बजट सत्र के दूसरे चरण में पेश हो सकता है सीड बिल 2025, कैबिनेट से मंजूरी के लिए भेजा जाएगा मसौदा

केंद्र सरकार मार्च-अप्रैल बजट सत्र में नया बीज बिल 2025 संसद में पेश कर सकती है. नए बिल में सभी बीज किस्मों का पंजीकरण अनिवार्य होगा और नकली बीज बेचने पर 30 लाख रुपये जुर्माना व तीन साल जेल का प्रावधान होगा. बीज बाजार 40,000 करोड़ रुपये का है.

Kisan India
नोएडा | Updated On: 25 Feb, 2026 | 08:09 PM

Seeds Bill 2025: केंद्र सरकार मार्च 9 से अप्रैल 2 तक होने वाले बजट सत्र के दूसरे चरण में नया बीज बिल संसद में पेश कर सकती है. कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय ने बिल का मसौदा तैयार कर लिया है और कैबिनेट की मंजूरी के लिए भेजने को तैयार है. मंजूरी मिलने के बाद यह बिल संसद में पेश किया जाएगा. इसके लिए सरकार पुराना बीज बिल, जो 2004 से राज्यसभा में लंबित है, उसे वापस लेगी.

इंडियन एक्सप्रेस की रिपोर्ट के मुताबिक, केंद्र सरकार ने नवंबर 2025 में नया बीज बिल, 2025  का मसौदा पेश किया था और हितधारकों से सुझाव मांगे थे. नया बिल लागू होने पर 1966 का पुराना बीज कानून समाप्त हो जाएगा. बिल के अनुसार, सभी बीज किस्मों का पंजीकरण अनिवार्य होगा और नकली या बिना पंजीकृत बीज बेचने पर 30 लाख रुपये तक जुर्माना और तीन साल तक जेल की सजा हो सकती है.

गैर-घोषित किस्मों के लिए कोई प्रावधान नहीं है

वर्तमान कानून केवल घोषित बीज किस्मों को नियंत्रित करता है और अनुसंधान हाइब्रिड या गैर-घोषित किस्मों के लिए कोई प्रावधान नहीं है. बीज पंजीकरण  भी अब तक अनिवार्य नहीं था. इसके अलावा, हरित खाद बीज, वाणिज्यिक फसलें और प्लांटेशन फसलें वर्तमान कानून में शामिल नहीं हैं. जुर्माने भी बहुत कम थे, इसलिए नए कानून की जरूरत महसूस हुई. पहले की सरकारें मौजूदा बीज कानून में बदलाव करने की कोशिश कर चुकी हैं. उदाहरण के लिए, 9 दिसंबर 2004 को राज्यसभा में एक बिल पेश किया गया और 17 दिसंबर 2004 को संसदीय समिति को भेजा गया, लेकिन यह कभी कानून नहीं बन पाया.

बीज की वार्षिक जरूरत 48.20 लाख टन थी

कृषि और किसान कल्याण मंत्रालय के अनुसार, 2024-25 में बीज की वार्षिक आवश्यकता 48.20 लाख टन थी, जबकि उपलब्धता 53.15 लाख टन थी. मूल्य के लिहाज से भारत का बीज बाजार लगभग 40,000 करोड़ रुपये का है. मई 2014 से अगस्त 2025 तक कुल 3,053 फसल किस्में जारी की गईं, जिनमें 85 फीसदी सार्वजनिक क्षेत्र से और 15 फीसदी निजी क्षेत्र से आई हैं.

नकली बीज बेचने पर सिर्फ 500 रुपये का जुर्माना होता था

बता दें कि कृषि और किसान कल्याण मंत्री शिवराज सिंह चौहान पहले ही कह चुके हैं कि पुराना 1966 का बीज कानून अब समय की जरूरत के हिसाब से पर्याप्त नहीं है. नकली बीज बेचने पर सिर्फ 500 रुपये का जुर्माना होता था, जिससे अपराधियों में डर नहीं था और किसानों को नुकसान उठाना पड़ता था. फसल खराब होती, लागत बढ़ती और आमदनी घटती. इसलिए सरकार ने नया, सख्त और मजबूत कानून लाने का फैसला किया. वहीं, नए सीड बिल 2025 से किसानों को सबसे बड़ा फायदा यह होगा कि अब घटिया या नकली बीज बेचने वालों पर कड़ी कार्रवाई होगी. मंत्री के अनुसार, दोषी पाए जाने पर 30 लाख रुपये तक का जुर्माना और गंभीर मामलों में जेल भी हो सकती है. इससे बाजार में नकली बीज बेचने वालों पर सख्त रोक लगेगी.

वहीं, पहले किसानों को यह चिंता थी कि नया कानून उनके परंपरागत बीजों पर असर न डाले. तब कृषि मंत्री ने स्पष्ट किया था कि देसी और किसान स्तर पर इस्तेमाल होने वाले बीजों पर नया नियम लागू नहीं होगा. किसान अपनी पारंपरिक किस्मों  का उपयोग वैसे ही कर सकेंगे. नए कानून के तहत नकली बीज के मामलों की जांच और कार्रवाई राज्यों की जिम्मेदारी होगी. अब राज्य स्तर की कमेटियां तुरंत जांच कर कार्रवाई करेंगी, जिससे किसानों को जल्दी न्याय मिलेगा.

अच्छे और भरोसेमंद बीजों की उपलब्धता बढ़ेगी

सीड बिल 2025 की एक बड़ी खासियत बीज ट्रैसेबिलिटी सिस्टम है. इसका मतलब है कि किसान आसानी से जान सकेंगे कि बीज कहां से आया है, उसकी गुणवत्ता कैसी है और किस कंपनी ने उसे बनाया है. इससे बीज बाजार में पारदर्शिता बढ़ेगी और धोखाधड़ी के मामले कम होंगे. सरकार नए कानून के तहत निजी कंपनियों को जिम्मेदारी के साथ बीज उत्पादन करने के लिए प्रोत्साहित करेगी. वहीं, इंपोर्टेड बीज बिना जांच-पड़ताल के बाजार में नहीं आ सकेंगे. इससे देश में अच्छे और भरोसेमंद बीजों की उपलब्धता बढ़ेगी.

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Published: 25 Feb, 2026 | 08:07 PM

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