कर्नाटक में बंद होने की कगार पर कई चावल मिलें, रोकना पड़ा उत्पादन.. प्रोसेसिंग के लिए नहीं मिल रहा धान

कर्नाटक के कई जिलों में धान की जमाखोरी और कीमतों में तेज बढ़ोतरी से चावल मिलें संकट में हैं. धान की कमी के कारण मिलों को उत्पादन रोकना पड़ रहा है. सोना मसूरी और आरएनआर धान के दाम तेजी से बढ़े हैं, जिससे उद्योग पर दबाव बढ़ गया है।

Kisan India
नोएडा | Updated On: 4 Feb, 2026 | 12:03 PM

Karnataka News: कर्नाटक के कई जिलों में धान की जमाखोरी और कीमतों में तेज बढ़ोतरी ने क्षेत्र की चावल मिलों की मुश्किलें बढ़ा दी हैं. बड़े किसानों द्वारा धान रोककर रखने के कारण मिलों को माल नहीं मिल पा रहा है, जिससे कई चावल मिलें बंद होने की कगार पर पहुंच गई हैं. किसानों ने बेहतर दाम मिलने की उम्मीद में कटाई के बाद धान का भंडारण कर लिया है. तुंगभद्रा सिंचाई परामर्श समिति ने तुंगभद्रा बांध के 32 क्रेस्ट गेट बदलने के काम के चलते दूसरी फसल के लिए पानी छोड़ना बंद कर दिया है. इसी कारण रबी सीजन में धान की खेती नहीं हो सकी.

डेक्कन हेराल्ड की रिपोर्ट के मुताबिक, रायचूर, बल्लारी, कोप्पल और विजयनगर जिलों में तुंगभद्रा नहरों के दाएं और बाएं किनारों पर लगभग 6 लाख एकड़ में धान की खेती होती है. यह इलाका कर्नाटक का ‘धान का कटोरा’ माना जाता है. पिछले साल आई बाढ़, भारी बारिश, बीमारियों और कीटों के कारण भी धान की पैदावार कम रही है. किसान नेता चामरसा मलीपाटिल के अनुसार, बड़े किसान फसल की जमाखोरी  कर रहे हैं और वे दूसरे किसानों का धान भी किराए पर गोदामों में रख रहे हैं. अधिकतर बड़े किसानों ने केंद्र सरकार की योजना के तहत नाबार्ड की सब्सिडी से गोदाम बना रखे हैं.

एक सीजन में करीब 18 लाख टन धान का उत्पादन

चावल मिल मालिकों का कहना है कि इन चार जिलों में एक सीजन में करीब 18 लाख टन धान का उत्पादन होता है, जिससे 3,000 करोड़ रुपये से अधिक का कारोबार होता है. किसानों द्वारा करीब आधी फसल रोककर रखने से सोना मसूरी धान की कीमत नवंबर में 75 किलो के एक बोरे के 1,500 रुपये से बढ़कर अब 1,900 रुपये तक पहुंच गई है.

धान की कीमतों में तेजी से बढ़ोतरी

पिछले तीन महीनों में उच्च गुणवत्ता वाली आरएनआर किस्म के धान की कीमत  भी तेजी से बढ़ी है. इसका भाव 75 किलो के एक बोरे पर 1,800 रुपये से बढ़कर 2,300 रुपये तक पहुंच गया है. चावल मिल मालिकों का कहना है कि कच्चे माल की कमी और बढ़ती कीमतों के कारण उनके पास धान की प्रोसेसिंग रोकने के अलावा कोई विकल्प नहीं बचा है. मिल संचालकों के अनुसार, खुदरा व्यापारी तब तक बढ़ी हुई कीमत पर चावल खरीदने को तैयार नहीं हैं, जब तक उनका पुराना स्टॉक खत्म नहीं हो जाता. ऐसे में धान की कीमत बढ़ने का पूरा बोझ चावल मिलों को ही उठाना पड़ रहा है. बड़े किसानों द्वारा की जा रही जमाखोरी के कारण बाजार में धान की आवक काफी घट गई है.

लंगाना से धान आने का है इंतजार

राइस मिल ओनर्स एसोसिएशन के सचिव गुरुराज शेट्टी ने कहा कि वे अब तेलंगाना से धान आने का इंतजार कर रहे हैं, जहां मार्च से दूसरी फसल की कटाई  शुरू होगी. उन्होंने कहा कि पड़ोसी राज्य तेलंगाना में पिछले एक दशक में सिंचाई सुविधाओं के तेजी से विस्तार के बाद करीब 60 फीसदी कृषि भूमि पर धान की खेती हो रही है.चावल मिलरों ने यह भी कहा कि खुदरा बाजार में चावल के दाम बढ़ने में अभी कम से कम एक महीना लगेगा, क्योंकि व्यापारी पहले अपने पुराने स्टॉक को खपाएंगे.

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Published: 4 Feb, 2026 | 12:02 PM

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