जायद सीजन में धान का रकबा घटा पर मोटे अनाज की बुवाई में तेजी, दलहन फसलों का क्षेत्रफल बढ़ा

Zaid crops acreage: गर्मियों की फसलों का रकबा 26.53 लाख हेक्टेयर के पार पहुंच गया है, जो पिछले साल की समान अवधि में बताए गए 27.42 साथ हेक्टेयर से 3 फीसदी कम है. सरकार ने कहा कि जायद सीजन की बुवाई अच्छी चल रही है, क्योंकि जलाशयों का स्तर अब पिछले साल की तुलना में 12 फीसदी ज्यादा है.

रिजवान नूर खान
नोएडा | Published: 4 Mar, 2026 | 08:10 AM

जायद सीजन में ग्रीष्मकालीन फसलों के बुवाई आंकड़े पिछले साल के मुकाबले थोड़ा कम दर्ज किया गया है. हालांकि,  मोटे अनाज और दलहन फसलों के क्षेत्रफल में बढ़त दर्ज की गई है. उत्तराखंड समेत उत्तर पूर्वी राज्यों में बारिश के अनुमान से फसलों का रकबा थोड़ा और बढ़ने की उम्मीद है. केंद्रीय कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार गर्मियों का रकबा 26.53 लाख हेक्टेयर का आंकड़ा पार कर गया है, जो बीते साल की तुलना में 3 फीसदी है. हालांकि, अभी जायद फसलों की बुवाई मई तक चलेगी, इसलिए रकबा बढ़ने की संभावना है.

जायद सीजन की फसलों का रकबा 26 लाख हेक्टेयर के पार पहुंचा

केंद्रीय कृषि एवं किसान कल्याण मंत्रालय ने ग्रीष्मकालीन फसलों की बुवाई और क्षेत्रफल के आंकड़े जारी किए हैं. 27 फरवरी तक गर्मियों की फसलों का रकबा 26.53 लाख हेक्टेयर के पार पहुंच गया है, जो पिछले साल की समान अवधि में बताए गए 27.42 साथ हेक्टेयर से 3 फीसदी कम है. सरकार ने कहा कि जायद सीजन की बुवाई अच्छी चल रही है, क्योंकि जलाशयों का स्तर अब पिछले साल की तुलना में 12 फीसदी ज्यादा है.

बीते साल जायद फसलों का बुवाई क्षेत्रफल ऑल टाइम हाई था

जायद फसल खरीफ की बुवाई से पहले और रबी की कटाई के बाद उगाई जाती है. गर्मियों की फसलों के एरिया को पहले खरीफ या रबी सीजन में शामिल किया जाता था, लेकिन कुछ साल पहले सरकार ने डेटा को अलग से इकट्ठा करना शुरू करने का फैसला किया. पिछले पांच सालों में गर्मियों की फसलों का एवरेज कवरेज 75.37 लाख हेक्टेयर है, जबकि 2024-25 में यह एरिया 83.92 लाख हेक्टेयर के ऑल टाइम हाई पर पहुंच गया. 2024-25 में कुल 3577.3 लाख टन अनाज प्रोडक्शन में गर्मियों की फसलों का हिस्सा 191.1 लाख टन टन या 5.3 फीसदी था.

धान और मक्का का बुवाई का क्षेत्रफल घटा

कृषि मंत्रालय के ताजा आंकड़ों के अनुसार मौजूदा सीजन में धान की बुआई 23.45 लाख हेक्टेयर में की जा चुकी है, जो पिछले साल 21.80 लाख हेक्टेयर की तुलना में 7 फीसदी कम दर्ज की गई है. जबकि मोटे अनाज का एरिया एक साल पहले के 1.68 लाख हेक्टेयर मुकाबले बढ़कर 1.88 लाख हेक्टेयर हो गया. मक्के का रकबा 1.36 लाख हेक्टेयर से घटकर 1.33 लाख हेक्टेयर हो गया है, जबकि बाजरा 0.21 लाख हेक्टेयर के मुकाबले 0.31 लाख हेक्टेयर, रागी 0.17 लाख हेक्टेयर और ज्वार 27 फरवरी तक 0.06 लाख हेक्टेयर पर पहुंच गया है.

जायद सीजन की दालों के रकबे में बढ़ोत्तरी

गर्मियों की दालों के मुख्य उत्पादक मध्य प्रदेश, बिहार, ओडिशा, तमिलनाडु, उत्तर प्रदेश और गुजरात हैं. इन राज्यों में इस बार दालों की बुवाई की ओर किसानों ने दिलचस्पी दिखाई है. गर्मियों की दालों का रकबा 1.03 लाख हेक्टेयर से बढ़कर 1.15 लाख हेक्टेयर हो गया, जिसमें मूंग का कवरेज 0.73 लाख हेक्टेयर और उड़द का कवरेज 0.32 लाख हेक्टेयर हो गया है. 2025-26 में खरीफ दालों का उत्पादन 2024-25 के 77.3 लाख टन से बढ़कर 74.1 लाख टन होने का अनुमान है.

उड़द दाल के लिए बोनस देने की घोषणा से रकबा बढ़ना तय

गर्मियों में मूंग उगाने वाले मुख्य राज्य मध्य प्रदेश ने हाल ही में गर्मियों में उगाई जाने वाली उड़द की फसल पर बोनस देने की घोषणा की है. उड़द के लिए 7,800 रुपये प्रति क्विंटल क्विंटल के मिनिमम सपोर्ट प्राइस (MSP) के अलावा 600 रुपये प्रति क्विंटल के बोनस की घोषणा की है. राज्य सरकार ने कहा कि इस कदम का मकसद किसानों को गर्मियों (जायद) के मौसम में मूंग और उड़द दाल उगाने के लिए बढ़ावा देना है.

Get Latest   Farming Tips ,  Crop Updates ,  Government Schemes ,  Agri News ,  Market Rates ,  Weather Alerts ,  Equipment Reviews and  Organic Farming News  only on KisanIndia.in

तोरई की अच्छी पैदावार के लिए क्या जरूरी है?

लेटेस्ट न्यूज़