गर्भवती गायों-भैसों की अनदेखी पड़ सकती है भारी, इस चीज की कमी से दूध और सेहत दोनों खतरे में

गर्भवती दुधारू पशुओं की सही देखभाल से नुकसान रोका जा सकता है. संतुलित आहार, कैल्शियम, साफ पानी और सुरक्षित रहन-सहन से पशु स्वस्थ रहता है. समय पर ध्यान देने से प्रसव सुरक्षित होता है और दूध उत्पादन पर बुरा असर नहीं पड़ता, जिससे किसान की आमदनी सुरक्षित रहती है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Updated On: 1 Feb, 2026 | 11:12 AM

Pregnant Cattle : खेती के साथ-साथ पशुपालन आज किसानों की आमदनी का मजबूत सहारा बन चुका है. खासकर दुधारू पशु परिवार की आर्थिक स्थिति सुधारने में बड़ी भूमिका निभाते हैं. लेकिन मुनाफे की इस दौड़ में अगर गर्भवती पशुओं की देखभाल में थोड़ी भी चूक हो जाए, तो फायदा नुकसान में बदल सकता है. गर्भावस्था के समय पशु का शरीर कई तरह के बदलावों से गुजरता है, ऐसे में सही खान-पान और देखभाल न मिलने पर कैल्शियम की कमी, कमजोरी और दूध उत्पादन में गिरावट जैसी समस्याएं सामने आ सकती हैं. इसलिए जरूरी है कि किसान पहले से सतर्क रहें और सही तरीके अपनाएं.

गर्भावस्था में क्यों जरूरी है खास देखभाल

गर्भधारण के दौरान  पशु के शरीर में बच्चे का विकास होता है, जिससे उसे सामान्य दिनों की तुलना में ज्यादा पोषण की जरूरत पड़ती है. इस समय पशु की हड्डियां, मांसपेशियां और आंतरिक अंग अधिक मेहनत करते हैं. अगर सही देखभाल न हो, तो पशु कमजोर पड़ सकता है और प्रसव के समय दिक्कतें आ सकती हैं. कई बार लापरवाही के कारण गर्भपात या पशु की सेहत पर लंबे समय तक असर भी देखा जाता है.

कैल्शियम की कमी से बढ़ता है खतरा

गर्भवती दुधारू पशुओं  में कैल्शियम की कमी एक बड़ी समस्या है. कैल्शियम न केवल हड्डियों को मजबूत करता है, बल्कि बच्चे के विकास और प्रसव के समय भी अहम भूमिका निभाता है. इसकी कमी से पशु उठने-बैठने में परेशानी महसूस करता है, भूख कम हो जाती है और दूध उत्पादन  भी प्रभावित होता है. कई मामलों में प्रसव के बाद पशु अचानक कमजोर होकर गिर भी सकता है. इसलिए समय-समय पर कैल्शियम युक्त आहार देना बेहद जरूरी है.

सही खान-पान से रहेगी सेहत दुरुस्त

गर्भवती पशु को संतुलित आहार देना सबसे अहम कदम है. हरे चारे के साथ-साथ सूखा चारा, भूसा, दाना मिश्रण और मिनरल मिक्सचर  जरूर शामिल करें. नमक और साफ पानी की उपलब्धता हमेशा बनी रहनी चाहिए. इसके अलावा मौसम के अनुसार आहार में बदलाव करना भी फायदेमंद होता है. जरूरत पड़ने पर कैल्शियम और अन्य खनिज सप्लीमेंट भी दिए जा सकते हैं, जिससे पशु की कमजोरी दूर रहे.

रहन-सहन और साफ-सफाई पर भी दें ध्यान

खान-पान के साथ-साथ पशु के रहने की जगह भी साफ और सुरक्षित होनी चाहिए. फिसलन वाली जमीन से बचाव करें, ताकि पशु को चोट न लगे. समय-समय पर पशु को हल्की सैर कराना भी फायदेमंद होता है. साथ ही नियमित जांच और टीकाकरण से बीमारियों का खतरा कम किया जा सकता है. प्रसव के करीब आने पर पशु पर खास नजर रखें और किसी भी परेशानी के लक्षण दिखें तो तुरंत सलाह लें.

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Published: 1 Feb, 2026 | 11:11 AM

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