मौसम बदलते ही पशुपालक अपनाएं ये जरूरी उपाय, पशु रहेंगे स्वस्थ और उत्पादन बढ़ेगा

फरवरी के बदलते मौसम में पशुओं की देखभाल करना बहुत जरूरी होता है. संतुलित आहार, साफ पानी और सही प्रबंधन से पशु स्वस्थ रहते हैं और दूध, अंडा तथा प्रजनन उत्पादन बेहतर होता है. छोटी सावधानियां अपनाकर पशुपालक नुकसान से बच सकते हैं और पशुपालन को लाभदायक बना सकते हैं.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 15 Feb, 2026 | 10:22 PM

Livestock Care:  फरवरी का महीना मौसम के बदलाव का समय होता है. सर्दी धीरे-धीरे कम होने लगती है और गर्मी की शुरुआत महसूस होने लगती है. इस बदलते मौसम का असर पशुओं की सेहत और उत्पादन दोनों पर पड़ सकता है. अगर इस समय सही देखभाल न की जाए, तो पशु कमजोर पड़ सकते हैं और दूध या अंडा उत्पादन भी कम हो सकता है. लेकिन थोड़ी-सी सावधानी और सही प्रबंधन से पशुओं को स्वस्थ रखा जा सकता है और उनकी उत्पादकता भी बढ़ाई जा सकती है. यही कारण है कि पशुपालकों के लिए फरवरी का महीना खास माना जाता है.

डेयरी पशुओं के लिए पोषण और धूप जरूरी

फरवरी में गाय और भैंस जैसे दुधारू पशुओं को संतुलित आहार देना बहुत जरूरी होता है. उनके भोजन में खनिज मिश्रण शामिल करना चाहिए, जिससे दूध उत्पादन में सुधार होता है और पशु स्वस्थ रहते हैं. कैल्शियम, फास्फोरस और मैग्नीशियम जैसे पोषक तत्व पशुओं की ताकत बढ़ाते हैं. गर्भवती और दूध  देने वाले पशुओं को खास देखभाल की जरूरत होती है. उन्हें दिन में थोड़ी देर धूप में रखना फायदेमंद होता है. पशुशाला को साफ और हवादार रखना चाहिए. फर्श पर सूखा भूसा बिछाने से पशु आराम से रहते हैं और बीमारी का खतरा कम होता है.

भेड़-बकरी पालन में प्रजनन का सही समय

फरवरी का महीना भेड़ और बकरी पालन  के लिए प्रजनन के लिहाज से अच्छा माना जाता है. इस समय उन्हें पौष्टिक और ऊर्जा से भरपूर आहार देना चाहिए. इसे फ्लशिंग कहा जाता है, जिससे प्रजनन क्षमता बेहतर होती है और स्वस्थ बच्चों का जन्म होता है. एक साल से ज्यादा उम्र के बकरों और बकरियों को संतुलित आहार देना जरूरी है. इससे उनका शरीर मजबूत रहता है और प्रजनन दर में सुधार होता है. साफ-सफाई और सही देखभाल से पशुओं का विकास भी अच्छा होता है.

मुर्गी और खरगोश पालन में रखें खास ध्यान

मुर्गी पालन  में पानी की साफ-सफाई का विशेष ध्यान रखना चाहिए. साफ पानी देने से बीमारियों का खतरा कम होता है और अंडा उत्पादन बेहतर होता है. अंडे देने वाली मुर्गियों के भोजन में शेल ग्रिट मिलाना फायदेमंद होता है. चूजों को शुरुआती दिनों में गर्म वातावरण की जरूरत होती है. इसलिए उन्हें सही तापमान में रखना जरूरी है. खरगोश पालन के लिए भी फरवरी का मौसम अच्छा माना जाता है. इस समय प्रजनन आसान होता है और स्वस्थ बच्चे पैदा होते हैं. खरगोशों को साफ वातावरण और संतुलित आहार देना जरूरी है.

मछली और सूअर पालन में भी जरूरी है देखभाल

सूअर पालन  में शेड की सफाई बहुत जरूरी है. ठंड से बचाने के लिए पुआल बिछाया जा सकता है और छोटे पिगलेट को गर्म रखने के लिए बल्ब लगाया जा सकता है. मछली पालन करने वाले किसानों को तालाब की देखभाल करनी चाहिए. तालाब के आसपास छायादार पेड़ लगाने से पानी का तापमान संतुलित रहता है. फरवरी के अंत से मछलियों को नियमित चारा देना शुरू किया जा सकता है. सही मात्रा में चारा देने से मछलियों की वृद्धि तेजी से होती है और उत्पादन बेहतर होता है.

कृमिनाशन और सावधानियां जरूरी

फरवरी से अप्रैल तक कई परजीवी संक्रमण पशुओं में देखने को मिलते हैं. इसलिए समय-समय पर कृमिनाशक दवाएं देना जरूरी है. पशुओं को तालाब या पानी वाले इलाकों के पास चरने से बचाना चाहिए. गौशाला की सफाई और कीट नियंत्रण भी जरूरी है. टिक्स और माइट्स से बचाव के लिए पशुओं और शेड में दवा का छिड़काव किया जा सकता है. एक और जरूरी बात यह है कि पशुओं को सुबह-सुबह ओस लगी घास पर नहीं चराना चाहिए.

गीली घास खाने से पेट से जुड़ी समस्याएं हो सकती हैं. इसलिए धूप निकलने के बाद ही पशुओं को चरने  देना बेहतर होता है. अगर पशुपालक इन छोटी-छोटी बातों का ध्यान रखें, तो फरवरी के मौसम में भी पशु स्वस्थ रहेंगे और दूध, अंडा या अन्य उत्पादन पर कोई बुरा असर नहीं पड़ेगा. सही देखभाल से पशुपालन का काम आसान और ज्यादा लाभदायक बन सकता है.

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Published: 15 Feb, 2026 | 10:22 PM

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