Dairy Farming: कम दूध दे रही गाय-भैंस? सरकार की इस योजना से बढ़ेगा उत्पादन, कमाई भी होगी डबल!

National Gokul Mission: राष्ट्रीय गोकुल मिशन के तहत देशी गाय और भैंस की नस्ल सुधार, आधुनिक तकनीक और कृत्रिम गर्भाधान की सुविधा गांव तक पहुंचाई जा रही है. इस योजना का उद्देश्य दूध उत्पादन बढ़ाकर पशुपालकों की आय में इजाफा करना है. छोटे और सीमांत किसानों के लिए यह योजना डेयरी व्यवसाय को अधिक लाभकारी बनाने का अवसर प्रदान करती है.

Isha Gupta
नोएडा | Published: 28 Feb, 2026 | 10:00 PM

Rashtriya Gokul Mission: देश में पशुपालन को मजबूत और लाभकारी बनाने के लिए सरकार ने पशुपालन एवं दुधारू पालन विभाग के माध्यम से राष्ट्रीय गोकुल मिशन शुरू किया है. इस योजना का मुख्य उद्देश्य देशी गाय और भैंस की नस्ल को बेहतर बनाना, उनका संरक्षण करना और दूध उत्पादन बढ़ाना है. इस मिशन के तहत बेहतर नस्ल और आधुनिक तकनीक अपनाने पर जोर दिया जा रहा है, ताकि पशुपालकों को ज्यादा दूध उत्पादन के जरिए अधिक आय मिल सके और उनका व्यवसाय मजबूत हो.

अगर आपकी गाय या भैंस से कम दूध मिल रहा है, तो इसका कारण कमजोर नस्ल या उचित प्रबंधन की कमी हो सकता है. सही नस्ल और आधुनिक तकनीक अपनाकर पशुपालक अपनी आय में अच्छा इजाफा कर सकते हैं.

राष्ट्रीय गोकुल मिशन का उद्देश्य

राष्ट्रीय गोकुल मिशन का मुख्य लक्ष्य देशी गाय और भैंस की नस्ल को बेहतर बनाना है. इसके प्रमुख उद्देश्य इस प्रकार हैं:

  • देशी गोवंश का संरक्षण और संवर्धन
  • दुग्ध उत्पादन और उत्पादकता में वृद्धि
  • पशुपालकों की आय बढ़ाना
  • वैज्ञानिक प्रजनन तकनीकों को गांव-गांव तक पहुंचाना

इस मिशन के जरिए सरकार चाहती है कि पशुपालन क्षेत्र आत्मनिर्भर बने और किसानों को स्थायी आय का स्रोत मिले.

आधुनिक तकनीक से नस्ल सुधार

योजना के तहत उच्च गुणवत्ता वाले सांड उपलब्ध कराए जाते हैं, जिससे बेहतर नस्ल तैयार हो सके. इसके अलावा, गांव स्तर तक कृत्रिम गर्भाधान (Artificial Insemination) की सुविधा पहुंचाई जा रही है.

आईवीएफ (इन-विट्रो फर्टिलाइजेशन) और सेक्स सॉर्टेड सीमेन जैसी आधुनिक तकनीकों का उपयोग भी बढ़ाया जा रहा है. इन तकनीकों से अच्छी नस्ल के बछड़े प्राप्त होते हैं और दूध देने वाली मादा पशुओं की संख्या बढ़ती है.

देशी नस्ल संरक्षण को बढ़ावा

राष्ट्रीय गोकुल मिशन के अंतर्गत देशी नस्लों के संरक्षण और विकास के लिए खास सहायता दी जाती है. इससे न केवल पारंपरिक नस्लें सुरक्षित रहती हैं, बल्कि उनकी उत्पादकता भी सुधरती है. देशी नस्लें जलवायु के अनुकूल होती हैं और कम खर्च में बेहतर प्रदर्शन करती हैं. इसलिए छोटे और सीमांत पशुपालकों के लिए यह योजना काफी फायदेमंद साबित हो रही है.

महिलाओं और छोटे पशुपालकों को लाभ

इस योजना से छोटे और सीमांत किसानों को सीधा फायदा मिल रहा है. खासतौर पर ग्रामीण महिलाओं की भागीदारी मजबूत हुई है, क्योंकि डेयरी गतिविधियों में उनका अहम योगदान रहता है. अच्छी नस्ल, स्वस्थ पशु और ज्यादा दूध का मतलब है ज्यादा मुनाफा. इससे परिवार की आय बढ़ती है और आर्थिक स्थिति मजबूत होती है. राष्ट्रीय गोकुल मिशन पशुपालन क्षेत्र में बदलाव लाने की एक बड़ी पहल है. आधुनिक तकनीक, नस्ल सुधार और संरक्षण गतिविधियों के जरिए यह योजना किसानों की आय बढ़ाने में मदद कर रही है.

यदि आप भी अपनी गाय या भैंस की उत्पादकता बढ़ाना चाहते हैं, तो अपने नजदीकी पशु चिकित्सा केंद्र से संपर्क करें और इस योजना का लाभ उठाएं. बेहतर नस्ल और सही देखभाल से डेयरी व्यवसाय को लाभदायक बनाया जा सकता है.

 

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Published: 28 Feb, 2026 | 10:00 PM

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