फूलगोभी की फसल पर खतरनाक कीट का हमला, समय पर बचाव नहीं किया तो भारी नुकसान तय

फूलगोभी की फसल पर डायमंड बैक मॉथ नाम का कीट तेजी से नुकसान पहुंचा सकता है. समय पर पहचान और नीम तेल जैसे उपाय अपनाकर किसान फसल बचा सकते हैं. लापरवाही करने पर पैदावार में भारी गिरावट आ सकती है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 21 Feb, 2026 | 11:30 PM

Cauliflower Crop: फूलगोभी की फसल खेत में लहलहा रही हो और अचानक पत्तियां छलनी जैसी दिखने लगें, तो समझ जाइए खतरा आ चुका है. एक छोटा सा कीट देखते ही देखते पूरी फसल बर्बाद कर सकता है. अगर समय रहते पहचान और सही छिड़काव न किया जाए, तो मेहनत पर पानी फिर सकता है. इसलिए जरूरी है कि किसान शुरुआत में ही सावधान हो जाएं.

यह कीट क्यों है इतना खतरनाक?

फूलगोभी पर हमला  करने वाला यह कीट बहुत छोटा होता है, लेकिन नुकसान बड़ा करता है. इसका लार्वा यानी बच्चा सबसे ज्यादा खतरनाक होता है. यह पत्तियों की नीचे वाली सतह को खुरच-खुरच कर खाता है. धीरे-धीरे पत्तियों में छेद हो जाते हैं और फिर सिर्फ नसें ही बचती हैं. जब पत्तियां खराब हो जाती हैं, तो पौधा ठीक से भोजन नहीं बना पाता. इससे उसकी बढ़त रुक जाती है और फूल भी सही से नहीं बनता. अगर तापमान थोड़ा गर्म हो जाए, तो यह कीट तेजी से बढ़ता है और कुछ ही दिनों में खेत में फैल जाता है. कई बार 80 से 90 प्रतिशत तक फसल का नुकसान हो सकता है.

शुरुआत में ऐसे करें बचाव

इस कीट से बचने के लिए किसान आसान और सस्ता तरीका अपना सकते हैं. खेत में हर तीन कतार फूलगोभी के बाद एक कतार सरसों की लगाएं. इसे ‘प क्रॉप’ कहा जाता है. सरसों की गंध इस कीट को अपनी ओर खींच लेती है, जिससे फूलगोभी सुरक्षित रहती है. इसके अलावा, फसल की शुरुआती  अवस्था में 4 प्रतिशत नीम तेल का छिड़काव करना बहुत फायदेमंद होता है. नीम का घोल कीट के अंडों और छोटे लार्वा को खत्म करने में मदद करता है. यह तरीका पर्यावरण और स्वास्थ्य दोनों के लिए सुरक्षित है. किसान चाहें तो नीम की गुठली का अर्क भी इस्तेमाल कर सकते हैं.

संक्रमण बढ़ जाए तो क्या करें?

अगर कीट का असर ज्यादा हो जाए और जैविक उपाय काम न करें, तो फिर रासायनिक दवा का सहारा लेना पड़ सकता है. लेकिन दवा का छिड़काव सोच-समझकर करें. शाम के समय स्प्रे करना बेहतर रहता है. फूल आने के समय ज्यादा दवा का इस्तेमाल न करें, क्योंकि इससे गुणवत्ता खराब  हो सकती है. एकीकृत कीट प्रबंधन यानी IPM तरीका अपनाना सबसे अच्छा रहता है. इसमें जैविक और रासायनिक दोनों उपाय संतुलित तरीके से किए जाते हैं. इससे लागत भी कम रहती है और फसल की गुणवत्ता भी बनी रहती है.

समय पर पहचान ही असली बचाव

फूलगोभी की खेती में यह कीट  बड़ी चुनौती बन सकता है, लेकिन सही समय पर पहचान और सही कदम उठाने से नुकसान रोका जा सकता है. खेत का नियमित निरीक्षण करें, पत्तियों के नीचे जरूर देखें और शुरुआती लक्षण दिखते ही कार्रवाई करें. अगर किसान थोड़ी सतर्कता रखें और नीम जैसे आसान उपाय अपनाएं, तो फसल को बड़े नुकसान से बचाया जा सकता है. समय पर बचाव ही सबसे बड़ी दवा है.

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Published: 21 Feb, 2026 | 11:30 PM

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