Dairy Farming : खेती-किसानी और पशुपालन हमारे ग्रामीण जीवन की रीढ़ हैं. घर में अगर एक भैंस हो, तो वह परिवार के सदस्य जैसी बन जाती है. लेकिन अक्सर पशुपालक एक बड़ी समस्या से परेशान रहते हैं कि भैंस अचानक दूध कम कर गई. शुरुआत में हमें लगता है कि शायद नजर लग गई या मौसम का असर है, लेकिन असल में इसके पीछे हमारी छोटी-छोटी लापरवाहियां होती हैं. अगर आपकी भैंस भी पहले जैसा दूध नहीं दे रही है, तो माथे पर चिंता की लकीरें मत खींचिए. बस अपनी रोजमर्रा की आदतों में थोड़ा बदलाव करें. आइए जानते हैं वे तीन बड़ी गलतियां, जो अनजाने में हम कर बैठते हैं.
चारा के साथ पानी की जरूरत पूरी करना अहम
पशुपालक अक्सर चारा डालने पर तो पूरा ध्यान देते हैं, लेकिन पानी को नजरअंदाज कर देते हैं. याद रखिए, दूध में लगभग 85 फीसदी हिस्सा पानी होता है. अगर पशु शरीर की जरूरत के मुताबिक पानी नहीं पीयेगा, तो दूध अपने आप कम हो जाएगा. अक्सर हम भैंस को दिन में सिर्फ दो या तीन बार पानी पिलाते हैं, लेकिन पशु को जब प्यास लगे तब साफ पानी उपलब्ध होना चाहिए. बाल्टी या हौद गंदी न हो, क्योंकि गंदा पानी बीमारियों को न्योता देता है. सर्दियों में गुनगुना और गर्मियों में ताजा पानी देने से पशु का पाचन सही रहता है और दूध की मात्रा बनी रहती है.
पेट के कीड़े पशु की ऊर्जा खा रहे
क्या आपकी भैंस खूब चारा खा रही है लेकिन फिर भी कमजोर दिख रही है? अगर हां, तो समझ लीजिए कि उसके पेट में बिन बुलाए मेहमान यानी कीड़े पल रहे हैं. ये कीड़े पशु के पोषण को खुद चट कर जाते हैं, जिससे शरीर को ऊर्जा नहीं मिलती और दूध का उत्पादन गिर जाता है. हर तीन महीने में पशु को पेट के कीड़ों की दवाई (Deworming) देना बहुत जरूरी है. पशुपालक अक्सर इसे फालतू का खर्चा समझते हैं, लेकिन यह सबसे निवेश वाला काम है. कीड़े मारने की दवा देने के बाद पशु को लीवर टॉनिक भी जरूर दें, ताकि उसकी भूख खुल सके और दूध में बढ़ोतरी हो.
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कैल्शियम की मात्रा दूर करेगी कम उत्पादन का संकट
दूध निकालने के साथ-साथ पशु के शरीर से कैल्शियम भी बाहर निकलता है. अगर हम खुराक में अलग से कैल्शियम नहीं दे रहे, तो भैंस के शरीर में इसकी कमी हो जाती है. इसकी वजह से न सिर्फ दूध कम होता है, बल्कि पशु को उठने-बैठने में तकलीफ होने लगती है और वह समय पर हीट (Heat) में भी नहीं आता. बाजार में मिलने वाले अच्छी गुणवत्ता के कैल्शियम और मिनरल मिक्सचर (Mineral Mixture) को दाने में मिलाकर खिलाएं. इसके अलावा, घर पर भी चूने के पानी का सही इस्तेमाल कर आप कैल्शियम की पूर्ति कर सकते हैं. जब शरीर अंदर से मजबूत होगा, तभी भैंस पूरी क्षमता से दूध दे पाएगी.
पशु डरा रहेगा या तनाव में है तो उत्पादन घटना तय
मशीन और बेजान चीज में फर्क होता है, और हमारी भैंस तो एक संवेदनशील जीव है. अगर पशु तनाव में है, डरा हुआ है या उसे मारा-पीटा गया है, तो वह दूध चढ़ा लेती है. पशु को बांधने की जगह हवादार और आरामदायक होनी चाहिए. उसे समय पर नहलाना और उसकी पीठ पर हाथ फेरना (दुलारना) भी दूध बढ़ाने में जादुई असर करता है. जब पशु खुश रहता है, तो उसके शरीर में ऑक्सीटोसिन हार्मोन सही से काम करता है, जिससे दूध की पूरी उतार (पवास) होती है.