जरूरत नहीं पड़ती. थोड़ी मात्रा में संतुलित चारा देने से ही मुर्गियों की अच्छी सेहत बनी रहती है. यही कारण है कि कम लागत में भी किसानों को अच्छा मुनाफा मिल रहा है.
विशेषज्ञ की सलाह से बढ़ सकता है मुनाफा
पशु चिकित्सक कुंवर घनश्याम (KVK नोएडा) के अनुसार, अगर किसान सही नस्ल का चयन करें और पोल्ट्री में साफ-सफाई व संतुलित आहार का ध्यान रखें तो यह व्यवसाय काफी लाभदायक बन सकता है. मुर्गियों के लिए साफ पानी, सुरक्षित शेड और समय-समय पर टीकाकरण बहुत जरूरी है. अगर किसान इन बातों का ध्यान रखें तो कम लागत में भी पोल्ट्री से अच्छी आय हासिल की जा सकती है. यही वजह है कि आज कई किसान खेती के साथ मुर्गी पालन को जोड़कर अपनी आर्थिक स्थिति मजबूत कर रहे हैं.