नई गन्ना किस्म ‘बिस्मिल’ को हरी झंडी, अब इन 4 राज्यों में भी हो सकेगी खेती

गन्ने की खेती में सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक लाल सड़ांध रोग है. यह बीमारी कई बार पूरी फसल को बर्बाद कर देती है और किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है. वैज्ञानिकों के अनुसार ‘बिस्मिल’ किस्म इस खतरनाक रोग के प्रति काफी हद तक प्रतिरोधी है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 9 Jan, 2026 | 10:27 AM

Bismil sugarcane variety: देश के गन्ना किसानों के लिए एक अच्छी खबर सामने आई है. उत्तर प्रदेश में विकसित की गई नई और उन्नत गन्ना किस्म ‘बिस्मिल’ को अब चार और राज्यों में उगाने की मंजूरी मिल गई है. पहले यह किस्म सिर्फ यूपी तक सीमित थी, लेकिन अब हरियाणा, पंजाब, उत्तराखंड और राजस्थान के किसान भी इसका लाभ उठा सकेंगे. विशेषज्ञों का मानना है कि यह किस्म न केवल उत्पादन बढ़ाएगी, बल्कि किसानों की आमदनी और चीनी उद्योग की मजबूती में भी अहम भूमिका निभाएगी.

उत्तर प्रदेश में हुआ विकास, अब देशभर में पहचान

गन्ना किस्म ‘बिस्मिल’ को उत्तर प्रदेश गन्ना अनुसंधान परिषद, शाहजहांपुर ने विकसित किया है. इस किस्म का नाम देश के महान स्वतंत्रता सेनानी राम प्रसाद बिस्मिल के सम्मान में रखा गया है. अधिकारियों का कहना है कि इस नाम के पीछे उद्देश्य यह है कि किसानों को एक ऐसी किस्म मिले, जो साहस और मजबूती की पहचान बने, ठीक वैसे ही जैसे बिस्मिल जी का जीवन था.

इस किस्म को भारतीय कृषि अनुसंधान परिषद (ICAR) की अखिल भारतीय समन्वित अनुसंधान परियोजना के तहत तैयार किया गया है. वैज्ञानिक नाम से इसे CoSha 17231 कहा जाता है, जो कोयंबटूर और शाहजहांपुर के संयुक्त अनुसंधान को दर्शाता है.

लाल सड़ांध से सुरक्षा, किसानों को बड़ी राहत

गन्ने की खेती में सबसे बड़ी चुनौतियों में से एक लाल सड़ांध रोग है. यह बीमारी कई बार पूरी फसल को बर्बाद कर देती है और किसानों को भारी नुकसान उठाना पड़ता है. वैज्ञानिकों के अनुसार ‘बिस्मिल’ किस्म इस खतरनाक रोग के प्रति काफी हद तक प्रतिरोधी है. इसका मतलब है कि किसानों को बीमारी की चिंता कम होगी और फसल ज्यादा सुरक्षित रहेगी.

कम रोग जोखिम का सीधा फायदा यह होगा कि खेती की लागत घटेगी. दवाओं और बार-बार उपचार पर होने वाला खर्च कम होगा, जिससे किसानों की जेब पर बोझ भी हल्का पड़ेगा.

बेहतर पैदावार और ज्यादा चीनी रिकवरी

इस नई किस्म की सबसे बड़ी खासियत इसकी पैदावार है. वैज्ञानिकों के मुताबिक ‘बिस्मिल’ से औसतन 86 टन प्रति हेक्टेयर तक गन्ने की उपज मिल सकती है. इसके साथ ही इसमें चीनी रिकवरी भी बेहतर है, जो करीब 13.97 प्रतिशत बताई जा रही है. चीनी मिलों के लिए यह आंकड़ा काफी अहम माना जाता है, क्योंकि ज्यादा रिकवरी का मतलब है गन्ने से ज्यादा चीनी का उत्पादन.

वरिष्ठ वैज्ञानिक अजय तिवारी का कहना है कि यह किस्म किसानों और मिलों, दोनों के लिए फायदे का सौदा साबित हो सकती है. किसानों को ज्यादा दाम मिलने की संभावना बढ़ेगी और मिलों की उत्पादन क्षमता भी मजबूत होगी.

यूपी में अच्छे नतीजे, बाकी राज्यों से भी उम्मीद

उत्तर प्रदेश में इस किस्म के बीज पहले ही सभी 42 गन्ना उत्पादक जिलों में वितरित किए जा चुके हैं. कृषि विस्तार अधिकारियों के मुताबिक, खेतों में इसके शुरुआती नतीजे काफी उत्साहजनक रहे हैं. फसल की बढ़वार अच्छी है और किसानों से सकारात्मक प्रतिक्रिया मिल रही है.

अब जब इसे चार और राज्यों में मंजूरी मिल गई है, तो उम्मीद की जा रही है कि अलग-अलग जलवायु और मिट्टी में भी यह किस्म अच्छा प्रदर्शन करेगी. इससे देश के गन्ना उत्पादन में स्थिरता और बढ़ोतरी दोनों संभव हैं.

वैज्ञानिक मंजूरी से बढ़ा भरोसा

हाल ही में ICAR ने देशभर में 25 फसलों की 184 नई किस्मों को मंजूरी दी है, जिनमें ‘बिस्मिल’ भी शामिल है. इससे इस किस्म की वैज्ञानिक गुणवत्ता और विश्वसनीयता और मजबूत होती है. कृषि विशेषज्ञ मानते हैं कि आने वाले वर्षों में यह किस्म गन्ना खेती की तस्वीर बदलने में मददगार साबित हो सकती है.

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