टैरिफ कम होने से संभलेगा भारतीय सीफूड कारोबार, अमेरिका से ऑर्डर बढ़ने के आसार

अगस्त 2025 में अमेरिका ने भारतीय सामानों पर भारी टैरिफ लगा दिए थे. इससे भारतीय मछली और झींगा जैसे सीफूड उत्पाद अमेरिका में महंगे हो गए. जब दाम बढ़े, तो अमेरिकी खरीदारों ने नए ऑर्डर देना कम कर दिया. इसका सीधा असर निर्यात पर पड़ा. अप्रैल से नवंबर के बीच अमेरिका को होने वाला सीफूड निर्यात मात्रा के हिसाब से करीब 15 प्रतिशत घट गया.

Kisan India
नई दिल्ली | Updated On: 4 Feb, 2026 | 09:34 AM

Indian seafood exports: पिछले कुछ महीनों से मुश्किलों से गुजर रहे भारतीय सीफूड उद्योग के लिए अब राहत की खबर आई है. अमेरिका ने भारतीय उत्पादों पर लगाए गए टैरिफ को कम कर दिया है, जिसके बाद उम्मीद जताई जा रही है कि भारत से अमेरिका जाने वाला सीफूड निर्यात फिर से बढ़ेगा. लंबे समय से ऊंचे टैक्स और अनिश्चितता के कारण जो गिरावट आई थी, उससे अब धीरे-धीरे बाहर निकलने का रास्ता खुलता नजर आ रहा है.

ज्यादा टैक्स ने क्यों बढ़ाई परेशानी

मीडिया रिपोर्ट के अमुसार, अगस्त 2025 में अमेरिका ने भारतीय सामानों पर भारी टैरिफ लगा दिए थे. इससे भारतीय मछली और झींगा जैसे सीफूड उत्पाद अमेरिका में महंगे हो गए. जब दाम बढ़े, तो अमेरिकी खरीदारों ने नए ऑर्डर देना कम कर दिया. इसका सीधा असर निर्यात पर पड़ा. अप्रैल से नवंबर के बीच अमेरिका को होने वाला सीफूड निर्यात मात्रा के हिसाब से करीब 15 प्रतिशत घट गया. कम माल भेजा गया और कम कमाई हुई.

अब हालात सुधरने की उम्मीद

अब अमेरिका ने टैरिफ को 25 प्रतिशत से घटाकर 18 प्रतिशत कर दिया है. सीफूड एक्सपोर्टर्स एसोसिएशन ऑफ इंडिया का कहना है कि इससे भारतीय निर्यातकों को बड़ी राहत मिलेगी. संगठन के अनुसार, अब भारतीय सीफूड फिर से दूसरे देशों के बराबर दाम पर अमेरिकी बाजार में बिक सकेगा. इससे पुराने ग्राहक लौट सकते हैं और नए ऑर्डर भी मिलने की उम्मीद है.

नए ऑर्डर क्यों रुक गए थे

जब टैक्स बहुत ज्यादा था, तब कई अमेरिकी कंपनियों ने नए ऑर्डर देने से रोक लगा दी थी. जो माल पहले से भेजा गया था, उसे भी कई बार कस्टम्स के गोदामों में रोककर रखा गया. जरूरत पड़ने पर ही उसे बाजार में उतारा गया. इससे कारोबार चलता तो रहा, लेकिन आगे की डील पर ब्रेक लग गया था. अब टैक्स कम होने से व्यापार फिर से सामान्य होने की उम्मीद है.

अमेरिका भारतीय सीफूड के लिए बड़ा बाजार

अमेरिका भारत के लिए सीफूड का बहुत अहम बाजार है. चीन और यूरोप के बाद अमेरिका तीसरा सबसे बड़ा खरीदार है. भारत से अमेरिका भेजे जाने वाले सीफूड में ज्यादातर हिस्सा जमी हुई मछली और झींगे का होता है. कुल निर्यात में इनकी हिस्सेदारी करीब 80 प्रतिशत से ज्यादा मानी जाती है. इसलिए अमेरिका में थोड़ी सी भी राहत का फायदा सीधे मछुआरों, प्रोसेसिंग यूनिट्स और निर्यातकों तक पहुंचता है.

व्यापार फैसलों का सीधा असर

यह टैरिफ कटौती भारत और अमेरिका के बीच हुए व्यापार समझौते के बाद सामने आई है. ऐसे फैसले अक्सर बड़े राजनीतिक और रणनीतिक स्तर पर लिए जाते हैं. उद्योग से जुड़े लोगों का कहना है कि जब ऐसे फैसले सकारात्मक होते हैं, तो उनका फायदा जमीन पर साफ दिखता है. टैरिफ कम होने से भारतीय सीफूड को अमेरिकी बाजार में दोबारा मजबूत पकड़ बनाने का मौका मिलेगा.

सीफूड उद्योग को भरोसा है कि आने वाले महीनों में निर्यात धीरे-धीरे पुराने स्तर पर लौट सकता है. इससे तटीय इलाकों में रहने वाले लाखों मछुआरों और मजदूरों की आमदनी पर भी अच्छा असर पड़ेगा. अगर टैरिफ और नीतियों में स्थिरता बनी रही, तो भारत अमेरिका में अपने सीफूड की मजबूत पहचान बनाए रख सकेगा.

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Published: 4 Feb, 2026 | 09:00 AM

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