छत पर बह रही है मुनाफे की नदी, मछली पालन की इस जादुई तकनीक से घर बैठे बन सकते हैं लखपति!

बदली तकनीक ने अब मछली पालन को सात समंदर पार से लाकर आपके घर के आंगन और छत तक पहुंचा दिया है. बिना किसी बड़े तालाब के, बायोफ्लॉक तकनीक के जरिए कम लागत में बंपर उत्पादन संभव है. सरकारी मदद और सही प्रबंधन के साथ यह बिजनेस आम लोगों के लिए मोटी कमाई का बेहतरीन जरिया बन गया है.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 13 Jan, 2026 | 01:02 PM

Biofloc Fish Farming : सोचिए, क्या ऐसा हो सकता है कि आपको मछली पालने के लिए किसी बड़े तालाब या नदी पर न जाना पड़े और आप अपने घर के आंगन या छत पर ही यह काम शुरू कर सकें? जी हां, अब यह मुमकिन है. तकनीक के इस दौर में अब मछली पालन सिर्फ बड़े जमींदारों तक सीमित नहीं रह गया है. एक ऐसी जादुई तकनीक आई है जिसने आम घरों की छतों और खाली पड़े आंगनों को नोट छापने की मशीन में बदल दिया है.

मध्यम वर्गीय परिवारों और महिलाओं के लिए यह तकनीक एक वरदान साबित हो रही है. बिना किसी बड़ी जमीन के, घर के काम-काज के साथ मछली पालकर लोग अब साल के 10 से 12 लाख रुपये आसानी से कमा रहे हैं. आइए जानते हैं क्या है यह तकनीक और आप इसका फायदा कैसे उठा सकते हैं.

बायोफ्लॉक-छोटी जगह में बड़ी कमाई का राज

अक्सर लोग जगह की कमी के कारण मछली पालन  नहीं कर पाते, लेकिन’बायोफ्लॉक (Biofloc) तकनीक ने इस समस्या को जड़ से खत्म कर दिया है. इसमें लोहे की जाली के गोल टैंक बनाए जाते हैं, जिन्हें खास तरह के त्रिपाल (Tarpaulin) से ढका जाता है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, इस तकनीक में मछलियों के मल  को ही बैक्टीरिया की मदद से उनके भोजन (प्रोटीन) में बदल दिया जाता है. इससे पानी भी साफ रहता है और चारे का खर्च भी बचता है. मात्र 6 महीने में मछलियां तैयार हो जाती हैं और आप एक छोटे से हिस्से से बंपर उत्पादन ले सकते हैं.

सरकार दे रही है लाखों की मदद, लागत कम मुनाफा ज्यादा

इस बिजनेस को शुरू करने के लिए आपको अपनी जेब से पूरे पैसे लगाने की जरूरत नहीं है. प्रधानमंत्री मत्स्य संपदा योजना  के तहत सरकार इस आधुनिक खेती को बढ़ावा दे रही है. जानकार बताते हैं कि अगर इस प्रोजेक्ट की लागत करीब 7.50 लाख रुपये आती है, तो सरकार उस पर 4.50 लाख रुपये तक की सब्सिडी (छूट) दे रही है. यानी आधे से भी कम खर्च में आप अपना खुद का बिजनेस खड़ा कर सकते हैं. यही वजह है कि आज गांवों से लेकर शहरों तक, लोग इस योजना का लाभ लेकर आत्मनिर्भर बन रहे हैं.

घर बैठे सालभर में 10 टन मछली का उत्पादन

बायोफ्लॉक तकनीक  की सबसे खास बात यह है कि इसमें मौसम का डर कम रहता है. टैंक के अंदर मछलियों की जरूरत के हिसाब से हीटर और ऑक्सीजन मशीनें लगाई जाती हैं, जिससे उन्हें बिल्कुल वैसा ही माहौल मिलता है जैसा किसी बड़ी नदी या तालाब में मिलता है. मीडिया रिपोर्ट्स के अनुसार, सही तरीके से प्रबंधन करने पर एक साल में लगभग 10 टन तक मछली का उत्पादन किया जा सकता है. साल में दो बार फसल ली जा सकती है, जिससे सालाना आय 8 लाख से 12 लाख रुपये तक पहुंच जाती है.

कैसे करें शुरुआत और कहां करें आवेदन?

अगर आप भी अपनी छत या आंगन का इस्तेमाल कमाई के लिए करना चाहते हैं, तो इसकी प्रक्रिया बेहद सरल है. इच्छुक लोग अपने राज्य के मत्स्य विभाग  की वेबसाइट पर जाकर ऑनलाइन आवेदन कर सकते हैं. इसके लिए आधार कार्ड, बैंक डिटेल और जमीन के कागजात जैसे जरूरी दस्तावेजों की जरूरत होती है. आप अपने जिले के मत्स्य अधिकारी से मिलकर भी पूरी जानकारी ले सकते हैं. सरकार का लक्ष्य है कि हर हाथ को काम मिले और मछली पालकों की आमदनी दोगुनी हो.

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