ट्रैक्टर का 3-पॉइंट लिंकेज सिस्टम कैसे करता है काम? जानिए पूरी तकनीक और फायदे

3-पॉइंट लिंकेज सिस्टम ट्रैक्टर को बहुउपयोगी बनाता है. एक ही ट्रैक्टर से किसान जुताई, बुवाई, खाद डालना, निराई-गुड़ाई और अन्य काम कर सकते हैं. इससे अलग-अलग मशीनों की जरूरत कम हो जाती है. इस तकनीक से काम तेजी से पूरा होता है. उपकरण बदलना आसान होता है, जिससे समय की बचत होती है.

Kisan India
नई दिल्ली | Published: 16 Feb, 2026 | 08:14 AM

Tractor 3 point linkage system: खेती के आधुनिक दौर में ट्रैक्टर केवल जुताई करने वाली मशीन नहीं रहा, बल्कि यह किसानों का सबसे भरोसेमंद साथी बन चुका है. खेत की तैयारी से लेकर बुवाई, खाद डालने, निराई-गुड़ाई और कई अन्य कामों में ट्रैक्टर अहम भूमिका निभाता है. लेकिन ट्रैक्टर को असली ताकत देता है उसका 3-पॉइंट लिंकेज सिस्टम. यही वह तकनीक है, जिसकी वजह से एक ही ट्रैक्टर कई तरह के कृषि उपकरणों के साथ अलग-अलग काम कर सकता है.

3-पॉइंट लिंकेज सिस्टम की मदद से किसान समय, मेहनत और लागत तीनों बचा सकते हैं. साथ ही खेत का काम अधिक सटीक और प्रभावी तरीके से पूरा होता है. आइए जानते हैं कि यह सिस्टम क्या है, कैसे काम करता है और इसके क्या फायदे हैं.

क्या है 3-पॉइंट लिंकेज सिस्टम?

3-पॉइंट लिंकेज एक ऐसा मैकेनिकल और हाइड्रोलिक सिस्टम है, जो ट्रैक्टर को कृषि उपकरणों से मजबूती से जोड़ता है. इसे “3-पॉइंट” इसलिए कहा जाता है क्योंकि इसमें तीन कनेक्शन पॉइंट होते हैं, जो मिलकर त्रिकोण का आकार बनाते हैं.

यह त्रिकोणीय संरचना उपकरण को स्थिरता देती है और काम करते समय उसे हिलने-डुलने से बचाती है. इस सिस्टम को ट्रैक्टर के हाइड्रोलिक पंप से चलाया जाता है, जिससे किसान ट्रैक्टर पर बैठे-बैठे उपकरण को ऊपर-नीचे कर सकते हैं या उसका एंगल बदल सकते हैं.

3-पॉइंट लिंकेज के मुख्य हिस्से

इस सिस्टम के कुछ जरूरी भाग होते हैं, जो मिलकर इसे प्रभावी बनाते हैं. सबसे ऊपर होता है टॉप लिंक. यह उपकरण के झुकाव और एंगल को नियंत्रित करता है. इसकी मदद से किसान तय कर सकते हैं कि हल या अन्य उपकरण कितनी गहराई तक मिट्टी में जाएगा. इसके नीचे दोनों तरफ लोअर लिंक लगे होते हैं. ये उपकरण को सहारा देते हैं और उसे उठाने-गिराने में मदद करते हैं.

पूरा सिस्टम ट्रैक्टर के हाइड्रोलिक लिफ्ट से जुड़ा होता है. जब किसान लीवर चलाते हैं, तो हाइड्रोलिक दबाव के कारण उपकरण ऊपर उठ जाता है या नीचे चला जाता है. लिफ्ट रॉड और चेक चेन जैसे हिस्से उपकरण को स्थिर रखते हैं, ताकि काम करते समय वह ज्यादा हिले नहीं.

कैसे काम करता है यह सिस्टम?

जब कोई कृषि उपकरण जैसे हल, रोटावेटर, कल्टीवेटर या सीड ड्रिल ट्रैक्टर से जोड़ा जाता है, तो उसे इन तीन बिंदुओं पर फिक्स किया जाता है. इससे उपकरण मजबूत पकड़ में रहता है.

ट्रैक्टर का हाइड्रोलिक सिस्टम तेल के दबाव से काम करता है. जैसे ही किसान कंट्रोल लीवर चलाता है, हाइड्रोलिक सिलेंडर सक्रिय हो जाता है और लोअर लिंक ऊपर या नीचे हो जाते हैं. इससे उपकरण की ऊंचाई बदल जाती है.

टॉप लिंक की लंबाई कम या ज्यादा करके उपकरण का झुकाव बदला जा सकता है. यह सुविधा जुताई और बुवाई के समय बहुत काम आती है, क्योंकि सही गहराई पर काम करना फसल की अच्छी पैदावार के लिए जरूरी होता है.

खेती में 3-पॉइंट लिंकेज के बड़े फायदे

3-पॉइंट लिंकेज सिस्टम ट्रैक्टर को बहुउपयोगी बनाता है. एक ही ट्रैक्टर से किसान जुताई, बुवाई, खाद डालना, निराई-गुड़ाई और अन्य काम कर सकते हैं. इससे अलग-अलग मशीनों की जरूरत कम हो जाती है.

इस तकनीक से काम तेजी से पूरा होता है. उपकरण बदलना आसान होता है, जिससे समय की बचत होती है. सही गहराई और कोण बनाए रखने से फसल की गुणवत्ता बेहतर होती है और उत्पादन बढ़ता है.

मिट्टी संरक्षण में भी यह सिस्टम मददगार है. उपकरण को नियंत्रित तरीके से चलाने से मिट्टी की ऊपरी परत सुरक्षित रहती है और अनावश्यक दबाव नहीं पड़ता. कम मेहनत में ज्यादा काम होने से किसान की लागत घटती है और मुनाफा बढ़ता है.

किन बातों का रखें ध्यान

हालांकि यह सिस्टम बेहद उपयोगी है, लेकिन इसके सही इस्तेमाल के लिए कुछ सावधानियां जरूरी हैं. हर उपकरण हर ट्रैक्टर में फिट नहीं होता, इसलिए संगतता की जांच जरूरी है.

हाइड्रोलिक सिस्टम और लिंकेज के हिस्सों की नियमित जांच और ग्रीसिंग करनी चाहिए. तेल का स्तर सही होना भी जरूरी है, वरना सिस्टम ठीक से काम नहीं करेगा. सही प्रशिक्षण और जानकारी के बिना उपकरण की गहराई गलत सेट हो सकती है, जिससे फसल या मिट्टी को नुकसान हो सकता है.

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