Rajasthan News: राजस्थान के मुख्यमंत्री भजनलाल शर्मा ने किसानों को लेकर एक ऐसा बयान दे दिया है, जिसपर विवाद खड़ा हो गया है. विपक्षी पार्टी कांग्रेस ने उनके बयान की आलोचना की है. इससे राज्य में सियासी तापमान बढ़ गया है. दरअसल, भजनलाल शर्मा ने एक कार्यक्रम में कहा कि कभी उनका किसान पहले स्थान पर था, लेकिन अब तीसरे स्थान पर पहुंच गया है. उन्होंने कहा कि अगर किसान आधुनिक तरीके और मुनाफे वाली खेती अपनाए, तो वह फिर से आगे आ सकता है और सबसे ज्यादा कमाई कर सकता है. इस दौरान उन्होंने कहा कि किसान साल में केवल 25 से 30 दिन ही काम करते हैं. उनके इस बयान के बाद राजस्थान में राजनीति तेज हो गई है.
उन्होंने आगे कहा कि अगर किसान अपनी जिम्मेदारी को समझकर मेहनत से खेती करे, तो उसे नुकसान नहीं होगा. हालांकि उन्होंने यह भी कहा कि किसान साल में सिर्फ 20-25 दिन या एक महीने काम करके पूरे साल की आर्थिक स्थिति मजबूत करना चाहता है, जो संभव नहीं है. उन्होंने कहा कि ज्यादातर किसान 25- 30 दिन से ज्यादा काम नहीं करते, वे सिर्फ बुवाई और कटाई के समय खेत में जाते हैं और बीच में 2-5 दिन सिंचाई करते हैं. उनका मानना है कि अगर किसान रोजाना कम से कम 4 घंटे नियमित रूप से खेती में काम करें, तो वे फिर से आगे आ सकते हैं.
हमने खेती को नजरअंदाज कर दिया
उन्होंने यह भी कहा कि हमने खेती को नजरअंदाज कर दिया है और अगर हम खेती की कद्र नहीं करेंगे, तो खेती भी हमें फायदा नहीं देगी. साथ ही उन्होंने कहा कि कई किसानों के खेतों से पानी तो बह जाता है, लेकिन उसे सही तरीके से संग्रहित नहीं किया जाता. मुख्यमंत्री ने कहा कि कई किसान अपने खेतों का पानी सही तरीके से इस्तेमाल नहीं कर पाते, क्योंकि उनके पास समय नहीं होता और कई लोग शहरों में रहने लगे हैं. ऐसे में खेती की देखभाल कौन करेगा? उन्होंने कहा कि इस तरह खेती को बर्बाद नहीं करना चाहिए.
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मैंने अभी मुख्यमंत्री जी का बयान सुना, मुझे हँसी आ रही है कि मुख्यमंत्री जी कह रहे हैं कि जो किसान है वह साल में 20-25 दिन ही काम करता है, बाकी वह फ्री रहता है।
बड़े कमाल की बात है अपने आप को किसान का बेटा बताते हैं, किसान परिवार से बताते हैं। एक-एक बात आपको पता है, तो आप यह… pic.twitter.com/2ttvuK6WZG
— Tika Ram Jully (@TikaRamJullyINC) April 10, 2026
कांग्रेस पार्टी ने किया पलटवार
इस बयान पर विपक्ष ने कड़ी प्रतिक्रिया दी. नेता प्रतिपक्ष टीकाराम जूली ने तुरंत माफी की मांग करते हुए कहा कि राज्य के अन्नदाता इस तरह का अपमान सहन नहीं करेंगे. उन्होंने आरोप लगाया कि मुख्यमंत्री ने किसानों की कड़ी मेहनत का मजाक उड़ाया है और इसे भाजपा की किसान विरोधी सोच का उदाहरण बताया. टीकाराम जूली ने कहा कि मुख्यमंत्री का ‘साल में 25 दिन खेती’ वाला बयान न सिर्फ हकीकत से दूर है, बल्कि मेहनती किसानों के आत्मसम्मान को ठेस पहुंचाने वाला भी है.
क्या बोले कांग्रेस नेता टीकाराम जूली
उन्होंने कहा कि किसान कठिन परिस्थितियों में लगातार मेहनत करते हैं और पहले से ही संसाधनों, खाद और बीज की कमी से जूझ रहे हैं. उन्होंने यह भी आरोप लगाया कि ‘डबल इंजन’ सरकार की नीतियों के कारण कई किसानों को मजबूर होकर शहरों की ओर पलायन करना पड़ रहा है. टीकाराम जूली ने सवाल उठाया कि जो खुद को किसान परिवार का बेटा बताते हैं, वे यह बात कैसे कह सकते हैं. उन्होंने कहा कि खेती सिर्फ बुवाई और कटाई तक सीमित नहीं होती, बल्कि इसमें खेत की तैयारी, निराई-गुड़ाई और लगातार देखभाल शामिल होती है.
किसान पूरे साल करते हैं मेहनत
उन्होंने आगे कहा कि सिंचाई भी आसान नहीं है, क्योंकि कई जगह किसानों को रात में ठंड में भी खेतों में जाकर पानी देना पड़ता है. उन्होंने यह भी कहा कि कटाई का काम भी एक दिन में पूरा नहीं होता और कई बार ओलावृष्टि से किसानों की फसलें बर्बाद हो जाती हैं, जिसे नजरअंदाज नहीं किया जा सकता. उन्होंने कहा कि मुख्यमंत्री यह समझते हैं कि किसान के एक खेत का सारा काम एक ही दिन में पूरा हो जाता है. जबकि हकीकत में किसान को खेत जोतने, बुवाई करने, निराई-गुड़ाई करने, सिंचाई करने, कटाई करने, फसल इकट्ठा करने, दाना निकालने, उसे घर लाने और फिर बाजार तक पहुंचाने तक कई काम करने पड़ते हैं.
खेती में किसान का पूरा परिवार होता है शामिल
कांग्रेस नेता ने कहा कि इस पूरे काम में सिर्फ किसान ही नहीं, बल्कि उसका पूरा परिवार शामिल होता है, यहां तक कि छोटे बच्चे भी मदद करते हैं. फसल की सुरक्षा के लिए किसान कई बार रात में खेत में ही रुककर निगरानी करता है, ताकि कोई नुकसान न हो. उन्होंने यह भी कहा कि ऐसा लगता है जैसे मुख्यमंत्री बिना खेती की वास्तविक समझ के सिर्फ ‘किसान’ शब्द का इस्तेमाल कर रहे हैं.