Murgi Palan Ke Tips: फरवरी का महीना मुर्गीपालकों के लिए बेहद अहम माना जाता है. इस समय मौसम में हल्की ठंड बनी रहती है, लेकिन दिन के तापमान में धीरे-धीरे बढ़ोतरी शुरू हो जाती है. ऐसे बदलावों का सीधा असर मुर्गियों के स्वास्थ्य, अंडा उत्पादन और वजन वृद्धि पर पड़ता है. इसी को ध्यान में रखते हुए बिहार सरकार के डेयरी, मत्स्य एवं पशु संसाधन विभाग और पशुपालन निदेशालय ने फरवरी माह में मुर्गीपालकों के लिए विशेष सलाह जारी की है. इस सलाह का मेन फोकस दाना और पानी के सही प्रबंधन पर रखा गया है.
संतुलित और उम्र के अनुसार दाना देना जरूरी
मुर्गियों के अच्छे स्वास्थ्य और बेहतर उत्पादन के लिए संतुलित आहार सबसे जरूरी होता है. अलग-अलग उम्र की मुर्गियों की पोषण आवश्यकताएं भी अलग होती हैं. चूजों, ग्रोअर और अंडा देने वाली मुर्गियों के लिए दाने की मात्रा और गुणवत्ता अलग-अलग होनी चाहिए. अगर सभी को एक जैसा दाना दिया जाता है, तो इससे पोषण असंतुलन पैदा हो सकता है, जिसका असर उत्पादन पर पड़ता है. इसलिए मुर्गीपालकों को उम्र और उत्पादन स्तर के अनुसार ही दाना देना चाहिए.
साफ और ताजा पानी की उपलब्धता बेहद जरूरी
पानी मुर्गियों के लिए उतना ही जरूरी है जितना दाना. फरवरी में ठंड के कारण कई बार मुर्गियां कम पानी पीती हैं, जिससे पाचन और अंडा उत्पादन प्रभावित हो सकता है. इसलिए यह जरूरी है कि मुर्गियों को हमेशा साफ, ताजा और पर्याप्त मात्रा में पानी मिलता रहे. बहुत ठंडे मौसम में आवश्यकता अनुसार हल्का गुनगुना पानी देना भी फायदेमंद माना जाता है, जिससे मुर्गियों का पानी पीने का स्तर बना रहता है.

मुर्गीपालकों के लिए बिहार सरकार की एडवाइजरी (Photo Credit: Canva)
अंडा देने वाली मुर्गियों को कैल्शियम जरूर दें
जो मुर्गियां अंडा देती हैं, उनके लिए कैल्शियम की जरूरत ज्यादा होती है. कैल्शियम की कमी से अंडे का छिलका पतला हो सकता है या अंडा उत्पादन कम हो सकता है. इसलिए अंडा देने वाली मुर्गियों को ग्रिट, चूना या कैल्शियम सप्लीमेंट नियमित रूप से देना चाहिए. इससे न केवल अंडों की गुणवत्ता बेहतर होती है, बल्कि मुर्गियों की हड्डियां भी मजबूत रहती हैं.
दाना या दवा अचानक न बदलें
मुर्गीपालन में एक आम गलती यह होती है कि दाना या दवा अचानक बदल दी जाती है. ऐसा करने से मुर्गियों में तनाव पैदा होता है, जिससे उनका खाना-पीना कम हो सकता है और उत्पादन पर नकारात्मक असर पड़ता है. यदि किसी कारणवश दाना या दवा बदलना जरूरी हो, तो उसे धीरे-धीरे पुराने आहार के साथ मिलाकर देना चाहिए, ताकि मुर्गियां आसानी से नए बदलाव को अपना सकें.
सही प्रबंधन से होगा मुनाफा
फरवरी महीने में अगर मुर्गीपालक दाना और पानी प्रबंधन पर विशेष ध्यान दें, तो न सिर्फ मुर्गियों का स्वास्थ्य बेहतर रहेगा, बल्कि अंडा उत्पादन और वजन में भी सुधार देखने को मिलेगा. बिहार सरकार की यह सलाह छोटे और बड़े दोनों तरह के मुर्गीपालकों के लिए उपयोगी है. सही देखभाल और संतुलित पोषण से मुर्गीपालन को अधिक लाभकारी बनाया जा सकता है.