पपीते की खेती में बड़ा नुकसान! जानें पत्तियां मुड़ने और फल झड़ने का सही इलाज

कई बार पपीते के पौधों में पत्तियां सिकुड़ने लगती हैं, पीली पड़ जाती हैं या छोटे-छोटे फल गिरने लगते हैं. यह समस्या अगर समय पर न संभाली जाए तो पूरी फसल प्रभावित हो सकती है. अच्छी बात यह है कि थोड़ी सी सावधानी और सही देखभाल से इन समस्याओं से आसानी से बचा जा सकता है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 14 Feb, 2026 | 01:39 PM

Farming Tips: पपीता एक ऐसा फलदार पौधा है जो कम समय में बढ़ता है और जल्दी फल देना शुरू कर देता है. यही वजह है कि किसान और बागवानी प्रेमी इसे बड़े पैमाने पर लगाते हैं. लेकिन कई बार पपीते के पौधों में पत्तियां सिकुड़ने लगती हैं, पीली पड़ जाती हैं या छोटे-छोटे फल गिरने लगते हैं. यह समस्या अगर समय पर न संभाली जाए तो पूरी फसल प्रभावित हो सकती है. अच्छी बात यह है कि थोड़ी सी सावधानी और सही देखभाल से इन समस्याओं से आसानी से बचा जा सकता है.

सही मिट्टी से शुरू होती है अच्छी खेती

पपीते के पौधे की सेहत का आधार उसकी मिट्टी होती है. अगर मिट्टी भारी, सख्त या पानी रोकने वाली है तो जड़ों को पर्याप्त हवा नहीं मिल पाती और वे सड़ने लगती हैं. इसका सीधा असर पत्तियों और फलों पर दिखता है. इसलिए पपीते की खेती के लिए ऐसी मिट्टी चुनें जो भुरभुरी, अच्छी जल निकासी वाली और जैविक तत्वों से भरपूर हो. खेत तैयार करते समय गोबर की सड़ी हुई खाद या कम्पोस्ट मिलाना बहुत फायदेमंद रहता है. यदि संभव हो तो मिट्टी की जांच जरूर कराएं, ताकि उसमें पोषक तत्वों की कमी का सही पता चल सके.

पानी देने में न करें जल्दबाजी

पपीते के पौधे को न तो ज्यादा पानी पसंद है और न ही ज्यादा सूखा. कई किसान रोजाना सिंचाई कर देते हैं, जिससे जड़ों में पानी भर जाता है और पौधा कमजोर हो जाता है. दूसरी ओर, लंबे समय तक पानी न देने से पौधा तनाव में आ जाता है, जिससे पत्तियां सिकुड़ सकती हैं और फल गिर सकते हैं. बेहतर होगा कि मिट्टी की ऊपरी परत सूखने पर ही सिंचाई करें. पौधे के चारों ओर मल्चिंग करने से नमी बनी रहती है और जलभराव की समस्या भी कम होती है.

संतुलित पोषण है जरूरी

पपीते के पौधे को तेजी से बढ़ने और अच्छे फल देने के लिए संतुलित खाद की जरूरत होती है. केवल नाइट्रोजन देने से पत्तियां तो खूब बढ़ेंगी, लेकिन फल कम लगेंगे. इसलिए ऐसी खाद का उपयोग करें जिसमें नाइट्रोजन, फास्फोरस और पोटाश संतुलित मात्रा में हो. पोटाश फल के विकास में मदद करता है और फल गिरने की समस्या कम करता है. समय-समय पर सूक्ष्म पोषक तत्व जैसे जिंक और बोरॉन भी देना फायदेमंद रहता है.

समय पर कटाई-छंटाई भी जरूरी

अगर पौधे में सूखी या रोगग्रस्त पत्तियां लगी रहती हैं तो वे बाकी हिस्सों को भी प्रभावित कर सकती हैं. इसलिए समय-समय पर कमजोर और पीली पत्तियों को हटा देना चाहिए. इससे पौधे में हवा का प्रवाह बेहतर होता है और धूप भी अच्छी तरह मिलती है. कटाई-छंटाई से पौधे की ऊर्जा सही दिशा में लगती है और फल गिरने की समस्या कम होती है.

कीट और रोगों से बचाव

पपीते में पत्ती मरोड़ वायरस, एफिड्स और सफेद मक्खी जैसे कीटों का हमला आम है. ये कीट पत्तियों का रस चूस लेते हैं, जिससे वे सिकुड़ जाती हैं. इसके लिए खेत की नियमित निगरानी जरूरी है. जैविक उपाय के रूप में नीम के तेल का छिड़काव किया जा सकता है. यदि रोग ज्यादा बढ़ जाए तो कृषि विशेषज्ञ की सलाह लेकर दवा का उपयोग करें. खेत में सफाई बनाए रखना भी रोगों से बचाव में मदद करता है.

पर्याप्त धूप और सही तापमान

पपीता एक उष्णकटिबंधीय पौधा है और इसे रोजाना कम से कम छह घंटे सीधी धूप चाहिए. छायादार जगह पर पौधा कमजोर हो सकता है और फल सही आकार नहीं ले पाते. ठंडी हवा और पाला भी पत्तियों को नुकसान पहुंचा सकते हैं. इसलिए ठंड के मौसम में पौधों को बचाने के उपाय जरूर करें.

अगर किसान इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखें तो पपीते की पत्तियां स्वस्थ रहेंगी और फल गिरने की समस्या काफी हद तक कम हो जाएगी. सही देखभाल से न केवल उत्पादन बढ़ेगा, बल्कि फलों की गुणवत्ता भी बेहतर होगी, जिससे बाजार में अच्छा दाम मिल सकेगा.

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