Dairy Development: गांवों में पशुपालन सिर्फ परंपरा नहीं, बल्कि आजीविका का मजबूत सहारा बनता जा रहा है. जब पशु स्वस्थ हों, दूध की सही कीमत मिले और बाजार तक पहुंच आसान हो, तो यह काम किसानों के लिए ज्यादा लाभकारी बन जाता है. इसी सोच के साथ पशुपालन को आधुनिक और सुरक्षित व्यवसाय बनाने के लिए कई नई योजनाएं शुरू की जा रही हैं. इन कदमों का मकसद किसानों की आय बढ़ाना और ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करना है.
पशुपालन को आधुनिक बनाने की पहल
हिंदुस्तान टाइम्स रिपोर्ट के अनुसार, गुजरात सरकार (Gujarat News) पशुपालन को आधुनिक, मुनाफे वाला और कम जोखिम वाला व्यवसाय बनाने पर जोर दे रही है. इसके लिए पशु स्वास्थ्य सेवाओं को मजबूत किया जा रहा है और उन्नत नस्ल सुधार कार्यक्रमों को बढ़ावा दिया जा रहा है. गांव-गांव तक पशु चिकित्सा सेवाएं पहुंचाने की योजना पर काम हो रहा है, ताकि पशुपालकों को समय पर इलाज और सलाह मिल सके. इसके साथ ही किसानों को प्रशिक्षण और आसान ऋण सुविधा देकर पशुपालन को एक स्थायी आय का स्रोत बनाने की कोशिश की जा रही है.
मुर्रा भैंस पालकों को प्रोत्साहन
गुजरात के मेहसाना जिले में पशुपालन को बढ़ावा देने के लिए उन्नत नस्लों के संरक्षण पर भी ध्यान दिया जा रहा है. खासतौर पर अधिक दूध देने वाली भैंसों के मालिकों को प्रोत्साहन राशि दी जा रही है. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार उच्च दुग्ध उत्पादन वाली भैंस पालने वालों को 40 हजार रुपये तक की प्रोत्साहन राशि दी जा रही है. इसका उद्देश्य बेहतर नस्लों को बढ़ावा देना और दूध उत्पादन में वृद्धि करना है. इसके अलावा पशुपालकों को पशु खरीदने और पालन के लिए लाइवस्टॉक किसान क्रेडिट कार्ड भी दिए जा रहे हैं. लाखों पशुपालक इस योजना का लाभ ले चुके हैं और बैंकों के माध्यम से बड़ी राशि का ऋण उपलब्ध कराया गया है.
मिनी डेयरी योजना से रोजगार के अवसर
छोटे किसानों और ग्रामीण युवाओं के लिए डेयरी को रोजगार का बेहतर विकल्प बनाने पर भी काम हो रहा है. रिपोर्ट के अनुसार कई योजनाओं के तहत हजारों पशुधन इकाइयां स्थापित की जा चुकी हैं. मिनी डेयरी खोलने के लिए पशुओं की लागत पर 25 प्रतिशत तक सब्सिडी दी जा रही है. वहीं कुछ योजनाओं में दो या तीन पशुओं की डेयरी खोलने पर 50 प्रतिशत तक सहायता मिल रही है. महिलाओं को आत्मनिर्भर बनाने के लिए महिला डेयरी योजनाओं के तहत एक लाख रुपये तक का ब्याज-मुक्त ऋण दिया जा रहा है. इससे ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर पैदा हो रहे हैं.
पशुओं के बीमा से कम होगा जोखिम
पशुपालन में सबसे बड़ा खतरा पशुओं की बीमारी या दुर्घटना से होने वाले नुकसान का होता है. इसे कम करने के लिए पशु बीमा योजना को भी मजबूत किया गया है. रिपोर्ट के अनुसार लाखों पशुओं का बीमा किया जा चुका है. बड़े पशुओं का बीमा बहुत कम शुल्क पर और छोटे पशुओं का और भी कम लागत पर किया जा रहा है. अनुसूचित जाति के पशुपालकों के पशुओं का बीमा मुफ्त में किया जा रहा है. अब तक हजारों पशुपालकों को बीमा दावों के रूप में बड़ी राशि का भुगतान किया जा चुका है, जिससे उन्हें आर्थिक नुकसान से राहत मिली है.
ग्रामीण अर्थव्यवस्था की मजबूत कड़ी बना पशुपालन
पशुपालन को ग्रामीण अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता है. दूध उत्पादन, रोजगार और किसानों की आय बढ़ाने में इसकी बड़ी भूमिका है. पशुओं की बेहतर देखभाल के लिए मोबाइल पशु चिकित्सा सेवाएं भी शुरू की गई हैं, जो गांवों में जाकर इलाज और सलाह देती हैं. हजारों पशु चिकित्सा संस्थान भी पशुओं की देखभाल में मदद कर रहे हैं. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार राज्य में प्रति व्यक्ति दूध उपलब्धता लगातार बढ़ रही है, जिसका श्रेय पशुपालकों की मेहनत को दिया जा रहा है. अगर योजनाएं इसी तरह जमीन पर लागू होती रहीं, तो आने वाले समय में पशुपालन किसानों के लिए और अधिक सुरक्षित और मुनाफे वाला व्यवसाय बन सकता है. इससे न सिर्फ किसानों की आय बढ़ेगी, बल्कि गांवों की अर्थव्यवस्था को भी नई मजबूती मिलेगी.