Haryana News: कृषि प्रधान राज्य पंजाब और हरियाणा के किसान ग्रुप-डी सरकारी कर्मचारियों से ज्यादा नहीं कमा पाते हैं. इसका खुलासाा संसद में पेश किए गए आधिकारिक आंकड़ों से हुआ है. पेश आंकड़ों में कहा गया है कि कृषि के लिहाज से उन्नत माने जाने वाले हरियाणा और पंजाब के किसान भी आमतौर पर ग्रुप-डी सरकारी कर्मचारियों से ज्यादा नहीं कमा पा रहे हैं. आंकड़ों के मुताबिक, हरियाणा में एक कृषि परिवार की औसत मासिक आय 22,841 रुपये है, जबकि पंजाब में यह 26,701 रुपये है. वहीं, देशभर में कृषि परिवारों की औसत मासिक आय इससे काफी कम, करीब 10,218 रुपये ही है. यह स्थिति किसानों की आय और कर्ज से जुड़ी चुनौतियों को साफ तौर पर दर्शाती है.
यह जानकारी केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण राज्य मंत्री रामनाथ ठाकुर ने लोकसभा में एक लिखित उत्तर के जरिए दी है. यह सवाल सांसद इकरा चौधरी, प्रिया सरोज, पुष्पेंद्र सारन और धर्मेंद्र यादव ने पूछा था. पड़ोसी राज्यों की बात करें तो हिमाचल प्रदेश में कृषि परिवारों की औसत मासिक आय 12,153 रुपये, राजस्थान में 12,520 रुपये और जम्मू-कश्मीर में 18,918 रुपये आंकी गई. देशभर में मेघालय में किसानों की सबसे ज्यादा औसत मासिक आय 29,348 रुपये दर्ज की गई, जबकि झारखंड में यह सबसे कम 4,895 रुपये रही.
किसानों पर कर्ज का बोझ सबसे ज्यादा है
आंकड़ों से यह भी सामने आया है कि हरियाणा और पंजाब उन राज्यों में शामिल हैं, जहां किसानों पर कर्ज का बोझ सबसे ज्यादा है. हरियाणा में प्रति कृषि परिवार औसतन 1.83 लाख रुपये का कर्ज है और 47.5 प्रतिशत किसान कर्जदार हैं. वहीं पंजाब में औसतन 2.03 लाख रुपये का कर्ज है और 54.4 प्रतिशत कृषि परिवार कर्ज में डूबे हुए हैं. राष्ट्रीय स्तर पर देखें तो प्रति कृषि परिवार औसत बकाया कर्ज 74,121 रुपये है, जिसमें 50.2 प्रतिशत कृषि परिवार शामिल हैं. तुलना में आंध्र प्रदेश और केरल देश में सबसे ज्यादा औसत कर्ज वाले राज्य हैं, जहां क्रमशः 2.45 लाख रुपये (93 प्रतिशत परिवार) और 2.42 लाख रुपये (70 प्रतिशत परिवार) पर कर्ज दर्ज किया गया है.
कृषि परिवारों की औसत मासिक आय 10,218 रुपये
मंत्री ने बताया कि किसानों की आय से जुड़े ये अनुमान समय-समय पर राष्ट्रीय सांख्यिकी कार्यालय (एनएसओ) द्वारा किए जाने वाले सिचुएशनल असेसमेंट सर्वे (एसएएस) के आधार पर तैयार किए जाते हैं. यह सर्वे सांख्यिकी एवं कार्यक्रम कार्यान्वयन मंत्रालय के तहत किया जाता है. सर्वे के अनुसार, देश में कृषि परिवारों की औसत मासिक आय 10,218 रुपये है, जो अलग-अलग स्रोतों से आती है. इसमें फसल उत्पादन से शुद्ध आय 3,798 रुपये, पशुपालन से 1,582 रुपये, मजदूरी से 4,063 रुपये, गैर-कृषि व्यवसाय से 641 रुपये और जमीन पट्टे पर देने से 134 रुपये शामिल हैं.
योगदान हर राज्य में अलग-अलग होता है
मंत्री ने कहा कि इन आय स्रोतों का योगदान हर राज्य में अलग-अलग होता है, जो वहां की जलवायु, खेत के आकार और फसल पैटर्न पर निर्भर करता है. सर्वे में यह भी सामने आया कि औसतन 74,121 रुपये का कर्ज देश के 9.3 करोड़ कृषि परिवारों में से 50 प्रतिशत से ज्यादा पर है. यह कर्ज मुख्य रूप से खेती के रोजमर्रा के खर्च (31.6 प्रतिशत), खेती में पूंजी निवेश (25.9 प्रतिशत), मकान निर्माण (11.2 प्रतिशत), अन्य घरेलू जरूरतों (9.4 प्रतिशत), शादी-ब्याह व सामाजिक समारोह (6.4 प्रतिशत), शिक्षा और इलाज (5.4 प्रतिशत), गैर-कृषि व्यवसाय (3.9 प्रतिशत) और अन्य कारणों (6.2 प्रतिशत) के लिए लिया गया है.
औसत मासिक आय (कृषि परिवार)
- हरियाणा: ₹22,841
- पंजाब: ₹26,701
- राष्ट्रीय औसत: ₹10,218
- हिमाचल प्रदेश: ₹12,153
- राजस्थान: ₹12,520
- जम्मू-कश्मीर: ₹18,918
- मेघालय (सबसे अधिक): ₹29,348
- झारखंड (सबसे कम): ₹4,895
प्रति कृषि परिवार बकाया कर्ज
- हरियाणा: ₹1.83 लाख
- कर्जदार परिवार: 47.5 फीसदी
- पंजाब: ₹2.03 लाख
- कर्जदार परिवार: 54.4 फीसदी
- राष्ट्रीय औसत: ₹74,121
- कर्जदार परिवार: 50.2 फीसदी
- सबसे अधिक कर्ज वाले राज्य
- आंध्र प्रदेश: ₹2.45 लाख
- कर्जदार परिवार: 93 फीसदी
- केरल: ₹2.42 लाख
- कर्जदार परिवार: 70 फीसदी