गेहूंं में पीला रतुआ फैलने की आशंका, वैज्ञानिकों ने फसल को बचाने के लिए दी ये सलाह

टीम ने गेहूं की फसलों का सर्वे किया. यह सर्वे अंबाला जिले के बराड़ा ब्लॉक के मिल्क धनकोटा, मानका और बिकमपुर गांवों में हुआ. साहा ब्लॉक के तेपला गांव को भी शामिल किया गया. इसके अलावा पंचकूला जिले के रायपुर रानी ब्लॉक के हंगोला, पियारेवाला और गढ़ी कोटाहा गांवों में भी फसलों की जांच की गई.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 2 Jan, 2026 | 12:20 PM

Yellow Rust: हरियाणा के अंबाला और पंचकूला जिले के कई इलाकों में गेहूं की फसल में पीला रतुआ (येलो रस्ट) बीमारी फैलने की आशंका से किसान डरे हुए हैं. हालांकि, जांच के लिए केंद्र और राज्य सरकार की टीमों ने संयुक्त सर्वे किया है. इस सर्वे में कहीं भी बीमारी का कोई मामला नहीं मिला. सर्वे के दौरान गेहूं के खेतों में कीटों और बीमारियों, खासकर पीला रतुआ (येलो रस्ट) की जांच की गई. अधिकारियों ने कहा कि अब तक सर्वे किए गए किसी भी इलाके में किसी बड़े कीट या बीमारी का कोई मामला नहीं मिला. किसानों से बातचीत के दौरान उन्हें सलाह दी गई कि वे सतर्क रहें और अपनी फसलों की नियमित निगरानी करते रहें.

द टाइम्स ऑफ इंडिया की रिपोर्ट के मुताबिक, अंबाला के सहायक पौध संरक्षण अधिकारी शेखर ने कहा कि यह सर्वे कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय, भारत सरकार के अंतर्गत किया गया. इसमें क्षेत्रीय एकीकृत कीट प्रबंधन (IPM) केंद्र फरीदाबाद  की टीम शामिल थी. साथ ही जिला कृषि विभाग अंबाला के बराड़ा और साहा ब्लॉक तथा जिला कृषि विभाग पंचकूला के रायपुर रानी ब्लॉक की टीमों ने संयुक्त रूप से यह सर्वे किया.

पियारेवाला और गढ़ी कोटाहा गांवों में भी फसलों की जांच की गई

टीम ने गेहूं की फसलों का सर्वे किया. यह सर्वे अंबाला जिले के बराड़ा ब्लॉक के मिल्क धनकोटा, मानका और बिकमपुर गांवों में हुआ. साहा ब्लॉक के तेपला गांव को भी शामिल किया गया. इसके अलावा पंचकूला जिले के रायपुर रानी ब्लॉक के हंगोला, पियारेवाला और गढ़ी कोटाहा गांवों में भी फसलों की जांच की गई.

फसल को रोग से बचाने के लिए करें ये काम

अधिकारियों ने किसानों को बताया कि अगर खेत के किसी हिस्से में पीला रतुआ  के लक्षण दिखें तो प्रभावित पौधों को उखाड़कर पॉलीथिन में बंद करें और मिट्टी में दबा दें, ताकि बीमारी आगे न फैले. अगर संक्रमण ज्यादा हो जाए, तो किसानों को केंद्रीय कीटनाशक पंजीकरण बोर्ड (CIRB) से स्वीकृत फफूंदनाशकों का ही, तय दिशा-निर्देशों के अनुसार, इस्तेमाल करने की सलाह दी गई.

अधिकारियों ने किसानों को दी ये सलाह

इस सर्वे टीम में क्षेत्रीय IPM केंद्र फरीदाबाद से APPO लक्ष्मी कांत, APPO राम कुमार और APPO सुरजीत बर्मन भी शामिल थे. स्थानीय किसानों ने भी खेतों की जांच और चर्चा में सक्रिय भागीदारी की. कृषि अधिकारियों ने कहा कि समय पर निगरानी और तुरंत बचाव के उपाय अपनाकर ही गेहूं की फसल  को सुरक्षित रखा जा सकता है और अच्छी पैदावार सुनिश्चित की जा सकती है.

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Published: 2 Jan, 2026 | 12:12 PM

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