Budget 2026: ‘विकसित भारत’ का दावा या जनता को धोखा? बजट पेश होते ही ममता से अखिलेश तक भड़के विपक्षी नेता!

Union Budget 2026: 1 फरवरी को पेश हुए बजट 2026 को लेकर राजनीति गरमा गई है. विपक्ष ने इसे आम जनता की जरूरतों से दूर और सिर्फ कुछ के लिए फायदेमंद बताया, जबकि सरकार ने इसे ‘विकसित भारत’ की दिशा में काम करने वाला बजट बताया. रोजगार, MGNREGA और ग्रामीण विकास के मुद्दों पर दोनों तरफ से बयान आए. बजट पर संसद और सियासी गलियारों में बहस अभी जारी है.

Isha Gupta
नोएडा | Updated On: 1 Feb, 2026 | 04:32 PM

Budget 2026: 1 फरवरी को वित्त मंत्री निर्मला सीतारमण ने लगातार नौवां केंद्रीय बजट पेश किया और इतिहास बना दिया. इसकी सबसे खास बात यह थी कि बजट रविवार को पेश हुआ, जो आजाद भारत में पहली बार हुआ. वित्त मंत्री ने कहा कि सरकार ने ‘बोलने से ज्यादा काम करने’ का रास्ता चुना है और देश को ‘विकसित भारत’ की ओर आगे ले जाना चाहती है.

लेकिन जैसे ही बजट पेश हुआ, सियासी हलचल शुरू हो गई. संसद से लेकर राजनीतिक गलियारों तक हर तरफ चर्चा होने लगी. जहां एक तरफ सरकार इसे देश के विकास की मजबूत नींव बता रही है, वहीं दूसरी तरफ विपक्ष इसे आम लोगों की जरूरतों से दूर बता रहा है.

ममता बनर्जी का तीखा हमला: ‘बंगाल को एक पैसा नहीं’

पश्चिम बंगाल की मुख्यमंत्री ममता बनर्जी ने बजट को लेकर केंद्र सरकार पर जमकर हमला बोला. उन्होंने कहा कि सरकार जिन आर्थिक कॉरिडोर की बात कर रही है, ‘वो झूठ का पुलिंदा’ है. ममता ने दावा किया कि बंगाल में पहले से चल रही परियोजनाओं के लिए ₹72 हजार करोड़ का निवेश राज्य सरकार खुद कर रही है, जबकि केंद्र ने एक पैसा तक नहीं दिया.

उनका आरोप था कि GST के नाम पर राज्यों का पैसा लेकर केंद्र बड़ी-बड़ी बातें कर रहा है.

कांग्रेस का आरोप: ‘गरीब और मजदूर फिर छूट गए’

कांग्रेस सांसद अमर सिंह और सचिन पायलट ने बजट को गरीब-विरोधी बताया. पायलट ने कहा कि सरकार MGNREGA को ‘सुधार’ के नाम पर लगभग खत्म कर चुकी है. जहां 100 दिन का रोजगार मिलना चाहिए, वहां औसतन सिर्फ 35 दिन काम मिल रहा है.

अमर सिंह ने आरोप लगाया कि पंजाब के साथ भेदभाव हो रहा है और सरकार बहुमत का गलत इस्तेमाल कर रही है.

शशि थरूर का सवाल: ग्रोथ है, लेकिन जॉब्स कहां?

कांग्रेस सांसद शशि थरूर ने बजट को लेकर गंभीर सवाल उठाए. उन्होंने कहा कि आर्थिक सर्वे भले ही अच्छी ग्रोथ दिखा रहा हो, लेकिन असली सवाल है? क्या ये ग्रोथ नौकरियां देगी?

उन्होंने चेताया कि जॉबलेस ग्रोथ देश के युवाओं के लिए सबसे बड़ा खतरा है, खासकर तब जब कई राज्यों में चुनाव भी नजदीक हैं.

