Bhindi Kheti: ये हैं भिंडी की टॉप 5 उन्नत किस्में, बुवाई के 45 दिन बाद शुरू हो जाएगी पैदावार

मार्च से गेहूं कटाई के बाद किसान सब्जी की बुवाई में लगेंगे. भिंडी की उन्नत पांच किस्में वर्षा उपहार, पूसा सावनी, अर्का अनामिका, परभनी क्रांति और अर्का अभय कम समय में ज्यादा पैदावार और अच्छी कीमत देती हैं. सही किस्म और देखभाल से किसान निवेश पर बेहतर लाभ कमा सकते हैं.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 21 Feb, 2026 | 06:26 PM

Vegetable Farming: अगले महीने यानी मार्च से गेहूं की कटाई शुरू हो जाएगी. इसके बाद किसान सब्जी की बुवाई में लग जाएंगे. लेकिन कुछ किसान अभी से ही सब्जी की बुवाई करने के लिए खेत तैयार कर रहे हैं. लेकिन वे फैसला नहीं कर पा रहे हैं कि कौन सी सब्जी की बुवाई की जाए, ताकि कम समय में ज्यादा पैदावार हो. पर अब ऐसे किसानों को चिंता करने की बात नहीं है. आज हम भिंडी की पांच ऐसी उन्नत किस्मों के बारे में चर्चा करने जा रहे हैं, जिसकी बुवाई करने पर कम लागत में बंपर उपज होगी.

ऐसे मार्केट में भिंडी कई किस्में उपलब्ध हैं, लेकिन कुछ खास किस्में किसानों के लिए अधिक लाभकारी साबित हो सकती हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि हाईब्रिड भिंडी  की किस्में जल्दी पकती हैं और बीमारियों के खिलाफ ज्यादा मजबूत होती हैं. इसके साथ ही लंबी, पतली और नरम फल वाली किस्में बाजार में अच्छी कीमत पर बिकती हैं. इसलिए किसान सही किस्म का चुनाव करके अपने निवेश और मेहनत का बेहतर लाभ उठा सकते हैं.

ये हैं भिंडी की उन्नत किस्में

वर्षा उपहार (हाइब्रिड किस्म): यह हाइब्रिड भिंडी की किस्म ज्यादा उत्पादन के लिए जानी जाती है. इसके फल लंबे और चमकदार होते हैं. सही देखभाल और संतुलित खाद के इस्तेमाल से किसान प्रति हेक्टेयर अच्छी पैदावार ले सकते हैं. बाजार में इसकी अच्छी कीमत भी मिलती है.

पूसा सावनी: भारतीय कृषि विज्ञान केंद्र ने भिंडी की इस किस्म को विकसित की है. यह जल्दी तैयार होने वाली किस्म  है और 45 दिनों में पहली तुड़ाई शुरू हो जाती है. इसके फल मुलायम और बाजार में मांग में रहते हैं. छोटे किसानों के लिए यह किस्म खासतौर पर लाभकारी मानी जाती है.

अर्का अनामिका: यह किस्म भारतीय कृषि अनुसंधान केंद्र द्वारा विकसित की गई है. इसकी खासियत यह है कि यह येलो वेन मोजेक वायरस के प्रति काफी हद तक मजबूत है. इसके फल लंबे और गहरे हरे रंग के होते हैं. यह बुवाई के 45 से 50 दिन में तुड़ाई के लिए तैयार हो जाती है. साथ ही प्रति हेक्टेयर अच्छी पैदावार देती है.

 परभनी क्रांति: परभनी क्रांति किस्म महाराष्ट्र में विकसित की गई है. इसकी सबसे बड़ी विशेषता इसकी रोग प्रतिरोधक क्षमता  है. इसके फल मध्यम आकार के और आकर्षक हरे रंग के होते हैं. यह किस्म गर्मी और बारिश दोनों मौसम में अच्छी पैदावार देती है.

अर्का अभय: यह भी IIHR द्वारा विकसित उन्नत किस्म है. इसके पौधे मजबूत होते हैं और फल अधिक संख्या में लगते हैं. येलो वेन मोजेक वायरस के प्रति इसकी सहनशीलता इसे किसानों के लिए सुरक्षित बनाती है. कम लागत में ज्यादा उत्पादन इसे खास बनाता है.

 

 

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Published: 21 Feb, 2026 | 06:23 PM

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