Amazing Birds: क्या आप जानते हैं इस अनोखे पक्षी का नाम, पूरी जिंदगी कभी किसी पेड़ पर नहीं बैठता

दुनिया में एक ऐसा अनोखा पक्षी भी है जो बचपन में पढ़ी गई हमारी किताबों की बातों को गलत साबित कर देता है. जहां हर पंछी पेड़ की छांव और डालियां खोजता है, वहीं टिटहरी अपना पूरा जीवन सिर्फ जमीन पर ही बिताती है. इस पक्षी के रहन-सहन और स्वभाव से जुड़ी रोचक बातें आपको हैरान कर देंगी.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 28 Jan, 2026 | 07:32 PM

Amazing Birds : बचपन की किताबों में हमने हमेशा यही पढ़ा और देखा है कि पक्षियों का असली घर पेड़ों की शाखायें होती हैं. चीं-चीं करती चिड़ियां हो या कांव-कांव करता कौआ, शाम होते ही सब पेड़ों की ओर दौड़ते हैं. लेकिन कुदरत के खजाने में एक ऐसा भी परिंदा है जिसके नियम कायदे दुनिया से बिलकुल अलग हैं. हम बात कर रहे हैं टिटहरी (Lapwing) की, जिसे ग्रामीण इलाकों में टिटोनी भी कहा जाता है. यह एक ऐसा पक्षी है जिसने ताउम्र जमीन पर रहने की कसम खाई है. आइए जानते हैं इस अनोखे पक्षी के जीवन से जुड़ी कुछ दिलचस्प बातें.

क्यों पेड़ों से दूर रहती है टिटहरी?

टिटहरी की सबसे बड़ी खूबी यही है कि यह कभी किसी पेड़ की टहनी  पर नहीं बैठती. जहां अन्य पक्षी ऊंचाई पर अपना घोंसला बनाना सुरक्षित समझते हैं, वहीं टिटहरी अपना पूरा जीवन जमीन पर ही बिता देती है. वैज्ञानिक दृष्टि से देखें तो टिटहरी के पंजों की बनावट अन्य पक्षियों से थोड़ी अलग होती है, जो उसे पेड़ों की पतली टहनियों को पकड़ने में मदद नहीं करती. यही कारण है कि यह पक्षी रेतीले मैदानों, खेतों या नदी के किनारों पर ही पाया जाता है.

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टिटहरी

नदी के किनारे टिट-टिट की गूंज और अनूठा स्वभाव

अगर आप कभी किसी नदी या तालाब  के किनारे से गुजरें, तो आपको एक तीखी और ऊंची आवाज सुनाई देगी- टिट-टिट-टिटुई. यह टिटहरी की मौजूदगी का संकेत है. टिटहरी स्वभाव से बहुत ही सतर्क और रक्षात्मक पक्षी है. इसे इंसानों या अन्य जानवरों का दखल बिलकुल पसंद नहीं है. जैसे ही कोई इसके क्षेत्र में आता है, यह शोर मचाकर पूरे इलाके को सतर्क कर देती है. ग्रामीण इलाकों में तो इसे प्राकृतिक अलार्म भी माना जाता है.

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पेड़ से दूरी बनाने वाले अनोखे पक्षी टिटहरी.

घोंसला बनाने का अनोखा अंदाज

टिटहरी का घोंसला बनाना  भी किसी इंजीनियरिंग से कम नहीं है. यह घास-फूस से घर बनाने के बजाय जमीन पर ही एक छोटा सा गड्ढा खोदती है और उसमें छोटे-छोटे कंकड़-पत्थर जमा करती है. इसके अंडों का रंग भी पत्थरों जैसा ही मटमैला होता है, जिससे वे खुले में होने के बावजूद दुश्मनों की नजरों से बचे रहते हैं. टिटहरी अपने अंडों की सुरक्षा के लिए अपनी जान की बाजी लगा देती है; यदि कोई शिकारी पास आए, तो वह घायल होने का नाटक करके शिकारी को अंडों से दूर ले जाती है.

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टिटहरी को मौसम का बड़ा जानकार माना जाता है.

किसानों का साथी और मौसम का संदेशवाहक

भारतीय लोक कथाओं और ग्रामीण मान्यताओं  में टिटहरी को मौसम का बड़ा जानकार माना जाता है. पुराने बुजुर्ग अक्सर टिटहरी के अंडों की जगह देखकर आने वाले मानसून का अंदाजा लगाते थे. कहा जाता है कि अगर टिटहरी ऊंचे स्थान पर अंडे दे, तो भारी बारिश होने की संभावना होती है. यह पक्षी खेतों के कीड़े-मकोड़े खाकर फसलों की रक्षा भी करता है, इसलिए इसे किसानों का एक अनमोल मित्र भी कहा जाता है.

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Published: 28 Jan, 2026 | 07:32 PM

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