अखिलेश यादव: ‘ये बजट सिर्फ 5% लोगों का’

समाजवादी पार्टी के अध्यक्ष अखिलेश यादव ने साफ कहा कि इस सरकार से उन्हें कोई उम्मीद नहीं है. उनका आरोप था कि पिछले कई बजटों की तरह ये बजट भी चुनिंदा 5% लोगों के लिए है और सरकार को पहले ये बताना चाहिए कि उसने अपने पुराने वादे पूरे किए या नहीं.

बजट 2026-27 को नेताओं का समर्थन

केंद्रीय बजट 2026-27 को लेकर देशभर के नेताओं ने इसकी सराहना की है. भाजपा सांसद रवि शंकर प्रसाद ने मीडिया से बातचीत में कहा, ‘यह एक प्रगतिशील बजट है जो विकसित भारत की दिशा को स्पष्ट करता है.’

केंद्रीय राज्य मंत्री कीर्ति वर्धन सिंह ने भी बजट की तारीफ करते हुए कहा, “यह बजट हमारे देश की वृद्धि पर केंद्रित है और इसका दूरगामी असर पड़ेगा.”

छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री ने की तारीफ

वहीं, छत्तीसगढ़ के मुख्यमंत्री विष्णु देव साई ने रविवार को बजट की तारीफ की और कहा कि यह प्रधानमंत्री नरेंद्र मोदी के मंत्र ‘सबका साथ, सबका विकास, सबका विश्वास और सबका प्रयास’ को पूरी तरह प्रतिबिंबित करता है. उन्होंने बताया कि इस बजट से न केवल देश, बल्कि छत्तीसगढ़ को भी महत्वपूर्ण लाभ मिलेगा. रायपुर में मीडिया से बातचीत के दौरान सीएम साई ने कहा, ‘2026-27 का यह बजट प्रधानमंत्री के मूल मंत्र को अपनाता है और देश व छत्तीसगढ़ दोनों के लिए फायदे का सौदा साबित होगा.’

सहकारिता सेक्टर को बड़ी राहत – दिलीप संघाणी

राष्ट्रीय सहकारी संघ के अध्यक्ष दिलीप संघाणी ने इस बजट को सहकारिता के लिए एक बड़ा और ऐतिहासिक कदम बताया है. उन्होंने कहा कि यह बजट सरकार के ‘सहकार से समृद्धि’ के विज़न को जमीन पर उतारने वाला है. दिलीप संघाणी के मुताबिक, बजट में ग्रामीण सहकारी बैंकों, प्राथमिक कृषि साख समितियों (PACS) और किसानों के लिए सस्ती और आसान वित्तीय मदद के जो फैसले लिए गए हैं, उससे गांवों की अर्थव्यवस्था को सीधा फायदा मिलेगा.

उन्होंने नई टैक्स व्यवस्था की भी सराहना की और कहा कि इंटर-कोऑपरेटिव डिविडेंड पर टैक्स छूट देना सहकारिता सेक्टर के लिए बड़ी राहत है. इससे सहकारी संस्थाओं के पास ज्यादा पैसा बचेगा, जिसे वे किसानों और ग्रामीण विकास के कामों में लगा सकेंगी. कुल मिलाकर, यह बजट गांव, किसान और सहकारी संस्थाओं को मजबूत करने की दिशा में एक अहम कदम माना जा रहा है.

बजट 2026 को सरकार जहां विकास और सुधार का रोडमैप बता रही है, वहीं विपक्ष इसे भेदभाव, बेरोजगारी और अधूरे वादों का बजट कह रहा है. ऐसे में अब असली सवाल यही है कि, क्या ये बजट आम आदमी की जेब और युवाओं के भविष्य तक पहुंचेगा, या सिर्फ कागजों में ही ‘विकसित भारत’ बनेगा?

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Published: 1 Feb, 2026 | 03:25 PM

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