तमिलनाडु के पान किसानों को पैदावार और गुणवत्ता प्रभावित होने से नुकसान, की रिसर्च सेंटर बनाने की मांग

तमिलनाडु पान किसानों के संघ के अध्यक्ष एम वैयापुरी ने कहा कि रिसर्च सेंटर की मांग एक दशक से लंबित है. 2019 में AIADMK सरकार ने इसका आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ. किसानों ने कहा कि पहले लगभग 40 फीसदी उत्पादन उत्तर भारत के राज्यों जैसे गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र भेजा जाता था, जो अब बहुत कम हो गया है.

Kisan India
नोएडा | Published: 14 Feb, 2026 | 11:30 PM

Tamil Nadu News: तमिलनाडु के नमक्कल जिले के परामथी वेलूर में पान किसानों ने एक बार फिर अलग रिसर्च सेंटर की मांग उठाई है. किसानों का कहना है कि बेहतर पैदावार और गुणवत्ता के लिए वैज्ञानिक समाधान की कमी है. साथ ही निर्यात के सीमित अवसर और आधुनिक तकनीक का कम उपयोग कभी समृद्ध रहे इस पान उद्योग को कमजोर बना रहा है. करीब 2,000 एकड़ में फैली पान की खेती पंडमंगलम, पोथानूर, वेलूर, अनीचम्पलयम, कुप्पुचिपलयम और नांसेई इडयार जैसे गांवों में लगभग 50,000 लोगों की आजीविका का आधार है. ये लोग पान की खेती, तुड़ाई, छंटाई और व्यापार से जुड़े हैं.

द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, तमिलनाडु पान किसानों के संघ के अध्यक्ष एम वैयापुरी ने कहा कि रिसर्च सेंटर की मांग एक दशक से लंबित है. 2019 में AIADMK सरकार ने इसका आश्वासन दिया था, लेकिन अब तक कुछ नहीं हुआ. किसानों ने कहा कि पहले लगभग 40 फीसदी उत्पादन उत्तर भारत के राज्यों जैसे गुजरात, मध्य प्रदेश और महाराष्ट्र भेजा जाता था, जो अब बहुत कम हो गया है. पत्तियों पर कीट और रोग जैसे लीफ रॉट और पाउडरी मिल्ड्यू ने पैदावार और गुणवत्ता  दोनों को प्रभावित किया है. किसानों का कहना है कि कीटनाशकों के ज्यादा इस्तेमाल से पान की बाजार कीमत और गिर गई है. एक किसान ने कहा कि हम अपनी खेती पर खर्च की गई रकम भी नहीं निकाल पा रहे हैं. मुख्य कारण कीट और खराब गुणवत्ता है. रिसर्च सेंटर से इसका समाधान मिल सकता है.

क्या कहते हैं किसान

किसान यह भी कहते हैं कि पर्याप्त शोध का अभाव, निर्यात के अवसरों की जानकारी का कम होना और आधुनिक तकनीक का सीमित इस्तेमाल इस क्षेत्र को पीछे छोड़ गया है. उनका मानना है कि एक समर्पित रिसर्च सेंटर उत्पादकता बढ़ाने, रोग-प्रतिरोधी पान  की किस्में विकसित करने, पत्तियों की ताजगी बढ़ाने और पान के औषधीय गुणों की खोज पर ध्यान दे सकता है.

1,500 रुपये में बिकती है एक टोकरी

परामथी वेलूर खासकर ‘कर्पूरा’ पान के लिए जाना जाता है, जो लगभग एक सप्ताह तक ताजा रहता है. त्योहार और शादी के सीजन में कर्पूरा पत्तियों की टोकरी लगभग 1,500 रुपये में बिकती है, लेकिन ऑफ-सीजन में कीमत 500 रुपये तक गिर जाती है, जो व्यापार की अस्थिरता दिखाती है. किसान इसे ‘चुनावी वादा’ भी कहते हैं, क्योंकि 2021 समेत कई चुनावों में उम्मीदवारों ने रिसर्च सेंटर स्थापित करने का भरोसा दिया, लेकिन कोई ठोस कदम नहीं उठाया गया. बागवानी  विभाग के एक वरिष्ठ अधिकारी ने बताया कि सिरुगमानी में पहले से ही पान पर रिसर्च हो रही है. हालांकि, उन्होंने यह भी कहा कि परामथी वेलूर में अलग रिसर्च सेंटर बनाने का फैसला सिर्फ विभाग के हाथ में नहीं है.

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Published: 14 Feb, 2026 | 11:30 PM

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