Animal Health: पशु किसान की असली पूंजी होते हैं. जब यही पशु अचानक सुस्त पड़ने लगते हैं, खाना कम कर देते हैं या दूध देना घट जाता है, तब किसान की चिंता बढ़ना स्वाभाविक है. कई बार बीमारी इतनी तेजी से फैलती है कि पूरा झुंड प्रभावित हो जाता है और किसान को भारी आर्थिक नुकसान झेलना पड़ता है. लेकिन अच्छी बात यह है कि थोड़ी सी जागरूकता और सही देखभाल अपनाकर इन बीमारियों को फैलने से रोका जा सकता है और पशुओं की सेहत को लंबे समय तक सुरक्षित रखा जा सकता है. इस रिपोर्ट में हम आसान और बोलचाल की भाषा में समझेंगे कि पशु आखिर बीमार क्यों पड़ते हैं, बीमारी किन कारणों से फैलती है और इसे रोकने का सबसे असरदार तरीका क्या है.
बीमारी के लक्षण समझना क्यों है सबसे जरूरी
मीडिया रिपोर्ट के अनुसार, पिछले कुछ सालों में पशुओं में बीमारियों के मामले लगातार बढ़े हैं. इसका असर न सिर्फ पशुओं की सेहत पर पड़ता है, बल्कि दूध उत्पादन, उनकी ऊर्जा और किसानों की कमाई पर भी सीधा असर दिखता है. कई बार बीमारी धीरे–धीरे फैलती है और किसान को इसका पता भी नहीं चलता. ऐसे में पशु का खाना कम होना, बार-बार बैठना, सुस्ती आना, आंख या नाक से पानी बहना या दूध कम देना जैसे संकेतों को नजरअंदाज नहीं करना चाहिए. बीमारी जितनी जल्दी पहचान में आ जाए, इलाज उतना आसान होता है और बाकी झुंड को बचाना भी उतना ही सरल हो जाता है.
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नियमित जांच, टीकाकरण और साफ–सफाई
पशुओं को बीमारी से बचाने का सबसे भरोसेमंद तरीका है उनकी नियमित जांच और समय पर टीकाकरण. जब पशुओं का हेल्थ रिकॉर्ड व्यवस्थित होता है, तो बीमारी की शुरुआत में ही पता चल जाता है. इसके साथ ही साफ-सफाई पर खास ध्यान देना बेहद जरूरी है. गंदगी में रहने वाले पशु अधिक जल्दी बीमार पड़ते हैं क्योंकि वायरस और बैक्टीरिया वहीं तेजी से पनपते हैं. इसलिए पशुओं के रहने की जगह रोज साफ होनी चाहिए, चारे में नमी या फंगस न हो और पानी हमेशा स्वच्छ हो. खाने और पानी के बर्तनों की नियमित सफाई भी बीमारी फैलने के खतरे को कम कर देती है.
नया जानवर खरीदने से पहले सावधानी
कई किसान नए पशु खरीदकर उसी दिन उन्हें पुराने झुंड में छोड़ देते हैं, जिससे बीमारी फैलने का सबसे ज्यादा खतरा होता है. नया जानवर हमेशा विश्वसनीय जगह से ही खरीदना चाहिए और उसका पूरा टीकाकरण रिकॉर्ड जांचना जरूरी होता है. नया पशु भले एकदम स्वस्थ दिखे, फिर भी उसे कम से कम तीन हफ्तों तक बाकी झुंड से अलग रखना चाहिए. इस दौरान यदि किसी प्रकार की बीमारी के लक्षण दिखाई देते हैं, तो उसे झुंड में शामिल करने से पहले उपचार करवाना बेहतर होता है. यह छोटा-सा कदम पूरे झुंड को संक्रमण से बचा सकता है.
खाने-पीने की जगह साफ रखना है बीमारी का सबसे बड़ा इलाज
बीमारी फैलने की सबसे बड़ी वजह कई बार चारे और पानी की जगह का गंदा होना होता है. यदि फीडिंग ट्यूब या पानी के स्रोत में गंदगी जमा हो जाए, तो उसमें बैक्टीरिया तेजी से पनपने लगते हैं और पशुओं के शरीर में पहुंचते ही बीमारी का रूप ले लेते हैं. इसी तरह अगर चारा नमीदार या दूषित हो, तो पशु को पाचन की समस्या हो सकती है, जो धीरे-धीरे गंभीर बीमारी में बदल सकती है. इसलिए साफ-सफाई को रोज की दिनचर्या का हिस्सा बनाना चाहिए. जब पशु साफ वातावरण में रहते हैं, तो उनकी प्रतिरोधक क्षमता भी बेहतर रहती है.
बीमार पशु को अलग रखना
अगर कोई पशु बीमार पड़ जाए, तो उसे तुरंत बाकी झुंड से अलग रखना बेहद जरूरी है. बीमार पशु की आवाजाही और संपर्क को सीमित रखने से बीमारी फैलने की संभावना कम हो जाती है. यदि पशु की स्थिति गंभीर हो और उसकी मौत हो जाए, तो उसे खुले में छोड़ना बहुत खतरनाक है. ऐसे में बीमार पशु को गहरे गड्ढे में दफनाकर या दाह-संस्कार करके नष्ट कर देना ही सबसे सुरक्षित तरीका है. इससे वायरस खत्म हो जाता है और बाकी पशु सुरक्षित रहते हैं.