Food Processing Subsidy: देश में छोटे फूड प्रोसेसिंग कारोबार को बढ़ावा देने के लिए केंद्र सरकार की प्रधानमंत्री सूक्ष्म खाद्य उद्योग उन्नयन योजना (PMFME) लगातार अच्छे नतीजे दे रही है. केंद्रीय खाद्य प्रसंस्करण (Food Processing) उद्योग मंत्री चिराग पासवान ने बताया कि, योजना शुरू होने के बाद से अब तक 2 लाख से अधिकछोटे कारोबार करने वाले लोगों को क्रेडिट-लिंक्ड सब्सिडी दी जा चुकी है. इस मदद से देशभर में हजारों नए फूड प्रोसेसिंग यूनिट शुरू हुए हैं और रोजगार के नए अवसर भी बने हैं.
20,300 करोड़ रुपये का निवेश हुआ
चिराग पासवान के मुताबिक, साल 2020 में शुरू हुई इस योजना के तहत अब तक करीब 20,300 करोड़ रुपये का निवेश हुआ है. सरकार ने लाभार्थियों को लगभग 6,000 करोड़ रुपये की सब्सिडी भी दी है. इस निवेश से छोटे स्तर पर खाद्य प्रसंस्करण इकाइयों की संख्या बढ़ी है और ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर मजबूत हुए हैं. मंत्री ने बताया कि, PMFME योजना के जरिए अब तक करीब 11 लाख प्रत्यक्ष और अप्रत्यक्ष रोजगार के अवसर पैदा हुए हैं. खास बात यह है कि इस योजना से जुड़े लगभग 90 फीसदी लाभार्थी पहली बार अपना कारोबार शुरू करने वाले उद्यमी हैं.
महिलाओं की भागीदारी भी बढ़ी
योजना में महिलाओं की भागीदारी भी काफी अच्छी रही है. अब तक 44 फीसदी लाभार्थी महिलाएं हैं. इसके अलावा 75 हजार से ज्यादा उद्यम उद्यम आधार (Udyam), एफएसएसएआई (FSSAI), जीएसटी (GST) और अन्य जरूरी रेजिस्ट्रेशन कराकर औपचारिक कारोबार का हिस्सा बन चुके हैं. इससे छोटे कारोबारियों को बाजार और सरकारी योजनाओं का ज्यादा लाभ मिलने लगा है.
स्वयं सहायता समूहों को भी मिला सहारा
PMFME योजना के तहत 4.18 लाख से ज्यादा स्वयं सहायता समूह (SHG) के सदस्यों को सीड कैपिटल की मदद दी गई है. वहीं देश के 27 राज्यों और केंद्र शासित प्रदेशों में 80 कॉमन इन्क्यूबेशन सेंटर मंजूर किए गए हैं, जिनमें से 32 सेंटर शुरू भी हो चुके हैं.
योजना के तहत अब तक 1.76 लाख से अधिक लोगों को प्रशिक्षण दिया गया है, जिनमें करीब 77 फीसदी महिलाएं शामिल हैं. इससे महिलाओं को भी अपना व्यवसाय शुरू करने का अवसर मिला है.
PMFME 2.0 लाने की तैयारी
चिराग पासवान ने बताया कि, PMFME योजना को सितंबर 2026 तक बढ़ा दिया गया है. सरकार अब PMFME 2.0 शुरू करने पर भी विचार कर रही है. नए संस्करण में कुछ बदलाव किए जा सकते हैं ताकि इस क्षेत्र में और अधिक निवेश आए और ज्यादा लोगों को इसका फायदा मिल सके. उन्होंने इस मौके पर झारखंड के रांची के इंदरजीत सिंह, जो योजना के 2 लाखवें लाभार्थी बने हैं, को स्वीकृति पत्र और प्रमाणपत्र भी सौंपा. मंत्री ने बिहार, महाराष्ट्र, उत्तर प्रदेश, तमिलनाडु और मध्य प्रदेश जैसे राज्यों के बेहतर प्रदर्शन की भी सराहना की.
सरकार का मानना है कि यह योजना ग्रामीण क्षेत्रों में छोटे खाद्य उद्योगों को मजबूत करने, किसानों की आय बढ़ाने और स्थानीय स्तर पर रोजगार पैदा करने में अहम भूमिका निभा रही है.