महाराष्ट्र में जमीन बंटवारे पर मिली राहत, अब किसानों को नहीं देना होगा पंजीकरण शुल्क

महाराष्ट्र सरकार ने पैतृक कृषि भूमि के बंटवारे पर पंजीकरण शुल्क पूरी तरह खत्म कर दिया है. अब परिवार के सदस्य आपसी सहमति से जमीन का बंटवारा बिना किसी खर्च के करा सकेंगे. ये नियम तहसीलदार और उप-पंजीयक दोनों कार्यालयों पर लागू होगा, जिससे किसानों और आम लोगों को बड़ी राहत मिलेगी.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 21 Apr, 2026 | 11:59 AM

Registration Fee Waiver: किसानों और आम लोगों के लिए बड़ी राहत की खबर है. अब पैतृक कृषि जमीन के बंटवारे पर पंजीकरण शुल्क पूरी तरह खत्म कर दिया गया है. महाराष्ट्र सरकार के इस फैसले से लाखों लोगों को सीधा फायदा मिलेगा और जमीन का बंटवारा अब पहले से ज्यादा आसान और सस्ता हो जाएगा.

पंजीकरण शुल्क में छूट का दायरा बढ़ा

महाराष्ट्र सरकार (Maharashtra Government) ने कृषि भूमि के बंटवारे पर पंजीकरण शुल्क  पूरी तरह माफ कर दिया है. पहले यह सुविधा सिर्फ कुछ मामलों तक सीमित थी, जैसे तहसीलदार के जरिए धारा 85 के तहत होने वाले बंटवारे. लेकिन अब नियम में बड़ा बदलाव किया गया है. अब अगर परिवार के सदस्य आपसी सहमति से सीधे उप-पंजीयक (सब-रजिस्ट्रार) कार्यालय में बंटवारा कराते हैं, तो भी उन्हें कोई शुल्क नहीं देना होगा. ये फैसला उन सभी मामलों पर लागू होगा, जहां जमीन पैतृक है और बंटवारा परिवार के सदस्यों के बीच आपसी सहमति से किया जा रहा है. इससे लोगों को हर स्तर पर समान राहत मिलेगी.

मुख्यमंत्री के निर्देश पर लिया गया बड़ा फैसला

महाराष्ट्र सरकार के अनुसार ये कदम मुख्यमंत्री देवेंद्र फडणवीस (Devendra Fadnavis) के निर्देश पर उठाया गया है. राजस्व विभाग ने इस संबंध में आधिकारिक सूचना जारी किया है, जिसमें साफ कहा गया है कि परिवार के सदस्यों के बीच जमीन के बंटवारे पर किसी भी तरह का पंजीकरण शुल्क नहीं लिया जाएगा. चाहे बंटवारा तहसीलदार के माध्यम से हो या सीधे उप-पंजीयक कार्यालय में रजिस्ट्रेशन कराया  जाए, दोनों ही मामलों में यह छूट लागू होगी. इससे पहले अलग-अलग जगहों पर अलग नियम होने के कारण लोगों में भ्रम की स्थिति बनी रहती थी, जिसे अब खत्म कर दिया गया है.

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सरकार के फैसले से जमीन बंटवारा हुआ आसान और सस्ता.

पुराने नियम में क्या थी समस्या

पहले जारी नियमों के अनुसार केवल तहसीलदार के जरिए धारा 85 के तहत होने वाले बंटवारे पर ही शुल्क माफ था. लेकिन कई लोग सीधे उप-पंजीयक कार्यालय में जाकर बंटवारा पंजीकृत करवा रहे थे, जहां उनसे पंजीकरण शुल्क लिया जा रहा था. नियम स्पष्ट न होने के कारण किसानों और आम लोगों को अतिरिक्त खर्च उठाना पड़ता था. इससे आर्थिक बोझ  बढ़ता था और कई मामलों में विवाद भी खड़े हो जाते थे. अब सरकार ने इस स्थिति को साफ करते हुए नया स्पष्टीकरण जारी कर दिया है, जिससे हर जगह एक समान नियम लागू हो गया है.

किसानों और आम जनता को क्या मिलेगा फायदा

इस फैसले से किसानों और आम लोगों  को सीधा आर्थिक लाभ मिलेगा. अब जमीन के बंटवारे में एक रुपया भी पंजीकरण शुल्क नहीं देना होगा, जिससे खर्च काफी कम हो जाएगा. इसके साथ ही यह कदम जमीन से जुड़े विवादों को कम करने में भी मदद करेगा. परिवार के लोग अब आसानी से आपसी सहमति से बंटवारा कर पाएंगे और उसे कानूनी रूप दे सकेंगे. इससे पारिवारिक झगड़े कम होंगे और प्रक्रिया भी तेज होगी. सरकार का उद्देश्य है कि ज्यादा से ज्यादा लोग कानूनी तरीके से बंटवारा करें और किसी भी तरह की परेशानी या भ्रम की स्थिति न बने. इस फैसले से राज्य के लाखों किसानों और परिवारों को राहत मिलने की उम्मीद है.

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