Wheat Farming: दाना भराव का है निर्णायक समय! तीसरे पटवन में नहीं देखा मौसम तो मेहनत पर फिर सकता है पानी

Gehun Ki Kheti: रबी सीजन की गेहूं फसल अब उस अहम मोड़ पर पहुंच चुकी है, जहां की गई छोटी सी चूक भी पैदावार पर बड़ा असर डाल सकती है. बाली निकल रही है, दाना बनना शुरू होने वाला है और इसी समय सही सिंचाई व पोषण प्रबंधन सबसे ज्यादा जरूरी हो जाता है. अगर किसान इस संवेदनशील चरण में मौसम और नमी का संतुलन संभाल लें, तो बेहतर उत्पादन और मजबूत दाना सुनिश्चित किया जा सकता है.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 21 Feb, 2026 | 07:30 PM
1 / 6रबी सीजन की गेहूं फसल इस समय बाली और फूल निकलने के चरण में है, जो दाना बनने की नींव तय करता है. इसी समय दाने का आकार, वजन और गुणवत्ता प्रभावित होती है. अगर इस चरण में सही देखभाल न की जाए तो पूरी मेहनत पर असर पड़ सकता है.

रबी सीजन की गेहूं फसल इस समय बाली और फूल निकलने के चरण में है, जो दाना बनने की नींव तय करता है. इसी समय दाने का आकार, वजन और गुणवत्ता प्रभावित होती है. अगर इस चरण में सही देखभाल न की जाए तो पूरी मेहनत पर असर पड़ सकता है.

2 / 6पहला और दूसरा पटवन पूरा होने के बाद अब तीसरे पटवन का समय है. यह सिंचाई फसल के दाना भराव के लिए बेहद जरूरी मानी जाती है. लेकिन इसे जल्दबाजी में नहीं करना चाहिए. खेत की नमी और मौसम की स्थिति देखकर ही निर्णय लें.

पहला और दूसरा पटवन पूरा होने के बाद अब तीसरे पटवन का समय है. यह सिंचाई फसल के दाना भराव के लिए बेहद जरूरी मानी जाती है. लेकिन इसे जल्दबाजी में नहीं करना चाहिए. खेत की नमी और मौसम की स्थिति देखकर ही निर्णय लें.

3 / 6यदि पटवन के समय तेज हवा चल रही हो तो सिंचाई टाल देना बेहतर है. हवा के कारण पौधे ज्यादा हिलते हैं, जिससे बाली पर दबाव पड़ता है और दाने का सही विकास नहीं हो पाता. कई बार दाना कमजोर या अधूरा रह जाता है, जिसका असर उत्पादन पर साफ दिखता है.

यदि पटवन के समय तेज हवा चल रही हो तो सिंचाई टाल देना बेहतर है. हवा के कारण पौधे ज्यादा हिलते हैं, जिससे बाली पर दबाव पड़ता है और दाने का सही विकास नहीं हो पाता. कई बार दाना कमजोर या अधूरा रह जाता है, जिसका असर उत्पादन पर साफ दिखता है.

4 / 6इस अवस्था में खेत में पर्याप्त नमी रहना जरूरी है, लेकिन जलभराव बिल्कुल नहीं होना चाहिए. पानी की कमी से दाना छोटा और हल्का रह सकता है, जबकि ज्यादा पानी से जड़ें कमजोर हो सकती हैं और रोग लगने की संभावना बढ़ जाती है. हल्की और संतुलित सिंचाई ही सबसे सुरक्षित तरीका है.

इस अवस्था में खेत में पर्याप्त नमी रहना जरूरी है, लेकिन जलभराव बिल्कुल नहीं होना चाहिए. पानी की कमी से दाना छोटा और हल्का रह सकता है, जबकि ज्यादा पानी से जड़ें कमजोर हो सकती हैं और रोग लगने की संभावना बढ़ जाती है. हल्की और संतुलित सिंचाई ही सबसे सुरक्षित तरीका है.

5 / 6शुरुआती अवस्था में दी गई यूरिया, डीएपी और माइक्रोन्यूट्रिएंट्स इस समय के लिए पर्याप्त होते हैं. कई किसान ज्यादा उत्पादन की उम्मीद में अतिरिक्त यूरिया डाल देते हैं, जिससे फसल की गुणवत्ता घट सकती है और मिट्टी की सेहत भी खराब होती है. संतुलित पोषण ही बेहतर उपज की गारंटी देता है.

शुरुआती अवस्था में दी गई यूरिया, डीएपी और माइक्रोन्यूट्रिएंट्स इस समय के लिए पर्याप्त होते हैं. कई किसान ज्यादा उत्पादन की उम्मीद में अतिरिक्त यूरिया डाल देते हैं, जिससे फसल की गुणवत्ता घट सकती है और मिट्टी की सेहत भी खराब होती है. संतुलित पोषण ही बेहतर उपज की गारंटी देता है.

6 / 6यदि मौसम अनुकूल रहा तो अप्रैल के पहले सप्ताह से कटाई शुरू हो सकती है. ऐसे में किसान अभी से मशीन, मजदूर और भंडारण की तैयारी कर लें. सही समय पर सिंचाई और पोषण प्रबंधन से इस बार बेहतर उत्पादन और अच्छी गुणवत्ता का गेहूं प्राप्त किया जा सकता है.

यदि मौसम अनुकूल रहा तो अप्रैल के पहले सप्ताह से कटाई शुरू हो सकती है. ऐसे में किसान अभी से मशीन, मजदूर और भंडारण की तैयारी कर लें. सही समय पर सिंचाई और पोषण प्रबंधन से इस बार बेहतर उत्पादन और अच्छी गुणवत्ता का गेहूं प्राप्त किया जा सकता है.

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Published: 21 Feb, 2026 | 07:30 PM

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