Sugarcane Cultivation: बिहार सरकार ने गन्ना किसानों के लिए दो नई योजनाएं शुरू करने का फैसला किया है. इन योजनाओं के तहत किसानों को गन्ने के बीज उत्पादन पर अधिक सब्सिडी और कृषि मशीनों की खरीद के लिए आर्थिक सहायता मिलेगी. सरकार का कहना है कि इससे गन्ने की खेती की लागत कम होगी, उत्पादन बढ़ेगा और किसानों की आय में सुधार होगा.
चीनी मंडी की रिपोर्ट के मुताबिक, बिहार सरकार की बीज विकास योजना के तहत प्रमाणित गन्ना बीज तैयार करने वाले किसानों को आर्थिक सहायता दी जाएगी. सामान्य वर्ग के किसानों को 260 रुपये प्रति क्विंटल, जबकि अनुसूचित जाति (SC) और अनुसूचित जनजाति (ST) के किसानों को 310 रुपये प्रति क्विंटल की सब्सिडी मिलेगी. इसके अलावा, आधार बीज (फाउंडेशन सीड) उत्पादन करने वाले किसानों को प्रति हेक्टेयर 70,000 रुपये तक की वित्तीय सहायता भी प्रदान की जाएगी. सरकार का उद्देश्य बेहतर गुणवत्ता वाले बीजों का उत्पादन बढ़ाकर गन्ने की पैदावार में सुधार करना है.
किसानों को प्रति हेक्टेयर 2.50 लाख रुपये तक का प्रोत्साहन मिलेगा
वहीं, ब्रीडर सीड (मूल बीज) का उत्पादन पूसा स्थित गन्ना अनुसंधान संस्थान और लखनऊ के भारतीय गन्ना अनुसंधान संस्थान के मोतीपुर केंद्र के सहयोग से किया जाएगा. ब्रीडर सीड उत्पादन से जुड़े किसानों को प्रति हेक्टेयर 2.50 लाख रुपये तक का प्रोत्साहन अनुदान दिया जाएगा. सरकार का मानना है कि इससे बेहतर गुणवत्ता वाले गन्ना बीज उपलब्ध होंगे और उत्पादन बढ़ाने में मदद मिलेगी. बिहार सरकार गन्ने की खेती में आधुनिक तकनीकों को बढ़ावा देने के लिए किसानों को विशेष सहायता देगी. खेती की लागत कम करने और उत्पादन बढ़ाने के उद्देश्य से सिंगल बड प्लांटिंग तकनीक को प्रोत्साहित किया जाएगा. इस तकनीक को अपनाने वाले किसानों को प्रति एकड़ 15,000 रुपये तक की विशेष सब्सिडी मिलेगी. सत्यापित (वेरिफाइड) बीजों को भी प्रमाणित बीजों के बराबर सब्सिडी का लाभ दिया जाएगा.
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गन्ना यंत्रीकरण योजना के लिए 34.60 करोड़ का बजट
गन्ना यंत्रीकरण योजना के लिए वित्त वर्ष 2026-27 में 34.60 करोड़ रुपये का बजट निर्धारित किया गया है. योजना के तहत राज्य में 3,218 कृषि मशीनों का वितरण किया जाएगा और 80 मशीनरी बैंक स्थापित किए जाएंगे. सामान्य वर्ग के किसानों को कृषि उपकरणों की खरीद पर 40 फीसदी सब्सिडी मिलेगी, जबकि अनुसूचित जाति (SC), अनुसूचित जनजाति (ST) और अत्यंत पिछड़ा वर्ग (EBC) के किसानों को 50 फीसदी तक अनुदान दिया जाएगा. इसके अलावा, फसल अवशेष प्रबंधन (क्रॉप रेजिड्यू मैनेजमेंट) से जुड़े उपकरणों पर 75 फीसदी, बीज उपचार मशीनों पर 80 फीसदी तक सब्सिडी दी जाएगी. मशीनरी बैंक स्थापित करने के लिए किसानों और समूहों को 8 लाख रुपये तक की वित्तीय सहायता भी प्रदान की जाएगी. सरकार का मानना है कि इन योजनाओं से गन्ना खेती अधिक आधुनिक, किफायती और लाभकारी बनेगी.
समय पर भुगतान सुनिश्चित होगा
बीज विकास योजना के लिए किसान केन केयर (Cane Care) पोर्टल पर आवेदन कर सकते हैं, जबकि गन्ना यंत्रीकरण योजना के लिए आवेदन कृषि विभाग के डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) पोर्टल के माध्यम से किए जाएंगे. सरकार ने स्पष्ट किया है कि दोनों योजनाओं के तहत मिलने वाली सब्सिडी की राशि सीधे किसानों के बैंक खातों में डीबीटी (DBT) के जरिए भेजी जाएगी. इससे लाभार्थियों को पारदर्शी और समय पर भुगतान सुनिश्चित किया जा सकेगा. सरकार का मानना है कि इन योजनाओं से अधिक से अधिक किसान आधुनिक तकनीकों को अपनाएंगे और गन्ने की खेती को अधिक लाभकारी बना सकें.