किन्नू की नई किस्म जारी, अब पहले से ज्यादा होगी पैदावार, फल में बीज भी होंगे बहुत कम

पंजाब की ठंडी सर्दियों की रातें किन्नू को सुनहरा पीला रंग, अधिक जूस और बेहतरीन स्वाद देती हैं. गहरी उपजाऊ मिट्टी और व्यापक नहर सिंचाई उत्पादन को और बढ़ाती हैं, जिससे अच्छे प्रबंधन में प्रति पेड़ 200 किलोग्राम तक उपज मिल सकती है.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 9 Feb, 2026 | 09:24 AM

Punjab Agriculture News: पंजाब के किन्नू किसानों के लिए खुशखबरी है. कृषि वैज्ञानिकों ने किन्नू की नई किस्म PAU Kinnow-1 रिलीज की है. कहा जा रहा है कि इस किस्म में बहुत ही कम बीज पाए जाते हैं. प्रति फल लगभग 3.4 बीज होता है. विशेषज्ञों का कहना है कि यह नई किस्म पंजाब के बागवानी क्षेत्र को बदल सकती है, क्योंकि इससे जूस की पैदावार, उपभोक्ता पसंद और वैश्विक बाजार में प्रतिस्पर्धा बेहतर होगी.

दरअसल, किन्नू पंजाब की फल अर्थव्यवस्था की रीढ़ है. यह प्रति वर्ष लगभग 13.2 लाख टन किन्नू उत्पादन  करता है और राज्य के कुल फल क्षेत्र का करीब 47 फीसदी हिस्सा है. अनुकूल कृषि-जलवायु, संस्थागत समर्थन और किसानों की उद्यमशीलता ने इसके विकास को गति दी है. PAU Kinnow-1 की नई किस्म से जूस प्रोसेसिंग और निर्यात की संभावनाएं बढ़ेंगी. पोस्ट-हार्वेस्ट तकनीक और नए बाजार किसानों की आय को स्थिर कर नुकसान को कम कर सकते हैं.

द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, किन्नू की खेती 1956 में अबोहर के रीजनल फ्रूट रिसर्च स्टेशन में शुरू हुई थी और 1968 में व्यावसायिक खेती के लिए अनुशंसित हुई. 1970 में लगभग 500 हेक्टेयर क्षेत्र में फैली यह फसल अब 2023-24 में लगभग 49,000 हेक्टेयर तक बढ़ चुकी है. पंजाब एग्रीकल्चर यूनिवर्सिटी (PAU) के फ्रूट साइंस विभाग के प्रमुख डॉ. एच.एस. रत्तनपाल के अनुसार, PAU Kinnow-1 की उच्च गुणवत्ता, बेहतर पैदावार और अनुकूलन क्षमता इसे किसानों की पहली पसंद बनाती है.

प्रति पेड़ 200 किलोग्राम तक उपज मिल सकती है

पंजाब की ठंडी सर्दियों की रातें किन्नू को सुनहरा पीला रंग, अधिक जूस और बेहतरीन स्वाद देती हैं. गहरी उपजाऊ मिट्टी  और व्यापक नहर सिंचाई उत्पादन को और बढ़ाती हैं, जिससे अच्छे प्रबंधन में प्रति पेड़ 200 किलोग्राम तक उपज मिल सकती है. PAU ने पोस्ट-हार्वेस्ट तकनीकों जैसे कि वैक्सिंग, ग्रेडिंग और कोल्ड स्टोरेज को भी मानकीकृत किया है. राज्य में अब 40 से अधिक वैक्सिंग प्लांट काम कर रहे हैं, जिससे पंजाब का किन्नू दूर-दराज के घरेलू और विदेशी बाजारों तक पहुंच पा रहा है.

इस कमी को पूरा करने की उम्मीद है

डॉ. गुरतेग सिंह, PAU के मुख्य फल वैज्ञानिक, कहते हैं कि पोस्ट-हार्वेस्ट इनोवेशन से किन्नू की शेल्फ लाइफ बढ़ी और निर्यात में भी वृद्धि हुई है, जिससे इसे एक अलग एग्रो-इंडस्ट्री का रूप मिल गया है. हालांकि, पारंपरिक किन्नू में अधिक बीज होने की वजह से जूस प्रोसेसिंग और निर्यात पर असर पड़ता था. PAU Kinnow-1 से इस कमी को पूरा करने की उम्मीद है.

पंजाब इन देशों को करता है किन्नू निर्यात

डॉ. रत्तनपाल के अनुसार, बीजरहित या कम बीज वाले मंदरिन ही भविष्य हैं. PAU Kinnow-1 वैश्विक व्यापार के नए अवसर खोलता है. पंजाब फिलहाल मुख्य रूप से रूस, मध्य पूर्व, नेपाल और बांग्लादेश में किन्नू का निर्यात  करता है, जबकि श्रीलंका और थाईलैंड संभावित नए बाजार बन रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि मजबूत किसान उत्पादक संगठन और बढ़ी हुई प्रोसेसिंग क्षमता से किसानों की आय स्थिर होगी और नुकसान कम होगा. किन्नू की खेती हर साल लगभग 1,000 हेक्टेयर बढ़ रही है, जिससे पंजाब भारत में अपनी नेतृत्व स्थिति मजबूत कर रहा है और प्रीमियम मंदरिन का वैश्विक हब बनने की ओर बढ़ रहा है.

Get Latest   Farming Tips ,  Crop Updates ,  Government Schemes ,  Agri News ,  Market Rates ,  Weather Alerts ,  Equipment Reviews and  Organic Farming News  only on KisanIndia.in

Published: 9 Feb, 2026 | 09:14 AM

केला जल्दी काला क्यों पड़ जाता है?