Bihar Sugar Mill: बिहार सरकार ने राज्य के गन्ना और चीनी उद्योग को नई रफ्तार देने के लिए कई बड़े फैसले किए हैं. गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार ने बताया कि मुख्यमंत्री सम्राट चौधरी ने बंद पड़ी चीनी मिलों को दोबारा शुरू करने और नई शुगरकेन नीति को मंजूरी दे दी है. सरकार अब चीनी मिलों को आधुनिक मॉडल कॉम्प्लेक्स के रूप में विकसित करेगी. इस योजना के तहत चीनी के साथ-साथ एथेनॉल, कंप्रेस्ड बायोगैस (CBG) और बिजली का भी उत्पादन किया जाएगा. सरकार का दावा है कि इस तरह का मॉडल अपनाने वाला बिहार देश का पहला राज्य बनेगा.
देश का पहला मॉडल कॉम्प्लेक्स
गन्ना उद्योग मंत्री संजय कुमार के अनुसार, नई नीति के तहत चीनी मिलों को केवल चीनी उत्पादन तक सीमित नहीं रखा जाएगा. अब मिल परिसर में ही एथेनॉल, सीबीजी (CBG) और बिजली का उत्पादन भी किया जाएगा. इससे गन्ने का बेहतर उपयोग होगा और किसानों के साथ-साथ उद्योगों को भी फायदा मिलेगा. सरकार का मानना है कि इस मॉडल से ऊर्जा उत्पादन बढ़ेगा, रोजगार के नए अवसर बनेंगे और राज्य की औद्योगिक गतिविधियों को मजबूती मिलेगी.
बंद चीनी मिलों को फिर से शुरू करने की तैयारी
राज्य में कई वर्षों से बंद पड़ी चीनी मिलों को दोबारा चालू करने का फैसला भी सरकार ने लिया है. मंत्री ने बताया कि इस साल के अंत तक कम से कम पांच चीनी मिलों के पुनरुद्धार या संचालन की प्रक्रिया शुरू होने की उम्मीद है. सरकार का लक्ष्य है कि बंद मिलों को आधुनिक तकनीक के साथ फिर से चालू किया जाए, ताकि गन्ना किसानों को अपनी फसल बेचने के लिए बेहतर सुविधाएं मिल सकें. इससे स्थानीय स्तर पर रोजगार भी बढ़ेगा और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती मिलेगी.
नई शुगरकेन नीति से निवेशकों को बड़ा फायदा
नई शुगरकेन नीति के तहत सरकार निवेशकों को आकर्षित करने के लिए कई विशेष सुविधाएं दे रही है. चीनी मिल लगाने के लिए जमीन 30 साल की लीज पर दी जाएगी और इसके बदले केवल 1 रुपये की टोकन राशि ली जाएगी. इसके अलावा नई चीनी मिल स्थापित करने पर सरकार 70 करोड़ रुपये तक की वित्तीय सहायता भी देगी. यह सहायता पांच किस्तों में उपलब्ध कराई जाएगी. यदि कोई निवेशक मिल की क्षमता बढ़ाता है तो अतिरिक्त उत्पादन क्षमता के आधार पर भी आर्थिक मदद मिलेगी.
जमीन से लेकर निवेश तक सरकार देगी पूरी मदद
सरकार ने निवेशकों का शुरुआती खर्च कम करने के लिए भूमि पंजीकरण शुल्क की 100 प्रतिशत प्रतिपूर्ति करने का भी फैसला लिया है. यानी नई चीनी मिल स्थापित करने या मौजूदा मिलों का विस्तार करने के लिए खरीदी गई जमीन पर लगने वाला रजिस्ट्रेशन शुल्क सरकार वापस करेगी. सरकार का मानना है कि इन फैसलों से राज्य में नए निवेश आएंगे, चीनी उद्योग को नई पहचान मिलेगी और गन्ना किसानों को अपनी उपज का बेहतर बाजार उपलब्ध होगा. नई नीति से कृषि और उद्योग दोनों क्षेत्रों को लाभ मिलने की उम्मीद जताई जा रही है.