मछली पालन से बनना है लखपति? तो तालाब बनाने से लेकर बीज डालने तक न करें ये छोटी गलतियां

मछली पालन आज के दौर में कम निवेश में बंपर कमाई का जरिया बन गया है. लेकिन, सही जानकारी के अभाव में कई बार किसानों को बड़ा नुकसान उठाना पड़ता है. तालाब की सही दिशा, गहराई और मछली के बीज का चुनाव ही आपकी सफलता तय करता है. मुनाफे के ये खास टिप्स जरूर जानें.

Saurabh Sharma
नोएडा | Published: 13 Jan, 2026 | 12:15 PM

Fish Farming Techniques: मछली पालन आज के समय में कम लागत में मोटी कमाई का एक बेहतरीन जरिया बन चुका है. लेकिन, कई बार जोश में आकर किसान कुछ ऐसी बुनियादी गलतियां कर बैठते हैं, जिससे मुनाफे की जगह नुकसान उठाना पड़ जाता है. अगर आप भी मछली पालन शुरू करने की सोच रहे हैं या पहले से इस काम में जुटे हैं, तो यह खबर आपके बहुत काम की है. सही तकनीक और सावधानी बरती जाए तो तालाब से चांदी काटी जा सकती है. आइए जानते हैं मछली पालन के वो गुरु मंत्र, जो आपकी किस्मत बदल सकते हैं.

तालाब का सही चुनाव- दिशा और गहराई का खेल

मछली पालन  की शुरुआत तालाब की खुदाई से होती है और यहीं पर सबसे बड़ी चूक हो जाती है. जानकारों का मानना है कि एक आदर्श तालाब कम से कम 0.2 हेक्टेयर का होना चाहिए. सबसे जरूरी बात तालाब की दिशा है, इसे हमेशा पूर्व से पश्चिम की ओर बनाना चाहिए. ऐसा करने से सूर्य की रोशनी पानी पर ज्यादा समय तक रहती है, जिससे मछलियों के लिए ऑक्सीजन  और प्राकृतिक भोजन (प्लैंकटन) बनने में मदद मिलती है. इसके अलावा, पानी की गहराई 1.5 से 2 मीटर के बीच रखना सबसे सही रहता है ताकि तापमान संतुलित रहे.

सही बीज ही देगा सही मुनाफा

अक्सर किसान सस्ते के चक्कर में या जानकारी के अभाव में बहुत छोटे बच्चे तालाब में डाल देते हैं, जिनके जीवित बचने की संभावना कम होती है. मीडिया रिपोर्ट के मुताबिक, अगर आप अच्छा उत्पादन चाहते हैं तो मछली के बच्चों का आकार 4 से 6 इंच होना चाहिए. रोहू, कतला और मृगल जैसी प्रजातियां भारतीय वातावरण के लिए सबसे अच्छी मानी जाती हैं. अगर बीज की क्वालिटी  और साइज सही है, तो मछलियां तेजी से बढ़ेंगी और बीमारी का खतरा भी कम होगा.

खान-पान और पानी की सेहत का रखें ख्याल

जैसे इंसानों को बढ़ने के लिए अच्छे पोषण की जरूरत होती है, वैसे ही मछलियों को भी संतुलित आहार  चाहिए. सिर्फ तालाब के भरोसे न रहकर उन्हें समय-समय पर जरूरी सप्लीमेंट और फीड देना चाहिए. इसके साथ ही, पानी की गुणवत्ता पर नजर रखना बहुत जरूरी है. अगर पानी का रंग ज्यादा गहरा हरा या काला होने लगे, तो समझ लें कि ऑक्सीजन की कमी हो रही है. समय-समय पर तालाब के पानी को बदलना या उसमें ताजी हवा का प्रवाह बनाए रखना मछलियों की बढ़त के लिए रामबाण साबित होता है.

प्रबंधन में समझदारी, जेब में बढ़ेगी रफ्तार

मछली पालन कोई डालो और भूल जाओ वाला काम नहीं है. इसमें नियमित देखभाल की जरूरत होती है. विशेषज्ञों का कहना है कि अगर किसान सही मैनेजमेंट रखे, तो एक साल के भीतर ही लागत से कई गुना ज्यादा मुनाफा कमाया जा सकता है. तालाब के किनारे साफ-सुथरे रखें और किसी भी बाहरी संक्रमण से मछलियों  को बचाएं. कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमाने का सबसे बड़ा राज यही है कि आप छोटी-छोटी गलतियों को सुधारें और आधुनिक तकनीकों को अपनाएं.

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