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बदलते मौसम में भी पोल्ट्री फार्मिंग से मिलेगा भारी मुनाफा, बस अपनाएं ये आसान टिप्स
बदलते मौसम में पोल्ट्री फार्मिंग को नुकसान नहीं होगा. सही शेड, तापमान, आहार, पानी, सफाई और टीकाकरण से मुर्गियां स्वस्थ रहेंगी. छोटे चूजों की खास देखभाल जरूरी है. एक्सपर्ट के अनुसार, संतुलित प्रबंधन से अंडा उत्पादन और मुनाफा बढ़ता है, फार्म सुरक्षित रहता है.
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गांव में शुरू करें यह बिजनेस, ‘सोने के अंडे’ देने वाली मुर्गी से होगी शानदार कमाई
कैरी निर्भीक मुर्गी लगभग 5 महीने यानी 170 से 180 दिनों के भीतर अंडे देना शुरू कर देती है. यह सालभर में करीब 170 से 200 अंडे दे सकती है. देसी अंडों की बाजार में कीमत सामान्य अंडों से अधिक मिलती है, जिससे किसानों को बेहतर लाभ मिलता है.
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लखनपुर टोल हटते ही ढहने लगा J&K का पोल्ट्री कारोबार, निवेशकों ने कदम पीछे खींचे
Jammu Kashmir poultry sector: कुछ साल पहले तक जम्मू-कश्मीर का पोल्ट्री सेक्टर स्थानीय खाद्य अर्थव्यवस्था की रीढ़ माना जाता था. कुल खपत का लगभग 80 से 85 प्रतिशत हिस्सा स्थानीय उत्पादन से पूरा हो जाता था. लेकिन 2019 में लखनपुर टोल प्लाजा पर लगने वाला टोल टैक्स खत्म कर दिया गया.
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Desi Poultry Farming: खुद चारा ढूंढने वाली देसी मुर्गियां, जो किसानों की कम खर्च में करा रहीं दोगुनी कमाई
गांवों में देसी मुर्गी पालन तेजी से बढ़ रहा है. सोनाली और FFG-2 नस्ल कम बीमार पड़ती हैं और खुद चारा ढूंढ लेती हैं. इससे दाना और दवा का खर्च घटता है. किसान अंडा, चूजा और मांस बेचकर अच्छी कमाई कर रहे हैं. कम जोखिम में ज्यादा मुनाफा मिल रहा है.
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आंध्र प्रदेश में बर्ड फ्लू फैलने से दहशत में लोग, एक ही दिन में मारी गईं 3 हजार मुर्गियां
आंध्र प्रदेश के चित्तूर जिले में बर्ड फ्लू फैलने से हड़कंप मचा है. एहतियात के तौर पर 3,000 से ज्यादा पक्षियों को नष्ट किया गया है. रायलीसीमा में हाई अलर्ट है और प्रशासन हालात पर कड़ी नजर बनाए हुए है.
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Tip Of The Day: मुर्गी पालन के 3 गोल्डन टिप्स.. फॉलो किया तो नहीं होगा नुकसान, बचेंगे चूजे और बढ़ेगा मुनाफा
Murgi Palan Ke Tips: पॉल्ट्री फार्मिंग में चूजों की सही देखभाल सबसे अहम होती है, खासकर सर्दियों के मौसम में. सही तापमान, साफ-सफाई, सीमित आवाजाही और संतुलित आहार से चूजों की मृत्यु दर कम की जा सकती है. विशेषज्ञों के अनुसार, 35 से 25 डिग्री सेल्सियस के नियंत्रित तापमान और सही वजन सीमा (ढाई किलो) तक पालन करने से किसान कम लागत में बेहतर मुनाफा कमा सकते हैं.








