Dairy Milk Scheme: गांवों में दूध बेचने और खरीदने की सुविधा को आसान बनाने के लिए सरकार एक बड़ा कदम उठाने जा रही है. अब लोगों को दूध और दुग्ध उत्पाद खरीदने के लिए दूर नहीं जाना पड़ेगा. आने वाले महीनों में पंचायत स्तर तक दूध बिक्री केंद्र खोलने की तैयारी है. इससे पशुपालकों की कमाई बढ़ेगी और गांवों में रोजगार के नए अवसर भी बनेंगे. यह योजना ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत करने की दिशा में महत्वपूर्ण मानी जा रही है.
पंचायतों में खुलेंगे दूध बिक्री केंद्र
बिहार डेयरी विभाग के अनुसार, अगले लगभग 14 महीनों में राज्य की 7953 पंचायतों में सुधा दूध बिक्री केंद्र खोले जाएंगे. अभी कई जगहों पर दूध बिक्री केंद्र प्रखंड स्तर तक सीमित हैं, जिससे गांव के लोगों को दूध और उससे बने उत्पाद खरीदने के लिए दूरी तय करनी पड़ती है. पंचायत स्तर पर केंद्र खुलने से लोगों को अपने ही इलाके में दूध और डेयरी उत्पाद आसानी से मिल सकेंगे. इससे दूध उत्पादों की बिक्री बढ़ने की उम्मीद है और ग्रामीण बाजार भी मजबूत होगा.
गांवों में बनेंगी दूध उत्पादन समितियां
बिहार सरकार के अनुसार, आने वाले दो वर्षों में 13480 गांवों में दूध उत्पादन समितियां बनाई जाएंगी. इन समितियों के बनने से पशुपालकों को दूध बेचने के लिए ज्यादा दूर नहीं जाना पड़ेगा. समितियां गांव में ही दूध संग्रह का काम करेंगी, जिससे समय और खर्च दोनों की बचत होगी. इससे छोटे पशुपालकों को भी डेयरी से जुड़ने का मौका मिलेगा और दूध उत्पादन को बढ़ावा मिलेगा.
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पशुपालकों की आय बढ़ाने की तैयारी
पंचायतों में दूध बिक्री केंद्र और गांवों में समितियां बनने से दूध की मांग बढ़ेगी. मांग बढ़ने का सीधा फायदा पशुपालकों को मिलेगा क्योंकि वे ज्यादा दूध बेच पाएंगे. मीडिया रिपोर्ट के अनुसार पशुपालकों को दूध का उचित मूल्य मिलने से उनकी आमदनी में बढ़ोतरी होगी. साथ ही डेयरी से जुड़े छोटे व्यवसाय जैसे चारा, पशु देखभाल और परिवहन में भी काम के अवसर बढ़ेंगे. यह कदम ग्रामीण अर्थव्यवस्था को मजबूत बनाने में मददगार साबित हो सकता है.
महिलाओं को मिलेगा रोजगार का अवसर
इस योजना की एक खास बात यह है कि दूध बिक्री केंद्रों के आवंटन में महिला रोजगार योजना से जुड़ी महिलाओं को प्राथमिकता दी जाएगी. इससे गांवों में महिला उद्यमिता को बढ़ावा मिलेगा. दूध बिक्री केंद्र चलाने से महिलाओं को नियमित आय का स्रोत मिलेगा और वे आर्थिक रूप से आत्मनिर्भर बन सकेंगी. ग्रामीण क्षेत्रों में रोजगार के नए अवसर बनने से स्थानीय स्तर पर विकास को भी गति मिलेगी. कुल मिलाकर, पंचायत स्तर तक डेयरी व्यवस्था को मजबूत करने की यह पहल गांवों में दूध उत्पादन, रोजगार और आय बढ़ाने की दिशा में एक बड़ा कदम मानी जा रही है. आने वाले समय में इसका फायदा पशुपालकों के साथ-साथ उपभोक्ताओं को भी मिलेगा.