बिहार के गन्ना किसानों के लिए बड़ी सौगात, बंद पड़ी रैयाम और सकरी चीनी मिलों को फिर से शुरू करने की तैयारी

Bihar Sugar Mill Revival: बिहार सरकार बंद पड़ी रैयाम और सकरी चीनी मिलों को फिर से शुरू करने की तैयारी कर रही है. इन मिलों को सहकारी मॉडल के तहत चलाया जाएगा, जिसमें स्थानीय गन्ना किसान भी सदस्य बनकर भागीदार होंगे. दरभंगा और मधुबनी के 2401 गाँव इस योजना से जुड़े हैं.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 18 Jun, 2026 | 04:27 PM

Bihar Cooperative Sugar Mills: बिहार के गन्ना किसानों के लिए राहत भरी खबर सामने आई है. राज्य में लंबे समय से बंद पड़ी रैयाम और सकरी चीनी मिलों को दोबारा शुरू करने की दिशा में तेज़ी से काम हो रहा है. इस बार इन मिलों को सहकारी मॉडल के तहत पुनर्जीवित करने की योजना बनाई गई है, जिससे स्थानीय किसानों की सीधी भागीदारी सुनिश्चित हो सके.

दरभंगा और मधुबनी जिलों में इसके लिए प्राथमिक चीनी मिल सहकारी समितियों के गठन को मंजूरी दे दी गई है. इन समितियों में आसपास के गन्ना उत्पादक किसानों को सदस्य बनाया जाएगा, ताकि वे न सिर्फ सप्लायर हों बल्कि मिल के संचालन में भी सक्रिय भूमिका निभा सकें.

सरकार ने तेज की प्रक्रिया, डीपीआर तैयार

सहकारिता विभाग ने इस प्रोजेक्ट पर अब तेजी से काम शुरू कर दिया है और इसे काफी गंभीरता से लिया जा रहा है. हाल ही में सहकारिता मंत्री रामकृपाल यादव ने इस पूरे मामले की समीक्षा की और अधिकारियों को कहा कि सभी जरूरी काम जल्दी पूरे किए जाएं. बैठक में यह भी बताया गया कि रैयाम चीनी मिल की डिटेल प्रोजेक्ट रिपोर्ट (DPR) पहले ही तैयार हो चुकी है. यह रिपोर्ट राष्ट्रीय सहकारी शक्कर कारखाना संघ ने विभाग को सौंप दी है. अब इसी रिपोर्ट के आधार पर आगे की प्रक्रिया पूरी की जाएगी.

2401 गांव होंगे परियोजना से जुड़े

गन्ना उद्योग विभाग ने दोनों चीनी मिलों के लिए क्षेत्र निर्धारण की अधिसूचना भी जारी कर दी है. इसके तहत कुल 2401 गांवों को आरक्षित क्षेत्र में शामिल किया गया है, जहां के किसानों को इस योजना से जोड़ा जाएगा.

रैयाम चीनी मिल क्षेत्र

  • मधुबनी के 438 गांव
  • दरभंगा के 580 गांव

सकरी चीनी मिल क्षेत्र

  • मधुबनी के 686 गांव
  • दरभंगा के 697 गांव

इन सभी गांवों के गन्ना उत्पादकों को सहकारी समितियों के माध्यम से सीधे चीनी मिलों से जोड़ा जाएगा.

किसानों को क्या होंगे बड़े फायदे?

इन चीनी मिलों के दोबारा शुरू होने से क्षेत्र के किसानों को कई स्तर पर लाभ मिलने की उम्मीद है. सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि किसानों को अब अपने गन्ने को दूर नहीं ले जाना पड़ेगा.

  • स्थानीय स्तर पर गन्ने की खरीद आसान होगी
  • परिवहन खर्च में कमी आएगी
  • समय पर भुगतान मिलने की संभावना बढ़ेगी
  • गन्ना उत्पादन को नया प्रोत्साहन मिलेगा
  • ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के अवसर बढ़ेंगे

सरकार का मानना है कि यह पहल न सिर्फ किसानों की आय बढ़ाएगी, बल्कि पूरे ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूती देगी.

सदस्य बनने के नियम तय

सहकारी समितियों में शामिल होने के लिए कुछ नियम भी निर्धारित किए गए हैं.

  • सामान्य किसानों के लिए कम से कम 100 डिसमिल भूमि पर गन्ना उत्पादन जरूरी
  • SC, ST, OBC, अति पिछड़ा वर्ग और महिला किसानों के लिए यह सीमा 50 डिसमिल रखी गई है
  • सभी किसानों का DBT पोर्टल पर पंजीकरण अनिवार्य होगा
  • प्रवेश शुल्क 500 रुपये तय किया गया है
  • एक शेयर का मूल्य 1000 रुपये रखा गया है

ऑनलाइन पोर्टल से आसान होगी सदस्यता

किसानों की सुविधा के लिए सरकार एक विशेष ऑनलाइन पोर्टल भी तैयार कर रही है. इसके जरिए किसान घर बैठे ही सहकारी समिति की सदस्यता के लिए आवेदन कर सकेंगे. इसके साथ ही पंचायत और गांव स्तर पर जागरूकता अभियान भी चलाया जा रहा है, ताकि ज्यादा से ज्यादा किसान इस योजना से जुड़ सकें और इसका लाभ उठा सकें.

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