Chaitra Navratri: पालकी पर होने वाला है मां दुर्गा का आगमन, जानें इसका महत्व और कलश स्थापना की सही विधि

Navratri 2026: नवरात्रि हिंदू धर्म का प्रमुख पर्व है, जिसमें मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा की जाती है. इस बार नवरात्रि गुरुवार से शुरू हो रही है, इसलिए धार्मिक मान्यता के अनुसार मां दुर्गा की सवारी हाथी पर सुसज्जित पालकी मानी जा रही है. नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना की जाती है, जिसे विशेष पूजा विधि के साथ किया जाता है और इससे घर में सुख-समृद्धि आने की मान्यता है.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 16 Mar, 2026 | 08:23 PM

Chaitra Navratri Significance: हिंदू धर्म में नवरात्रि का पर्व बेहद पवित्र और आस्था से जुड़ा माना जाता है. साल में दो बार आने वाली नवरात्रि में भक्त मां दुर्गा के नौ स्वरूपों की पूजा पूरी श्रद्धा के साथ करते हैं. इन नौ दिनों में भक्त व्रत रखते हैं, मंदिरों में पूजा-अर्चना करते हैं और घरों में कलश स्थापना कर मां दुर्गा का आह्वान करते हैं. नवरात्रि के दौरान पूरे देश में भक्तिमय माहौल देखने को मिलता है और लोग मां भगवती से सुख-समृद्धि और कष्टों से मुक्ति की कामना करते हैं.

नवरात्रि का धार्मिक महत्व

गाजियाबाद के ज्योतिषाचार्य राकेश चतुर्वेदी बताते हैं कि, नवरात्रि का अर्थ है ‘नौ रातें’. इन नौ दिनों में मां दुर्गा के अलग-अलग स्वरूपों की पूजा की जाती है. धार्मिक मान्यता के अनुसार इन दिनों मां शक्ति की आराधना करने से जीवन में सकारात्मक ऊर्जा आती है और भक्तों की मनोकामनाएं पूर्ण होती हैं.

मान्यता है कि नवरात्रि के दौरान की गई पूजा और साधना का विशेष फल मिलता है. इसलिए लोग पूरे विधि-विधान के साथ मां दुर्गा की पूजा करते हैं और घरों में कलश स्थापना कर देवी का स्वागत करते हैं.

नवरात्रि में मां दुर्गा की सवारी

ज्योतिषाचार्य राकेश चतुर्वेदी के अनुसार नवरात्रि जिस दिन से शुरू होती है, उसी दिन के आधार पर मां दुर्गा की सवारी तय की जाती है. हर दिन के हिसाब से मां की अलग-अलग सवारी का उल्लेख मिलता है, जिसे शुभ और अशुभ संकेतों से भी जोड़ा जाता है. इस बार नवरात्रि गुरुवार से शुरू हो रही है. मान्यता के अनुसार गुरुवार के दिन मां दुर्गा पालकी की सवारी करती हैं. हालांकि इस बार प्रतिपदा अमावस्या युक्त मानी जा रही है, इसलिए धार्मिक मान्यता के अनुसार मां दुर्गा की सवारी हाथी पर सुसज्जित पालकी मानी जाएगी.

मान्यताओं के अनुसार, माता रानी का डोली पर आगमन उतार-चढ़ाव का संकेत देता है. मौजूदा समय में देश-विदेश में युद्ध चल रहे हैं. ऐसे में माता रानी का डोली पर आगमन अस्थिरता और चुनौतियों का संकेत माना जा रहा हैं.

कलश स्थापना का महत्व

नवरात्रि के पहले दिन कलश स्थापना की जाती है, जिसे घटस्थापना भी कहा जाता है. यह नवरात्रि पूजा का सबसे महत्वपूर्ण हिस्सा माना जाता है. कलश स्थापना के माध्यम से घर में मां दुर्गा का आह्वान किया जाता है. धार्मिक मान्यता के अनुसार सही विधि से कलश स्थापना करने पर घर में सकारात्मक ऊर्जा का संचार होता है और देवी की कृपा प्राप्त होती है.

कलश स्थापना की विधि

कलश स्थापना के लिए सबसे पहले मिट्टी या पीतल का कलश लें. इसके लिए आम की पत्तियां, चांदी का सिक्का, जौ, फूल, माला, नारियल, दीपक, लाल कपड़ा, लौंग, इलायची और हल्दी जैसी सामग्री की आवश्यकता होती है.

  • सबसे पहले एक पात्र में गंगाजल मिलाकर जल रखें और मां गंगा का आह्वान करें.
  • इसके बाद 3 बार आचमन करें और हाथ धोकर पूजा की प्रक्रिया शुरू करें.
  • अब मिट्टी में जौ डालकर उस पर कलश स्थापित करें.
  • कलश में जल भरते समय उसमें नौ लौंग, हल्दी और चांदी का सिक्का डालें.
  • इसके ऊपर आम की पत्तियां लगाकर लाल कपड़े में लिपटा नारियल रखें.
  • इसके बाद दीपक जलाकर पूजा आरंभ करें.

ऐसे करें मां दुर्गा का ध्यान

कलश स्थापना के बाद सबसे पहले भगवान गणेश का ध्यान किया जाता है और फिर मां भगवती का स्मरण किया जाता है. भक्त मां दुर्गा के मंत्रों का जाप करते हैं और प्रसाद अर्पित करते हैं. अगर संभव हो तो नवरात्रि के दौरान दुर्गा सप्तशती का पाठ करना शुभ माना जाता है. मान्यता है कि मां दुर्गा की सच्चे मन से आराधना करने से सभी कष्ट दूर होते हैं और जीवन में सुख-समृद्धि आती है.

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