पशुपालक रहें सावधान! सर्दियों में एक छोटी गलती पशुओं को बना सकती है गंभीर बीमारियों का शिकार, ऐसे करें बचाव

Cattle Care Tips: सर्दियों का मौसम पशुओं के लिए कई गंभीर बीमारियां लेकर आता है. ठंड, कोहरा और गिरता तापमान गाय-भैंस और बछड़ों की सेहत पर सीधा असर डालता है. थोड़ी सी लापरवाही निमोनिया जैसी जानलेवा बीमारी की वजह बन सकती है. ऐसे में सही देखभाल और सतर्कता बेहद जरूरी है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 8 Jan, 2026 | 11:19 AM

Animal Winter Care : जैसे-जैसे ठंड बढ़ती है, इंसानों के साथ-साथ पशुओं की मुश्किलें भी बढ़ने लगती हैं. खासकर गांवों में गाय, भैंस और छोटे बछड़े सर्दी का असर सबसे पहले झेलते हैं. ठंडी हवा, कोहरा और गिरता तापमान अगर समय रहते नहीं संभाला गया, तो यही मौसम पशुओं के लिए जान का खतरा बन सकता है. सर्दियों में पशुपालकों की थोड़ी सी लापरवाही सीधे बीमारियों को न्योता देती है, जिससे न सिर्फ पशु कमजोर होते हैं बल्कि अचानक मौत तक का खतरा रहता है.

सर्दियों में क्यों बढ़ जाता है निमोनिया का खतरा

मीडिया रिपोर्ट के अनुसार,  ठंड के मौसम में पशुओं  की रोग प्रतिरोधक क्षमता कमजोर पड़ जाती है. ऐसे में निमोनिया जैसी बीमारी  तेजी से फैलती है. खासकर छोटे बछड़े इसकी चपेट में जल्दी आ जाते हैं. ठंडी हवा सीधे फेफड़ों पर असर डालती है, जिससे सांस लेने में दिक्कत, नाक से पानी आना, बुखार और सुस्ती जैसे लक्षण दिखने लगते हैं. कई मामलों में समय पर इलाज न मिले तो हालात गंभीर हो जाते हैं. यही वजह है कि सर्दियों में पशुओं पर सामान्य दिनों से ज्यादा नजर रखना जरूरी हो जाता है.

पशुओं के रहने की जगह पर रखें खास ध्यान

सर्दियों में पशुओं के बाड़े या तबेले की सही व्यवस्था सबसे अहम होती है. पशुओं की रहने की जगह चारों तरफ से खुली न हो. ठंडी हवा और कोहरे को रोकने के लिए बाड़े को ढककर रखें. जमीन सूखी और साफ होनी चाहिए, ताकि नमी से बीमारी  न फैले. बछड़ों के ऊपर हल्का और सुरक्षित कपड़ा डालना फायदेमंद रहता है, लेकिन ध्यान रहे कि कपड़ा उनकी सांस की नली में न फंसे. रात के समय ठंड ज्यादा बढ़ने पर अतिरिक्त सावधानी बरतना बेहद जरूरी है.

ड्रिंचिंग के समय बरतें बड़ी सावधानी

सर्दियों में कई बार पशुओं या बछड़ों को दूध, पानी या अन्य तरल पदार्थ पिलाते समय बड़ी गलती हो जाती है. जल्दबाजी या गलत तरीके से पिलाने पर तरल पदार्थ सांस की नली में चला जाता है, जिसे ड्रिंचिंग निमोनिया कहा जाता है. यह स्थिति बेहद खतरनाक होती है और फेफड़ों में संक्रमण फैलने  से पशु की अचानक मौत तक हो सकती है. इसलिए सर्दियों में तरल पदार्थ हमेशा सही तरीके और सावधानी से पिलाएं, खासकर छोटे बछड़ों को.

बीमारियों से बचाव ही सबसे बेहतर इलाज

सर्दियों में निमोनिया  के साथ-साथ सफेद दस्त और बछड़ों में चौक जैसी बीमारियां भी आम हो जाती हैं. समय-समय पर पशुओं की सेहत की जांच करते रहें. अगर पशु सुस्त दिखे, खाना कम खाए या सांस लेने में परेशानी हो, तो इसे नजरअंदाज न करें. साफ-सफाई, गर्म वातावरण और सही देखभाल से ज्यादातर बीमारियों से बचा जा सकता है. सर्दियों में सतर्कता ही पशुओं की सुरक्षा की सबसे बड़ी कुंजी है, क्योंकि थोड़ी सी लापरवाही बड़ा नुकसान कर सकती है.

Get Latest   Farming Tips ,  Crop Updates ,  Government Schemes ,  Agri News ,  Market Rates ,  Weather Alerts ,  Equipment Reviews and  Organic Farming News  only on KisanIndia.in

कीवी उत्पादन के मामले में देश का सबसे प्रमुख राज्य कौन सा है