Andhra Pradesh News: आंध्र प्रदेश के तोतापुरी आम उत्पादक किसानों को बड़ी राहत मिली है. केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने तोतापुरी आम के लिए मार्केट इंटरवेंशन स्कीम (MIS) के तहत प्राइस डेफिशिएंसी पेमेंट (PDP) योजना को मंजूरी दे दी है. यह फैसला रायलसीमा क्षेत्र में आम की कीमतों में भारी गिरावट के बाद लिया गया है. यानी अब तोतापुरी आम की सरकारी खरीद होगी. सरकार को उम्मीद है कि अब किसानों को उनके उत्पाद का बेहतर रेट मिलेगा. इससे उन्हें मुनाफा होगा. खास बात यह है कि किसानों को MIP 1747 रुपये क्विंटल मिलेगा
कृषि मंत्रालय द्वारा 1 जुलाई 2026 को जारी आदेश के अनुसार, 2026-27 विपणन सीजन के लिए तोतापुरी आम का बाजार हस्तक्षेप मूल्य (MIP) 1,747 रुपये प्रति क्विंटल यानी 17.47 रुपये प्रति किलोग्राम तय किया गया है. योजना के तहत राज्य के अनुमानित कुल उत्पादन के 25 प्रतिशत हिस्से, यानी 2.16 लाख मीट्रिक टन आम को शामिल किया जाएगा. इस योजना पर आने वाले खर्च का वहन केंद्र और राज्य सरकार 50:50 के अनुपात में मिलकर करेंगी.
प्रभावित आम किसानों को आर्थिक राहत मिलेगी
द न्यू इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, सरकार का मानना है कि इस फैसले से बाजार में कीमतों में गिरावट से प्रभावित आम किसानों को आर्थिक राहत मिलेगी और उन्हें अपनी उपज का बेहतर मूल्य प्राप्त हो सकेगा. केंद्र सरकार की ओर से जारी दिशा-निर्देशों के अनुसार, प्राइस डेफिशिएंसी पेमेंट (PDP) के तहत किसानों को मिलने वाली सहायता राशि बाजार हस्तक्षेप मूल्य (MIP) के 25 प्रतिशत से अधिक नहीं होगी. इसका मतलब है कि किसानों को अधिकतम 436.75 रुपये प्रति क्विंटल तक की कीमत अंतर सहायता मिल सकेगी.
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सरकार ने इस योजना के संचालन के लिए एक महीने की समय सीमा तय की है. यह अवधि योजना के तहत पहली खरीद-बिक्री होने की तारीख से शुरू होगी. दिशानिर्देशों के मुताबिक, किसानों को मूल्य अंतर की राशि सीधे देने के लिए राज्य सरकार को पहले से आवश्यक धनराशि की व्यवस्था करनी होगी. इसके बाद पात्र किसानों को योजना का लाभ दिया जाएगा.
किसानों को APMC के माध्यम से उपज बेचनी होगी
तोतापुरी आम किसानों के लिए राहत योजना लागू करने के लिए अब राज्य स्तर पर कृषि और बागवानी विभाग के प्रमुख सचिव की अध्यक्षता में एक उच्च स्तरीय समिति स्थानीय बिक्री मूल्य तय करेगी. योजना का लाभ लेने के लिए किसानों को अपनी उपज अधिसूचित एपीएमसी मंडियों (APMC) के माध्यम से ही बेचनी होगी. सरकार ने पारदर्शिता सुनिश्चित करने के लिए किसानों को मिलने वाली मूल्य अंतर सहायता राशि सीधे आधार-सक्षम डायरेक्ट बेनिफिट ट्रांसफर (DBT) या सत्यापित बैंक खातों में भेजने का फैसला किया है. इससे बिचौलियों की भूमिका खत्म होगी और राशि सीधे किसानों तक पहुंचेगी. दिशानिर्देशों के अनुसार, राज्य सरकार को रोजाना मंडियों में आने वाले आम की मात्रा और उसके बाजार भाव की जानकारी केंद्रीय पोर्टल पर अपलोड करनी होगी. इसके बाद केंद्रीय कॉस्टिंग सेल द्वारा खातों की जांच और ऑडिट किए जाने पर ही केंद्र सरकार अपनी हिस्सेदारी की राशि जारी करेगी.