गेहूं कटाई के बाद किसान उड़द की इन 5 टॉप किस्मों की करें बुवाई, 75 दिन में तैयार हो जाएगी फसल

उड़द की कुछ खास उन्नत किस्में बहुत जल्दी तैयार हो जाती हैं और किसानों को अच्छा मुनाफा देती हैं. उड़द की खेती का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह कम पानी और कम देखभाल में तैयार हो जाती है. यह मिट्टी की उर्वरता  भी बढ़ाती है, जिससे अगली फसल की पैदावार भी अच्छी रहती है.

Kisan India
नोएडा | Published: 23 Feb, 2026 | 02:45 PM

Black Gram Farming: पंजाब, हरियाणा और पश्चिमी उत्तर प्रदेश में मार्च महीने के आखरी हफ्ते से गेहूं की कटाई शुरू हो जाएगी. इसके बाद खरीफ सीजन तक अधिकांश खेत खाली रहेंगे. लेकिन किसान अगर चाहें, तो गेहूं की कटाई करने के बाद उड़द की बुवाई कर सकते हैं. इससे अच्छी कमाई होगी. खास बात यह है कि मार्केट में कई ऐसी उड़द की किस्में हैं, जिसकी बुवाई करने पर 75 दिनों में ही फसल तैयार हो जाएगी. यानी किसानों को उड़द की कटाई करने के बाद समय पर धान की बुवाई करने का भी वक्त मिल जाएगा.

कृषि एक्सपर्ट के मुताबिक, उड़द की फसल न केवल आपकी आमदनी बढ़ाएगी, बल्कि मिट्टी की ताकत  भी बढ़ाएगी. ऐसे में पंजाब, हरियाणा और उत्तर प्रदेश के किसान गेहूं कटाई के बाद उड़द की बुवाई करके कम समय में एक्स्ट्रा फसल और अच्छी कमाई कर सकते हैं. ऐसे उड़द साल में दो बार उगाई जा सकती है और इसकी मांग हमेशा रहती है. इसलिए दाम भी अच्छे मिलते हैं. यानी मार्च- अप्रैल में उन्नत किस्मों का चुनाव करके किसान कम लागत में ज्यादा मुनाफा कमा सकते हैं.

बड़ी बात यह है कि उड़द की कुछ खास उन्नत किस्में बहुत जल्दी तैयार हो जाती हैं और किसानों को अच्छा मुनाफा देती हैं. उड़द की खेती का सबसे बड़ा फायदा यह है कि यह कम पानी और कम देखभाल में तैयार हो जाती है. यह मिट्टी की उर्वरता  भी बढ़ाती है, जिससे अगली फसल की पैदावार भी अच्छी रहती है. गेहूं की कटाई के बाद खाली पड़े खेत में उड़द की खेती करना आपकी आमदनी बढ़ाने का आसान और लाभकारी तरीका है.

ये हैं उड़ की उन्नत टॉप 5 किस्में

  • पीयू-31-  इसके दाने मध्यम आकार के होते हैं. यह फसल 70- 80 दिन में तैयार हो जाती है और खासकर राजस्थान की जलवायु  के लिए उपयुक्त मानी जाती है. इससे प्रति हेक्टेयर 10- 12 क्विंटल तक पैदावार मिल सकती है.
  • पीडीयू 1-  इसे भारतीय दलहन अनुसंधान संस्थान, कानपुर के वैज्ञानिकों ने तैयार किया है. यह अधिक उत्पादन देने वाली किस्मों में आती है. इसके इस्तेमाल से किसान प्रति हेक्टेयर 10- 11 क्विंटल तक की फसल ले सकते हैं.
  • आजाद 2- उत्तर प्रदेश में यह बहुत लोकप्रिय किस्म है. 75- 80 दिन में पककर तैयार हो जाती है. इसके दाने बड़े और मध्यम काले रंग के होते हैं. सही खेती करने पर प्रति हेक्टेयर 10- 11 क्विंटल उत्पादन मिलता है.
  • टी 9-  इसके दाने मध्यम आकार के, काले और चमकदार होते हैं. यह किस्म किसानों में बहुत लोकप्रिय है और बड़े पैमाने पर उगाई जाती है. बुवाई के 75-80 दिन में ही कटाई के लिए तैयार हो जाती है. गर्मियों में बोने पर यह मॉनसून से पहले ही तैयार हो जाती है और प्रति हेक्टेयर 9-10 क्विंटल तक पैदावार देती है.
  • ईपीयू 94-1-  यह किस्म खासकर मैदानी इलाकों के किसानों के लिए लाभकारी है. इसे पकने में लगभग 85 दिन लगते हैं. समय थोड़ा ज्यादा है, लेकिन इसका उत्पादन भी अच्छा होता है. एक हेक्टेयर खेत में इससे 11- 12 क्विंटल तक उपज मिल सकती है.

 

 

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