कद्दूवर्गीय फसलों पर ‘सफेद परत’ का हमला! पाउडरी मिल्ड्यू से ऐसे बचाएं पूरी फसल

Tips For Farmers: गर्मियों में लौकी, कद्दू, तरोई और खीरे जैसी कद्दूवर्गीय फसलों पर पाउडरी मिल्ड्यू नाम की एक फफूंद बीमारी लग जाती है, जो पत्तियों पर सफेद पाउडर जैसी परत बना देती है. इससे पौधे ठीक से भोजन नहीं बना पाते, उनकी बढ़वार रुक जाती है और वे धीरे-धीरे कमजोर होकर सूखने लगते हैं, जिससे पैदावार भी कम हो जाती है.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 2 May, 2026 | 09:56 PM

Powdery Mildew Control: गर्मी के मौसम में लौकी, तरोई, कद्दू और खीरे जैसी कद्दूवर्गीय सब्जियों की खेती बड़े पैमाने पर की जाती है. लेकिन इसी समय एक खतरनाक फफूंद जनित रोग पाउडरी मिल्ड्यू (Powdery Mildew) किसानों के लिए गंभीर समस्या बन जाता है. कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रमोद कुमार के अनुसार यह रोग तेजी से फैलता है और पौधों की बढ़वार को रोक देता है, जिससे फसल की पैदावार पर बुरा असर पड़ता है. कृषि विशेषज्ञों के अनुसार, अगर इस रोग की पहचान शुरुआती चरण में नहीं की गई, तो पूरी फसल तक नष्ट हो सकती है.

क्या है पाउडरी मिल्ड्यू रोग?

कृषि वैज्ञानिक डॉ. प्रमोद कुमार बताते हैं कि, यह एक फफूंद (fungal) जनित रोग है. इसमें पौधों की पत्तियों पर सफेद पाउडर जैसी परत जमने लगती है. यह परत धीरे-धीरे पूरी पत्ती को ढक लेती है और पौधे की प्रकाश संश्लेषण (Photosynthesis) प्रक्रिया बाधित हो जाती है. इसके कारण पौधा कमजोर होकर फल उत्पादन में असमर्थ हो जाता है.

प्रमुख लक्षण जिन्हें नजरअंदाज न करें

  • पत्तियों पर सफेद धब्बों का दिखना
  • धीरे-धीरे धब्बों का पूरे पत्ते पर फैलना
  • पत्तियों का पीला पड़ना और सूखना
  • पत्ते छूने पर सफेद पाउडर का हाथ में लगना
  • पौधे की ग्रोथ रुक जाना और फल छोटे रह जाना

ये सभी संकेत बताते हैं कि फसल पर पाउडरी मिल्ड्यू का असर शुरू हो चुका है.

सल्फर: सस्ता और असरदार समाधान

इस रोग के नियंत्रण के लिए सल्फर 80 फीसदी बहुत असरदार माना जाता है. इसके लिए 2 ग्राम सल्फर को 1 लीटर पानी में मिलाकर पौधों पर छिड़काव करना चाहिए. सुबह ओस के समय सल्फर को फैलाकर डालना भी फायदेमंद होता है. यह न सिर्फ फफूंद को खत्म करता है, बल्कि मिट्टी को भी जरूरी पोषक तत्व प्रदान करता है. सल्फर के उपयोग से फसल की गुणवत्ता बढ़ती है और पौधों में मजबूती आती है.

जैविक विकल्प भी हैं कारगर

जैविक खेती करने वाले किसान ट्राइकोडर्मा का उपयोग कर सकते हैं.

  • 5 ग्राम ट्राइकोडर्मा प्रति लीटर पानी में मिलाएं
  • खेत में छिड़काव करने से फफूंद का असर कम होता है
  • यह मिट्टी की जैविक क्षमता को भी सुधारता है

यह तरीका पर्यावरण के लिए सुरक्षित और लंबे समय तक प्रभावी माना जाता है.

समय पर देखभाल से बच सकती है पूरी फसल

फसल की सफलता काफी हद तक उसकी पत्तियों की सेहत पर निर्भर करती है. अगर पत्तियां बीमार हो जाएं, तो प्रकाश संश्लेषण की प्रक्रिया (Photosynthesis) प्रभावित हो जाती है, जिससे पैदावार कम हो सकती है. इसलिए किसानों को अपने खेतों की नियमित जांच करनी चाहिए. जैसे ही किसी बीमारी या कीट के शुरुआती लक्षण दिखाई दें, तुरंत उपचार शुरू करना जरूरी है. साथ ही रासायनिक दवाओं और जैविक तरीकों का संतुलित उपयोग करके फसल को सुरक्षित और स्वस्थ बनाए रखा जा सकता है.

पाउडरी मिल्ड्यू एक गंभीर लेकिन नियंत्रित किया जा सकने वाला रोग है. सही जानकारी, समय पर पहचान और उचित उपचार के जरिए किसान अपनी कद्दूवर्गीय फसलों को सुरक्षित रख सकते हैं.

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