मिट्टी में तेजी कम हो रही है कार्बन और नाइट्रोजन की मात्रा, बहुत जल्द घट जाएगी पैदावार

कहा जा रहा है कि इस समस्या का मुख्य कारण खेतों में गोबर खाद, हरी खाद और फसल अवशेषों का कम इस्तेमाल होना है. इससे मिट्टी की सेहत कमजोर हो रही है और फसलों पर इसका सीधा असर पड़ रहा है. साल 2024- 25 में जिले में 99,572 मिट्टी के नमूनों की जांच की गई.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 19 Dec, 2025 | 05:13 PM

Haryana News: हरियाणा के सिरसा जिले की मिट्टी में ऑर्गेनिक कार्बन और नाइट्रोजन की कमी पाई गई है. इससे जिले के किसानों को फसलों की पैदावार में गिरावट आने का भय सता रहा है. कृषि विभाग के मुताबिक, मिट्टी में कार्बन और नाइट्रोजन की कमी से पौधों की शुरुआती बढ़त कमजोर हो जाती है. इससे पत्तों का विकास सही तरह से नहीं हो पाता और अंत में फसल की कुल पैदावार भी प्रभावित होती है.

कहा जा रहा है कि इस समस्या का मुख्य कारण खेतों में गोबर खाद, हरी खाद और फसल अवशेषों का कम इस्तेमाल होना है. इससे मिट्टी की सेहत कमजोर हो रही है और फसलों पर इसका सीधा असर पड़ रहा है. साल 2024- 25 में जिले में 99,572 मिट्टी के नमूनों की जांच की गई. अब तक 82,935 किसानों को सोइल हेल्थ कार्ड WhatsApp के जरिए भेजे जा चुके हैं. वहीं 2025- 26 में अभी तक 52,982 नमूने लिए गए हैं और उनकी जांच व कार्ड वितरण की प्रक्रिया जारी है.

इन गांवों में है ज्यादा समस्या

द ट्रिब्यून की रिपोर्ट के मुताबिक, रानिया ब्लॉक के नटर, शहीदानवाली, मल्लेकन, मधोसिंघाना, सालारपुर, खजाखेड़ा और अलानूर जैसे गांवों की मिट्टी में कार्बन और नाइट्रोजन की मात्रा बहुत कम पाई गई है. विशेषज्ञों ने चेतावनी दी है कि यदि यह समस्या दूर नहीं की गई, तो फसल उत्पादन  घट सकता है. सिरसा जिले के सोइल हेल्थ डैशबोर्ड के डेटा के मुताबिक, मिट्टी में नाइट्रोजन की कमी सबसे बड़ी चिंता का विषय है. लगभग सभी नमूनों में नाइट्रोजन कम पाया गया, जिससे फसल की बढ़त और पैदावार प्रभावित हो रही है. इसके अलावा 1,819 नमूनों में ऑर्गेनिक कार्बन बहुत कम था.

किसान खेतों में गोबर खाद डालें

जिले की मिट्टी परीक्षण प्रयोगशाला के अधिकारियों के अनुसार, कार्बन की कमी मुख्य रूप से इसलिए है, क्योंकि किसान खेतों में गोबर खाद, हरी खाद और फसल अवशेष पर्याप्त मात्रा में इस्तेमाल नहीं कर रहे हैं. विशेषज्ञों का कहना है कि यदि किसान अपने सोइल हेल्थ कार्ड्स में दिए सुझावों का पालन करें, तो फसल की पैदावार 15-25 प्रतिशत तक बढ़ सकती है.

मिट्टी में मैक्रो और माइक्रो पोषक तत्वों की कमी

कृषि और किसान कल्याण अधिकारी डॉ. सुखदेव सिंह कांबोज ने कहा कि जिले की मिट्टी में मैक्रो और माइक्रो पोषक तत्वों की कमी है. उन्होंने किसानों को सलाह दी कि उर्वरकों का वैज्ञानिक तरीके से उपयोग करें और खेतों में ऑर्गेनिक पदार्थ बढ़ाएं ताकि मिट्टी की उर्वरता सुधर सके. उन्होंने किसानों से कहा कि फसल अवशेष को जलाने के बजाय खेत में छोड़ें, क्योंकि यह मिट्टी के लिए लाभकारी कीड़े और सूक्ष्मजीवों को बढ़ावा देता है और मिट्टी की उपजाऊ शक्ति बढ़ाता है.

मिट्टी के सेहत में सुधार के लिए क्या करें

कांबोज ने कहा कि पहले किसान गोबर खाद का खूब इस्तेमाल करते थे, जिससे मिट्टी की सेहत  अच्छी रहती थी. लेकिन अब इसका उपयोग काफी कम हो गया है. कृषि विभाग ने किसानों को हरी खाद, गोबर खाद और फसल अवशेष ज्यादा इस्तेमाल करने की सलाह दी है. उर्वरक सोइल हेल्थ कार्ड के अनुसार ही डालें. जिंक, बोरॉन और लोहे जैसे सूक्ष्म पोषक तत्व भी दें. बार-बार एक ही फसल न उगाएं, बल्कि फसल रोटेशन अपनाएं. मिट्टी में नमी बनाए रखने के लिए ड्रिप या स्प्रिंकलर सिंचाई का इस्तेमाल करें.

Get Latest   Farming Tips ,  Crop Updates ,  Government Schemes ,  Agri News ,  Market Rates ,  Weather Alerts ,  Equipment Reviews and  Organic Farming News  only on KisanIndia.in

Published: 19 Dec, 2025 | 05:02 PM

केला जल्दी काला क्यों पड़ जाता है?