PM Kisan Scheme: उत्तर प्रदेश सरकार पीएम-किसान योजना के करीब 29.74 लाख लाभार्थियों का सत्यापन कर रही है. केंद्र सरकार ने इन मामलों में डुप्लीकेट दावों और अपात्र लोगों को लेकर संदेह जताया था. जांच के दायरे में ऐसे मामले शामिल हैं, जहां पति-पत्नी दोनों ने लाभ लिया, जमीन के पुराने और नए मालिक दोनों को किस्त मिल रही है, या फिर अन्य अपात्र लोग योजना का फायदा उठा रहे हैं. दूसरी ओर, कई लाभार्थियों ने खुद स्वीकार किया कि वे कानूनी रूप से पात्र नहीं थे और स्वेच्छा से 100 करोड़ रुपये से ज्यादा की राशि सरकार को वापस कर दी है.
प्रधानमंत्री किसान सम्मान निधि (PM-KISAN) योजना की शुरुआत फरवरी 2019 में उत्तर प्रदेश से हुई थी. इस योजना के तहत पात्र किसान परिवारों को हर साल 6,000 रुपये की सहायता दी जाती है, जो 2,000 रुपये की तीन बराबर किस्तों में सीधे उनके बैंक खाते में भेजी जाती है. नवंबर 2025 में प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी द्वारा जारी की गई 21वीं किस्त तक, उत्तर प्रदेश के 2.15 करोड़ से ज्यादा किसानों को कुल 90,354.32 करोड़ रुपये की राशि ट्रांसफर की जा चुकी है. शुरुआत में यह योजना सिर्फ छोटे और सीमांत किसानों के लिए थी, लेकिन बाद में इसे सभी किसानों के लिए बढ़ा दिया गया.
योजना के नियमों के अनुसार नाबालिग पात्र नहीं होते
होली से पहले पीएम-किसान की 22वीं किस्त जारी होने की उम्मीद है. इसी बीच केंद्र सरकार के आधिकारिक आंकड़ों में कई गड़बड़ियां सामने आई हैं. डेटा के मुताबिक 11,07,498 मामलों को ‘संदिग्ध पति-पत्नी’ श्रेणी में चिन्हित किया गया है. इनमें एक ही जमीन वाले परिवार से पति और पत्नी दोनों के लाभ लेने का शक है. इसके अलावा 33,466 मामले ऐसे हैं, जहां नाबालिगों के नाम पर किस्त ली जा रही है, जबकि योजना के नियमों के अनुसार नाबालिग पात्र नहीं होते.
29,73,995 लाभार्थियों को सत्यापन के लिए चिन्हित किया गया
सबसे ज्यादा 12,30,192 मामले अमान्य पूर्व भूमि स्वामी के रूप में चिन्हित किए गए हैं. ये वे मामले हैं, जहां जमीन बेचने या ट्रांसफर करने के बाद भी पुराने मालिक के खाते में किस्त आने का संदेह है. वहीं 3,10,931 मामलों में जमीन के ट्रांसफर के बाद पुराने और नए दोनों मालिकों के एक ही जमीन के आधार पर लाभ लेने की आशंका जताई गई है. इसके अलावा 2,91,908 मामले ऐसे हैं, जिनमें जमीन का नामांतरण (म्यूटेशन) विरासत के अलावा अन्य कारणों से हुआ है. विरासत के मामलों में कानूनी वारिस को पात्रता मिल सकती है, लेकिन बिक्री, उपहार, बंटवारे या अन्य कारणों से हुए नामांतरण में पात्रता बदल सकती है. इसलिए ऐसे मामलों को भी जांच के लिए चिन्हित किया गया है. कुल मिलाकर प्रदेश में 29,73,995 लाभार्थियों को सत्यापन के लिए चिन्हित किया गया है. केंद्र सरकार के निर्देश के बाद राज्य के कृषि और राजस्व विभाग इन लाभार्थियों की पात्रता की जांच कर रहे हैं.