महाराष्ट्र सरकार ने राज्य में प्याज और टमाटर की फसलों के लिए एक नई नीति तैयार करने के मकसद से एक कमेटी गठित की है. यह कमेटी प्याज और टमाटर की खेती से जुड़े कई मुद्दों पर चर्चा करेगी, जिनका आर्थिक और राजनीतिक दोनों ही स्तरों पर बड़ा असर होगा. चर्चा के बाद कमेटी अपनी सिफारिशें राज्य सरकार को सौंपेगी. खास बात यह है कि इसकी अध्यक्षता भाजपा नेता पाशा पटेल करेंगे. पाशा पटेल कृषि मूल्य आयोग के अध्यक्ष भी हैं.
हिन्दुस्तान टाइम्स की रिपोर्ट के मुताबिक, पाशा पटेल को इस कमेटी की जिम्मेदारी 18 जुलाई को दी गई थी. 26 अगस्त को राज्य सरकार ने कमेटी में विशेषज्ञों को भी शामिल किया. इस पैनल में परशराम पाटिल, दिक्पाल गिरासे, चंद्रकांत चव्हाण और राहुल राठी जैसे सदस्य शामिल हैं. वहीं, एक्सपर्ट का कहना है कि सरकार के इस फैसले से महाराष्ट्र के प्याज किसानों को फायदा होगा. क्योंकि प्याज महाराष्ट्र का मुख्य फसल है. इसकी खेती पश्चिमी जिलों खासकर नासिक में बड़े स्तर पर की जाती है. यहां की मंडियों से दूसरे देशों में प्याज की सप्लाई होती है.
राजनीतिक को प्रभावित करती है प्याज की खेती
ऐसे भी प्याज की कीमत महाराष्ट्र की राजनीति को प्रभावित करती है. इसकी कीमतों में उतार-चढ़ाव अक्सर राष्ट्रीय स्तर पर चिंता का विषय बन जाता है. खासकर जब दाम तेजी से बढ़ते हैं, तो इसका सीधा असर आम जनता और मीडिया की प्रतिक्रिया में देखा जाता है. वहीं, टमाटर को नकदी फसल (कैश क्रॉप) माना जाता है और पुणे जिला इसके प्रमुख उत्पादकों में से एक है. प्याज और टमाटर की खेती करने वाले किसान लंबे समय से यह मांग कर रहे हैं कि राज्य सरकार इन फसलों के लिए न्यूनतम समर्थन मूल्य (MSP) घोषित करे, ताकि उन्हें बाजार की अनिश्चितता से बचाया जा सके.
मंडी में 600 रुपये क्विंटल हुआ प्याज का रेट
वहीं, प्याज उत्पादक संघ के अध्यक्ष भरत दिघोले का कहना है कि अब समय आ गया है कि किसान पूरे महाराष्ट्र में एकजुट होकर अपनी आवाज बुलंद करें. उन्होंने कहा है कि गुरुवार को नासिक जिले की उमराणा एपीएमसी मंडी में प्याज की नीलामी में भाव सिर्फ 970 प्रति क्विंटल तक गिर गए. जबकि, लासलगांव एपीएमसी में प्याज की कीमतें 600 से 1,906 रुपये प्रति क्विंटल के बीच रहीं, जबकि औसत दाम 1,350 रुपये प्रति क्विंटल रहा. जबकि, दिघोले का मानना है कि प्याज की उत्पादन लागत 2,200 प्रति क्विंटल से ज्यादा है. ऐसे भावों पर बेचकर किसान क्या कमाएंगे? उल्टा उन्हें घाटा ही उठाना पड़ रहा है. ऐसे में सरकार को प्याज के लिए एमएसपी तय करना चाहिए.