Today’s Insights: बीज बोने से पहले भिगोना क्यों जरूरी है? जानें उत्पादन पर क्या असर पड़ता है

अच्छी फसल के लिए सिर्फ खाद-पानी ही काफी नहीं, बल्कि सही शुरुआत जरूरी है. बीज बोने से पहले उन्हें भिगोना एक ऐसी तकनीक है जो अंकुरण को तेज कर पौधों को मजबूती देती है. अगर आप भी खेती में बेहतर मुनाफा और स्वस्थ फसल चाहते हैं, तो बीजों को भिगोने के सही तरीके और फायदों को जरूर जानें.

Saurabh Sharma
नोएडा | Updated On: 10 Jan, 2026 | 04:21 PM

Seed Soaking Benefits : खेती-किसानी की दुनिया में अक्सर हम सोचते हैं कि बस अच्छी खाद और सही समय पर बुवाई ही काफी है. लेकिन क्या आप जानते हैं कि एक छोटा सा बर्तन और थोड़ा सा पानी आपकी पूरी फसल की किस्मत बदल सकता है? जी हां, हम बात कर रहे हैं बीजों को भिगोने (Seed Soaking) की. यह सुनने में तो बहुत सामान्य सी बात लगती है, लेकिन मिट्टी में बीज डालने से पहले उन्हें पानी में नहलाना एक जादुई नुस्खे की तरह काम करता है. आइए जानते हैं कि यह आसान सा तरीका कैसे आपके उत्पादन को कई गुना बढ़ा सकता है.

बीजों की नींद खोलता है पानी

प्रकृति ने बीजों  को सुरक्षित रखने के लिए उनके ऊपर एक सख्त कवच या छिलका दिया होता है. कई बार यह छिलका इतना कठोर होता है कि मिट्टी की नमी इसे आसानी से नहीं तोड़ पाती. जब हम बीजों को बोने से पहले भिगोते हैं, तो यह पानी उस सख्त दीवार को नरम कर देता है. इससे बीज के अंदर सो रहा नन्हा पौधा (भ्रूण) आसानी से बाहर निकल आता है. एक तरह से भिगोना बीज के लिए अलार्म का काम करता है, जो उसे बताता है कि अब जागने और बढ़ने का समय आ गया है.

रसायनों की बाधा और नमी का सुरक्षा चक्र

कुदरती तौर पर कई बीजों में ऐसे रसायन होते हैं जो उन्हें समय से पहले अंकुरित होने से रोकते हैं. भिगोने की प्रक्रिया इन अवरोधक रसायनों को धो  देती है. साथ ही, रेतीली मिट्टी या ऐसी जगह जहां पानी जल्दी सूख जाता है, वहां पहले से भीगे हुए बीज फायदे में रहते हैं. बीज के अंदर पहले से मौजूद नमी उसे शुरुआती दिनों में सहारा देती है, जिससे पौधा सूखे की मार से बच जाता है और उसकी जड़ें मजबूती से मिट्टी को पकड़ लेती हैं.

एक जैसा विकास: खेत दिखेगा हरा-भरा

अक्सर किसानों की शिकायत होती है कि कुछ पौधे बड़े हो गए और कुछ अभी जमीन से बाहर ही नहीं आए. भिगोने से यह समस्या खत्म हो जाती है. जब सभी बीजों को एक साथ भिगोया जाता है, तो उनका अंकुरण एक समान (Uniform Germination) होता है. इससे पूरा खेत एक साथ हरा-भरा दिखता है, जिससे निराई-गुड़ाई और खाद प्रबंधन में भी आसानी होती है. साथ ही, बीज अपनी ऊर्जा छिलका तोड़ने में बर्बाद नहीं करता, बल्कि सीधे अपनी लंबाई और मजबूती बढ़ाने में लगाता है.

भिगोने का सही तरीका और सावधानियां

यह तरीका मटर, बीन्स, कद्दू, लौकी और खीरे जैसे मोटे छिलके वाले बीजों के लिए रामबाण है. इन्हें आप 6 से 24 घंटे तक पानी में भिगो सकते हैं. लेकिन ध्यान रहे, बहुत छोटे बीजों (जैसे सरसों या टमाटर) को भिगोने की गलती न करें, क्योंकि वे आपस में चिपक जाते हैं और उन्हें बोना मुश्किल हो जाता है. भिगोने के तुरंत बाद बीजों को मिट्टी  में लगा देना चाहिए ताकि उनकी नमी बनी रहे.

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Published: 10 Jan, 2026 | 01:30 PM

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