क्या है DDGS जिसको लेकर तेज हो गई है चर्चा, कृषि एक्सपर्ट भी इसके आयात को लेकर जा रहे हैं चिंता

देश में फिलहाल सिर्फ बीटी कपास (GM तकनीक) को ही व्यावसायिक उत्पादन की अनुमति है. जीएम सरसों और जीएम बैंगन  पर पहले जैव सुरक्षा नियमों के तहत फील्ड ट्रायल किए गए और इस पर काफी पैसा भी खर्च हुआ, लेकिन इन्हें अब तक व्यावसायिक खेती की मंजूरी नहीं मिली.

Kisan India
नोएडा | Published: 15 Feb, 2026 | 01:20 PM

Agriculture News: भारत-अमेरिका व्यापार समझौते के तहत पशु चारे में इस्तेमाल होने वाले डिस्टिलर ड्राइड ग्रेन्स विद सोल्यूबल्स (DDGS) पर शुल्क घटाने या खत्म करने को लेकर कृषि विशेषज्ञों और किसानों के बीच तीखी बहस छिड़ गई है. कई लोग मानते हैं कि DDGS के आयात की अनुमति देना आनुवंशिक रूप से संशोधित (GM) उत्पादों के लिए पिछले दरवाजे से प्रवेश जैसा हो सकता है, जबकि देश में कपास को छोड़कर अन्य GM फसलों को व्यावसायिक मंजूरी नहीं है.

द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति सतबीर सिंह गोसल ने भी कम शुल्क पर DDGS आयात को चिंता का विषय बताया है. DDGS एथेनॉल उत्पादन के बाद बचा उच्च प्रोटीन और पोषक तत्वों से भरपूर उप-उत्पाद है, जिसे पोल्ट्री और पशुओं  के लिए सस्ते व गुणवत्तापूर्ण चारे के रूप में इस्तेमाल किया जाता है. अंतरिम समझौते की प्रमुख शर्तों के अनुसार, भारत अमेरिका से आने वाले कई कृषि और खाद्य उत्पादों पर शुल्क घटाएगा या खत्म करेगा. इनमें DDGS, पशु चारे के लिए लाल ज्वार, ट्री नट्स, ताजे और प्रोसेस्ड फल, सोयाबीन तेल, वाइन और स्पिरिट्स सहित अन्य उत्पाद शामिल हैं.

कम शुल्क पर DDGS का आयात चिंता का विषय हो सकता है

देश में फिलहाल सिर्फ बीटी कपास (GM तकनीक) को ही व्यावसायिक उत्पादन की अनुमति है. जीएम सरसों और जीएम बैंगन  पर पहले जैव सुरक्षा नियमों के तहत फील्ड ट्रायल किए गए और इस पर काफी पैसा भी खर्च हुआ, लेकिन इन्हें अब तक व्यावसायिक खेती की मंजूरी नहीं मिली. पंजाब कृषि विश्वविद्यालय के कुलपति सतबीर सिंह गोसल ने कहा कि ऐसे में कम शुल्क पर DDGS का आयात चिंता का विषय हो सकता है. उनका कहना है कि अमेरिका कई फसलों में GM तकनीक अपनाता है, इसलिए DDGS के आयात से संभावित रूप से GM उत्पाद देश में आ सकते हैं. गोसल ने कहा कि यह समझ से परे है कि हम अपने देश में GM तकनीक की अनुमति नहीं दे रहे, लेकिन अमेरिका, कनाडा या ऑस्ट्रेलिया जैसे देशों से GM उत्पाद आयात करने को तैयार हैं.

2002 में सिर्फ बीटी कपास को मंजूरी दी थी

जीएम तकनीक वाली फसलों में भारत ने 2002 में सिर्फ बीटी कपास  को मंजूरी दी थी, क्योंकि उस समय अमेरिकन बॉलवर्म से कपास की फसल प्रभावित हो रही थी. इसके बाद किसी अन्य जीएम फसल को व्यावसायिक अनुमति नहीं दी गई. हालांकि, भारत अमेरिका से जीएम तकनीक से उगाई जाने वाली कैनोला का आयात करता है और मक्का भी आयात करता है, जिसका उपयोग कॉर्न फ्लेक्स जैसे प्रोसेस्ड फूड में होता है. बीटी कपास से बनने वाला कपास बीज तेल भी जीएम पौधों से ही आता है. ऐसे में विशेषज्ञों का मानना है कि यदि DDGS का आयात होता है, तो वह भी जीएम तकनीक से जुड़ा हो सकता है.

 

Get Latest   Farming Tips ,  Crop Updates ,  Government Schemes ,  Agri News ,  Market Rates ,  Weather Alerts ,  Equipment Reviews and  Organic Farming News  only on KisanIndia.in

ज्ञान का सम्मान क्विज

आम में सबसे ज्यादा कौन सा विटामिन होता है?

सवाल का दीजिए सही जवाब और जीतिए ₹1000 का इनाम! 🏆
पिछले Quiz का सही जवाब
कपास
विजेताओं के नाम
कमल सिंह पडिहार, आगर मालवा, मध्य प्रदेश
गुरबाज सिंह, रोपड़, पंजाब

लेटेस्ट न्यूज़