Haryana Budget: हरियाणा की बीजेपी सरकार ने विधानसभा में बजट 2026 पेश किया. इस बार का बजट कृषि, पशुपलान और मछली पालन पर फोकस रहा. बजट पेश करते हुए मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कृषि सेक्टर के लिए कई घोषणाएं कीं. लेकिन सबसे ज्यादा कपास और गन्ना किसान खुश हैं. मुख्यमंत्री नायब सिंह सैनी ने कहा कि यह सरकार किसानों की है. इसलिए हमारी पहली प्राथमिकता किसानों की तरक्की है. उन्होंने ऐलान किया कि मेरी सरकार ने धान की जगह दालें, तिलहन और कपास उगाने वाले किसानों को प्रति एकड़ 2,000 रुपये का अतिरिक्त बोनस देने की घोषणा की है. साथ ही राज्य सरकार ने कई योजनाएं के प्रोत्साहन राशि में बढ़ोतरी की है. अब गन्ना की खेती करने पर 2000 रुपये ज्यादा प्रोत्साहन राशि मिलेगी. सरकार को उम्मीद है कि उसके इस फैसले से राज्य में धान के रकबे में गिरावट आएगी और किसान कपास, दलहन और तिलहन फसलों की तरफ रूख करेंगे. इससे भूजल स्तर में भी सुधार होगा.
कृषि बजट के लिए 8,320 करोड़ रुपये का प्रावधान
खास बात यह है कि मुख्यमंत्री ने किसानों को हरियाणा की अर्थव्यवस्था और सामाजिक स्थिरता की रीढ़ बताया. मुख्यमंत्री ने कहा कि सरकार ने कृषि और संबद्ध सेवाओं के लिए 8,320 करोड़ रुपये का प्रावधान किया है, जो पिछले वित्त वर्ष 2025-26 के संशोधित अनुमान 7,651 करोड़ रुपये से अधिक है. बजट में कपास उत्पादन को बढ़ावा देने, फसल विविधीकरण, बागवानी, डेयरी, मत्स्य पालन और जैविक खेती को प्रोत्साहन देने जैसे कई कदम शामिल हैं.
धान की खेती न करने वाले किसानों को मिलेंग 8,000 रुपये
गौरतलब है कि कृषि और इससे जुड़े क्षेत्र हरियाणा की अर्थव्यवस्था का अहम हिस्सा हैं और चालू वित्त वर्ष में राज्य की अर्थव्यवस्था में इनकी हिस्सेदारी 16.9 प्रतिशत रही है. सरकार का कहना है कि इन नई योजनाओं से किसानों और कृषि से जुड़े लोगों की आय बढ़ाने में मदद मिलेगी. मुख्यमंत्री ने किसानों को भरोसा दिलाया कि ‘मेरा पानी-मेरी विरासत योजना’ के तहत धान की खेती न करने वाले किसानों को 8,000 रुपये प्रति एकड़ की प्रोत्साहन राशि पहले की तरह मिलती रहेगी. देसी कपास की खेती को बढ़ावा देने के लिए प्रोत्साहन राशि 3,000 रुपये से बढ़ाकर 4,000 रुपये प्रति एकड़ कर दी गई है. वहीं, पराली प्रबंधन के लिए 1,200 रुपये प्रति एकड़ और डायरेक्ट सीडेड राइस (DSR) अपनाने पर 4,500 रुपये प्रति एकड़ की सब्सिडी जारी रहेगी.
गन्ना की खेती करने पर मिलेगी प्रोत्साहन राशि
सरकार हर जिले से कम से कम 100 किसानों को दूसरे राज्यों में आधुनिक खेती की तकनीक और नए बाजारों की जानकारी लेने के लिए भेजेगी. ‘शुगरकेन टेक्नोलॉजी मिशन’ के तहत चौड़ी कतार में गन्ना लगाने पर प्रोत्साहन राशि 3,000 रुपये से बढ़ाकर 5,000 रुपये प्रति एकड़ की जाएगी. सिंगल-बड तकनीक से गन्ना रोपण पर भी 5,000 रुपये प्रति एकड़ मिलेंगे. सहकारी चीनी मिलें किसानों को हार्वेस्टर उपलब्ध कराएंगी ताकि मजदूरी खर्च कम हो, और टिश्यू कल्चर के पौधे मुफ्त दिए जाएंगे.
प्राकृतिक और जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए सरकार ने बड़ा कदम उठाया है. एपीडा (APEDA) से प्रमाणित किसानों समेत सभी प्रमाणित जैविक किसानों को पांच साल तक हर साल 10,000 रुपये प्रति एकड़ की सहायता दी जाएगी. कृषि विभाग की करीब 800 एकड़ जमीन केवल उन किसानों को लीज पर दी जाएगी, जो कम से कम 10 साल तक जैविक खेती करने के लिए प्रतिबद्ध होंगे. साथ ही, पंचायत की जमीन पर भी जैविक खेती को बढ़ावा देने के लिए अलग नीति लाई जाएगी.
जैविक उत्पादों के प्रमाणन की आधिकारिक संस्था बनाया जाएगा
हरियाणा राज्य बीज प्रमाणीकरण एजेंसी को जैविक उत्पादों के प्रमाणन की आधिकारिक संस्था बनाया जाएगा. प्राकृतिक और जैविक किसानों के लिए पंचकूला, यमुनानगर, करनाल, सोनीपत, रोहतक, गुरुग्राम, फरीदाबाद, हिसार, चरखी दादरी और नारनौल में अलग से बाजार स्थल विकसित किए जाएंगे. इसके अलावा, एपीडा से मान्यता प्राप्त परीक्षण लैब और प्रमाणन केंद्र भी स्थापित किए जाएंगे, ताकि किसानों को बेहतर बाजार और निर्यात के अवसर मिल सकें.